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मुक्तक

एक प्रीति राधा के लिए…

DHEERENDRA VERMA
यूँ वो चाहें तो हम भी संभल जाएँगें । वो जाएँ जिधर हम भी ऊधर ही [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी चाहत मेरी आजमाइश सी है! मेरी जिन्द़गी की एक नुमाइश सी [...]

बचपन

DHEERENDRA VERMA
इस बड़े-बड़े के चक्कर में उन छोटों को क्यों भूल गये ..... यह [...]

मनुज, सद्गति बोध-प्रेमी भानु होगा

Brijesh Nayak
चेत गह ,तब हिंद ऊँचा बन सकेगा| ज्ञान लौ पर ही, सुपोषक फल पकेगा| [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
आज तुमसे मेरी जो मुलाकात हो गयी है! हसरतों की जैसे फिर बरसात [...]

** आग लगाकर **

भूरचन्द जयपाल
प्यास जगाकर आग लगाकर पूछते हो क्या ज़रा दिलपर अपने हाथ रख [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
जब भी मैं शाँम की तन्हाइयों में चलता हूँ! बेकरार पलों की [...]

प्यार

Vivek Tiwari
क़भी तुम प्यार बन जाना मेरा इकरार बन जाना जमानें की निगाहों [...]

मुक्तक –आधार छंद दोहा

Dr Archana Gupta
1 सावन सूखा ही गया, देखा पहली बार खोया रूप बसंत का ,कैसी चली [...]

संवेदना घर

Brijesh Nayak
सत्य, नायक वही जो नव चेतना भर | राष्ट्र को उत्थान दे, जन वेदना [...]

चेतना के पंख ही जब छँट गए हैं

Brijesh Nayak
सुकवि भी अब समूहों में बँट गए हैं| ज्ञान सूरज,जग धुआँ-सम भट [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
जब भी मैं शाँम की तन्हाइयों में चलता हूँ! बेकरार पलों की [...]

कितने संघर्ष आसान हुऐ

Neelam Pandey
धुंध के मानिंद आज एक बार सुरों से अलग फिर कहीं गुजरे [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
मुझको कभी मेरी तन्हाई मार डालेगी! मुझको कभी तेरी रुसवाई मार [...]

* बस कमाओ ना *

संजय सिंह
मुस्कुराना ठीक है, पर दिल जलाओ ना l दिल में उतर कर कभी, दिल [...]

कवि वही / दिव्य सत् दे भाव को दिल में उतारे

Brijesh Nayak
कवि वही जो राष्ट्रहित हरदम पुकारे| ज्ञान ऊँँचाई को गह, न [...]

आतमा की सबल लौ दिल में जगा लो/तभी तो सद्ज्ञान का सम्मान होगा

Brijesh Nayak
सहजता के आवरण को अब सँभालो| अहंकारी मैल को धोकर निकालो [...]

इन्टरनेट मुक्ति धाम

S Kumar
कई दिनों से खाली बैठा था, सोच रहा था कि कुछ नया काम करूँ [...]

मजबूतियाँ व्योहार में दीं

Brijesh Nayak
डगर की अड़चनों ने मजबूतियाँ व्योहार में दी | आत्मबल की [...]

मत्तागयन्द/मालती छंद

Dr Archana Gupta
1 मौसम आज करे मदहोश बयार चली बहकी बहकी सी घूँघट खोल रही [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
जब भी दर्दे-सितम की इन्तहाँ होती है! बेकरार लम्हों की [...]

ढल गया सूरज बिना प्रस्तावना

Brijesh Nayak
जन्म पाकर खेल सह सद्भावना| युवावस्था प्यार की संभावना [...]

मुक्तक

musafir vyas
भोपाल म.प्र. ◆◆ मिटा के हाल दिल का पूछ लिया करते हैं बाह कंधो [...]

** मुक्तक **

भूरचन्द जयपाल
* गुल-ए-गुलशन से कोई फूल तो चुनना होगा । अरे भ्रमर फिर [...]

कवि

Brijesh Nayak
सूर्य भी निस्तेज-सा यदि तू सुकवि, बन बढे, हिंसा छटे सद् प्रेम [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कोई है पराया कोई अपना सा होता है! कोई यादों का काफिला सपना सा [...]

कवि /मुस्कुराहट लिख दे, निद्रित प्राण पर

Brijesh Nayak
कवि वही जो चलता सत् किरपान पर | प्रेम वन छा जाए द्वंदी बाण पर [...]

फूल /गुल

संजय सिंह
दो मुक्तक.... फूल ने फूल हमको बनाया हि था l गुलसिता में जो गुल [...]

II सृष्टि का चक्र II

संजय सिंह
मुक्तक -- सृष्टि का चक्र है ऐसा कुछ ऐसे ही चलता है l किसी की [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी तस्वीर को कबतलक देखूँ? जख्मे-तकदीर को कबतलक [...]