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लेख

विचार, संस्कार और रस [ दो ]

कवि रमेशराज
काव्य के रसतत्त्वों एवं उनके रसात्मकबोध को तय करने वाली [...]

विचार, संस्कार और रस [ एक ]

कवि रमेशराज
समूची मानवजाति की रागात्मक चेतना का विकास विशिष्ट स्थान, [...]

काव्य का आस्वादन

कवि रमेशराज
काव्य में संदर्भ में, पुराने काव्यशास्त्रिायों से लेकर [...]

विचार और रस [ दो ]

कवि रमेशराज
रसाचार्यों द्वारा गिनाए विभिन्न प्रकार के रसों का [...]

रससिद्धान्त मूलतः अर्थसिद्धान्त पर आधारित

कवि रमेशराज
आचार्य भरतमुनि ने रस तत्त्वों की खोज करते हुए जिन भावों को [...]

विचार और रस [ एक ]

कवि रमेशराज
काव्य के संदर्भ में ‘रस’ शब्द का अर्थ-मधुरता, शीतल पदार्थ, [...]

काव्य में विचार और ऊर्जा

कवि रमेशराज
डॉ. आनंद शंकर बापुभाई ध्रुव अपने ‘कविता’ शीर्षक निबंध में [...]

भाव और ऊर्जा

कवि रमेशराज
पाठक, श्रोता या दर्शक जब किसी काव्य-सामग्री का आस्वादन करता [...]

काव्य-अनुभव और काव्य-अनुभूति

कवि रमेशराज
विभिन्न प्रकार की वस्तुओं या विषयों की उद्दीपन क्रियाओं का [...]

काव्य में सहृदयता

कवि रमेशराज
किसी भी प्राणी की हृदय-सम्बन्धी क्रिया, उस प्राणी के [...]

विचार और भाव-2

कवि रमेशराज
रस की स्थापना के लिए रस-शास्त्रियों ने रस-सामग्री के रूप में [...]

विचार और भाव-1

कवि रमेशराज
भाव का सम्पूर्ण क्षेत्र विचार का क्षेत्र है। जो [...]

रस का सम्बन्ध विचार से

कवि रमेशराज
किसी भी प्राणी के लिए किसी भी प्रकार के उद्दीपक [स्वाद, ध्वनि, [...]

एक सिपाही

RASHMI SHUKLA
क्या जीवन है बॉर्डर पे तैनात एक जवान का, न मजहब का पता है उसके [...]

यह कैसा प्यार

पारसमणि अग्रवाल
प्यार शब्द का कानों को स्मरण होते ही मन में एक अजीब सी उमंग एक [...]

डॉ. नामवर सिंह की दृष्टि में कौन-सी कविताएँ गम्भीर और ओजस हैं??

कवि रमेशराज
कविता के क्षेत्र में यह प्रश्न कि ‘कविता क्या है? कोई नया [...]

विचारों की सुन्दरतम् प्रस्तुति का नाम कविता

कवि रमेशराज
कविता लोक या मानव के रागात्मक जीवन की एक रागात्मक प्रस्तुति [...]

आचार्य शुक्ल के उच्च काव्य-लक्षण

कवि रमेशराज
आचार्य रामचंद शुक्ल अपने निबंध ‘कविता क्या है’ में कविता को [...]

आचार्य शुक्ल की कविता सम्बन्धी मान्यताएं

कवि रमेशराज
‘‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञान-दशा कहलाती है, उसी [...]

डॉ. ध्रुव की दृष्टि में कविता का अमृतस्वरूप

कवि रमेशराज
डॉ. आनन्द शंकर बाबू भाई ध्रुव अपने ‘कविता’ शीर्षक निबन्ध [...]

पाश्चात्य विद्वानों के कविता पर मत

कवि रमेशराज
प्रख्यात आलोचक श्री रमेशचन्द्र मिश्र अपनी पुस्तक [...]

डॉ. नगेन्द्र की दृष्टि में कविता

कवि रमेशराज
‘‘कविता क्या है? यह एक जटिल प्रश्न है। अनेक आलोचक यह मानते [...]

डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के अन्तर्विरोध

कवि रमेशराज
‘‘एक नये सृजनशील कवि के नाते मुक्तिबोध ‘काव्य और जीवन, दोनों [...]

डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के प्रपंच

कवि रमेशराज
डॉ .नामवर सिंह अपनी पुस्तक ‘कविता के नये प्रतिमान’ में लिखते [...]

डॉ. नामवर सिंह की रसदृष्टि या दृष्टिदोष

कवि रमेशराज
‘‘जो केवल अपनी अनुभूति-क्षमता के मिथ्याभिमान के बल पर नयी [...]

डॉ. राकेशगुप्त की साधारणीकरण सम्बन्धी मान्यताओं के आलोक में आत्मीयकरण

कवि रमेशराज
‘‘आस्वाद रूप में रस, हृदय संवादी अर्थ से उत्पन्न होता है और [...]

आत्मीयकरण-2 +रमेशराज

कवि रमेशराज
रस को व्याख्यायित करते हुए आचार्य विश्वनाथ कहते हैं कि [...]

आत्मीयकरण-1 +रमेशराज

कवि रमेशराज
आचार्य प्राग्भरत बतलाते हैं कि ‘‘जब कोई हृदय संवादी अर्थ [...]

काव्य की आत्मा और सात्विक बुद्धि +रमेशराज

कवि रमेशराज
आचार्य भोज काव्य के क्षेत्र में आत्मा को अनावश्यक मानते हुए [...]

काव्य की आत्मा और औचित्य +रमेशराज

कवि रमेशराज
डॉ. नगेन्द्र अपनी पुस्तक ‘आस्था के चरण’ में लिखते हैं कि [...]