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मुक्तक

जिंदगी

bharat gehlot
हँसने - हँसाने का नाम है जिंदगी , गमो में भी मुस्काने का नाम [...]

एक मुक्‍तक माॅ शारदे केे चरणो में

bharat gehlot
नमन है बारम्‍बार माता शारदे , अन्‍धकार मिटा जगती का , [...]

****** कुछ मुक्तक

दिनेश एल०
"अनुप्रास" अलंकार में ( १ ) छैल छबीली छब्बीस की छोरी | छोकरे [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरे सिवा दिल में कोई आता नहीं है! कारवाँ तेरी यादों का जाता [...]

[[[[ परिंदे की भाषा ]]]]

दिनेश एल०
(((( परिंदे की भाषा )))) तुम हो कितने कठोर, निष्ठुर, चतुर, चालाक [...]

मुझे फिर सताने

ashok ashq
मुझे कर इशारे लुभाने लगे है निगाहों से अपने बुलाने लगे [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
मत पूछो अंजाम तेरे जाने के बाद! मैं खुद को ढूँढता हूँ पैमाने [...]

*** ग़ुस्ल कर लूं ***

भूरचन्द जयपाल
ग़ुस्ल कर लूं तेरी स्मित मुस्कान में नहीं टिक पाऊंगा [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी जुदाई से मैं हरपल डर रहा हूँ! तेरी बेरुखी से मैं हरपल मर [...]

माँ जाती जब झूम

RAMESH SHARMA
आती हैं यादें कभी, बचपन की कुछ घूम ! शाला से घर लौटते, ..माँ लेती [...]

मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई

डी. के. निवातिया
ना पूछो यारो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई फ़ज़ीहत इसकी आजकल [...]

बेटियां

Kusum Sharma
फूलों की क्यारी [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरे लिए मैं अपना ठिकाना भूल जाता हूँ! तेरे लिए मैं अपना [...]

** ज्योति से याराना कर लो **

भूरचन्द जयपाल
बाहरी चकाचौंध से अब मेरे यारों किनारा कर लो अब दिल में [...]

** दर्द सा उठता है धुंआ **

भूरचन्द जयपाल
दिल में दर्द सा उठता है धुआं आज तक गैर अपना ना हुआ करते [...]

** अजीब बात **

भूरचन्द जयपाल
कितनी अजीब बात है दोस्तों शरीफ कभी एक नही होते हैं बदमाश एक [...]

***** दर्द का अहसास ***

भूरचन्द जयपाल
अपनी भी हालत पेड़ से गिरे सूखे पत्ते-सी हो गयी है लोग [...]

** गुमसुम आज मेरा दिल है **

भूरचन्द जयपाल
😢रुक गयी है स्वांसे थम गयी है आंधियां न जाने कौन सा कत्ल [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तुम मेरी जिन्दगी की तस्वीर हो! तुम मेरी मंजिलों की तकदीर [...]

कभी भला तो कभी बुरा लगता है

सागर यादव 'जख्मी'
कभी भला तो कभी बुरा लगता है वो सारी दुनिया से जुदा लगता [...]

टूटकर बिखरने का हौसला नहीँ है

सागर यादव 'जख्मी'
मुझे आपसे कोई गिला नहीँ है मेरी किस्मत मेँ ही वफा नहीँ [...]

पागल

सागर यादव 'जख्मी'
रात -दिन मेरे जीने की दुआ करती है वो लड़की अपना फर्ज अदा करती [...]

चार मुक्तक

मधुसूदन गौतम
मै तुमको जीने की कला एकसिखलाता हूँ। अकिंचन हो जाने की राह [...]

फूल-सम हर हाल पर/ प्रीति हिंदुस्तान बन

Brijesh Nayak
(1) फूल-सम हर हाल पर ........................... द्वंदमय जग-डाल पर, ज्ञान-कंटक [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कभी जिन्दगी खुशी का पैगाम देती है! कभी जिन्दगी ख्वाबों का [...]

भाव, सघन चेत का/ फूल हँसें एक बन

Brijesh Nayak
(1) भाव,सघन चेत का ..................... फूल,शुष्क खेत का| गम न कभी रेत का| [...]

** दुःख किण सूं कहूं साजना **

भूरचन्द जयपाल
दुःख किण सूं कहूं साजणा दिन गिणतां रातां गिणी सुपणा अब सब [...]

“ख्वाब “(प्रतीकात्मक मुक्तक)

ramprasad lilhare
"ख्वाब" (प्रतीकात्मक मुक्तक) रात रूपी बगीची में ख्वाब [...]

हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती

सागर यादव 'जख्मी'
हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती कि पहले की तरह [...]

न शरमाएँगे दुनिया से

सागर यादव 'जख्मी'
न शरमाएँगे दुनिया से सुबह को शाम कह देँगे जो नफरत के पुजारी [...]