साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

मुक्तक

मुक्तक

MITHILESH RAI
मुझसे खता हुई है तुमसे दिल लगाने की! तुम भी भूल गये हो राहें [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
जी रहा हूँ मैं तो अश्कों को पीते-पीते! जी रहा हूँ मैं तो [...]

ईद मुबारक(मुक्तक)

Dr.rajni Agrawal
ईद मुबारक !!! मुबारक ईद हो तुमको तुम्हारी दीद बन जाऊँ। बनी [...]

*आँसू*

Neelam Ji
जब भी आँख से बहते आँसू । दिल की व्यथा कहते आँसू ।। कभी दर्द [...]

पत्थर के ईश …

sushil sarna
पत्थर के ईश ... झूठ की झोली में तो विष ही सदा आया .है कड़वा ही [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो! तन्हा रास्तों पर तुम चलते [...]

जय हिंद

Pritam Rathaur
जिगर में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है भगत सुखराज वो [...]

मित्र को चेतावनी

Pritam Rathaur
जाते हो तुम जिस तरह जल्दी आना जी। प्यारे बच्चों के लिए कुछ [...]

क़तआ

Pritam Rathaur
मिलते हैं जख़्म दिल को मुहब्बत में आजकल होती नही गुजर है [...]

सुर्ख आरिज़ों पे ….

sushil sarna
सुर्ख आरिज़ों पे …. सुर्ख आरिज़ों पे गुलाब रखते हैं ...वो चिलमन [...]

एक मतला दो शेर

Pritam Rathaur
हुआ कैसा मिरे दिल पे निगाहों का असर है जिधर है वो सनम कातिल [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है! तेरी याद आज भी मुझको सताती [...]

मुक्तक

Brijpal Singh
आगे बढ़ रहे सभी, वक्त छूटता जा रहा है इंसान ही इंसान को आज [...]

मुक्तक

Brijpal Singh
प्यार के देखो यहाँ दीवाने बहुत हैं सच है जताने के अफसाने [...]

मुक्तक

Brijpal Singh
मंत्री साहब आश्वासन दिए जा रहे हैं.. किसान दिनोदिन फाँसी [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है! दर्द और तन्हाई की शाम जैसा [...]

शक्ति

Manjusha Srivastava
शक्ति ******* जगदम्बिके तुम शक्ति का भंडार हो दो शक्ति ऐसी [...]

स्पंदन….

sushil sarna
स्पंदन.... झुकी नज़र रक्ताभ अधर ...हुए अंतर्मन के भाव प्रखर [...]

अमर काव्य हर हृदय को, दे सद्ज्ञान-प्रकाश

बृजेश कुमार नायक
लेखन वह, जो राष्ट्रहित- सजग चेतनाकाश देकर, बने सु प्रीति सह [...]

मुलाक़ात….

sushil sarna
मुलाक़ात.... बड़ी हसीन मुलाक़ात हो जाती है .....जब शब् को बरसात हो [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई? तेरा दर्द न आए तो फिर बात [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत! जिन्दगी में गम के बहाने हैं [...]

आखिरी मुलाकात

Govind Kurmi
सीने से लिपटकर रोयी थी कोई अबतक बो रात याद है जाते जाते जो कह [...]

मुक्तक

Manjusha Srivastava
रोटी (1) मन क्लान्त है दुख शोक से सम्भावनाएँ शून्य हैं [...]

मुक्तक

Manjusha Srivastava
(1) सुखद परिवर्तन हो जिस रोज चाँदनी फैलेगी उस रोज प्रेम [...]

मुक्तक

Dr.rajni Agrawal
मुक्तक (१)अधरों पर मुस्कान खिली जब आँगन देखी [...]

मुक्तक

Manjusha Srivastava
[ 1 ] किस सोंच प्रिये तुम बैठी हो ,क्यों अधर कुसुम कुम्हलाए हैं [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
फसाना जिंदगी का अजीब सा होता है! हर ख्वाब आदमी का रकीब सा होता [...]

मुक्तक

Neelam Sharma
सादर प्रेषित सारस मुक्तक वल्गा- प्यार संजीवन प्रसाद है, [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरे सिवा कुछ भी नजर आता नहीं है! ख्वाबों का सफर भी [...]