साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

मुक्तक

मुक्तक

MITHILESH RAI
यादों की करवट से लकीर सी बन जाती है! दिल में तरंगों की तस्वीर [...]

नारी

Akash Yadav
जीवन भर वो जिम्मेदारियां निभाती रही, कभी बेटी तो कभी माँ [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ! हार कर भी तेरी निशानी की तरह [...]

ये तूने क्या कर डाला

श्रीकृष्ण शुक्ल
आज प्रस्तुत हैं पर्यावरण पर दो मुक्तक वृक्ष काट कर इस धरती [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी चाहत दिल में हरदम रहेगी! करवटें तन्हाई की हरदम [...]

हास्य मनहरण*

साहेबलाल 'सरल'
*हास्य मनहरण* *1. वादे की मनहरण* सही तो हमेशा भाई , बिल्कुल [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी चाहत मेरी आदत सी बन गयी है! मेरी जिन्दगी की अमानत सी बन [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरा कबतलक मैं इंतजार करता रहूँ? तेरी वफा पर मैं ऐतबार करता [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी यादों की तन्हाई से डर जाता हूँ! तेरी चाहत की परछाई से डर [...]

दिल करता है

Ram Tiwari
(1) दिल करता है आपसे बार-बार मिलते रहें , दिल करता है आपके [...]

ख़ामोशी

arti lohani
बहुत ही तेज होती हैं ये ख़ामोशी की आवाजें। दिलों को चीर देती [...]

बरस पड़ी आँखें

राजेश
"बरस पड़ी आँखें" "क्षणिका" ------------------- कल बादल भी नहीं थे तन्हा [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
अब तो मंजिलों के भी दाम हो गये हैं! रिश्ते जिन्दगी के नीलाम हो [...]

जहर सा खतरनाक

dinesh rohit chaturvedi
मन अब मैला हो गया ,भाव हुआ नापाक। वचन बदलते हर घड़ी, लोग हुए [...]

विषय : आसान

Pritam Rathaur
💐💐💐💐💐💐 मुश्किले- दौर भी आसान खुदा कर देगा तुझसे खुशियों [...]

वतन की चाह

Pritam Rathaur
चाहत ये वतन की तो दिल से न निकलती है अब खुश्बू-ए-मिट्टी से हर [...]

हिंदी दिवस पर चार पंक्तियाँ

Pritam Rathaur
"हिन्दी" पर मेरा प्रयास 🌷🌷🌷 कितनी सरस है प्यारी भाषा हमारी [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरा ख्याल जब कभी मुझको चूमता है! हरतरफ फिजाओं में सावन [...]

==सुप्रभात ==

Ranjana Mathur
"जाग मुसाफिर हुआ सवेरा, हुई भोर अब मिटा अंधेरा। ये दुनिया एक [...]

“अभी ईमान जिंदा हैं “(मुक्तक)

ramprasad lilhare
"अभी ईमान जिंदा हैं " मुक्तक समान्त -आन पदान्त -जिंदा हैं [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
शाम की तन्हाई में खामोशी आ रही है! ख्वाबों और ख्यालों की [...]

*** मेरा ***

भूरचन्द जयपाल
ख़्वाहिश थी तेरी या फिर सिर फिरा था मेरा बज़्म में आकर अक्सर [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
इसकदर उलझी है जिन्दगी तकदीरों में! हम राह ढूंढते हैं हाथ की [...]

हिंदी का उत्थान

surenderpal vaidya
मुक्तक १. अपनी भाषा हिंदी का उत्थान करें हम। इसी हेतु जागृत [...]

*** मत, भेद रखिए ***

भूरचन्द जयपाल
मतभेद रखिए मन भेद ना रखिए ज़िगर में जुदा हर शख्स है फिर भी [...]

नाजायज़ रहती अग़र माँ……………

seervi prakash panwar
"नाजायज़ रहती अग़र माँ तुम तो,वक्त का अहसास नहीं होता, दुध का [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरे बगैर जिन्दगी बेजान सी रहती है! तेरी बेवफाई से हैरान सी [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी आँखों में झील सी गहरायी है! तेरी अदाओं में कैद अंगड़ायी [...]

*** निजभाषा सम्मान ***

भूरचन्द जयपाल
एक उम्मीद है जगाई निजभाषा सम्मान हिंदी हिन्द की पहचान है [...]

____ * स्वावलंबन * _____

Ranjana Mathur
किसी की भी चाहत अधिक न करो। अपने रास्ते खुद तय करो।। इस [...]