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लेख

डिअर डेयरी से मेरी बात

pratik jangid
dear diary में तुमको यह बताना चाहता की तुमको मेने बनाया ताकि [...]

धार्मिक सहिष्णुता बनाम राष्ट्रीय एकता

डॉ०प्रदीप कुमार
" धार्मिक सहिष्णुता बनाम राष्ट्रीय एकता [...]

गर्मी के चटपटे…

शालिनी साहू
सूरज भइया के ये नखरे! अब सबके पसीने छुटा रहे हैं हर व्यक्ति की [...]

रानगिर की हवा में शामिल हैं दक्षकन्या की स्मृतियाँ

ईश्वर दयाल गोस्वामी
दिव्य-कन्या बन गई पाषाण-प्रतिमा- तीन रूपों में होते हैं [...]

मटका : हमारी संस्कृति भी, हमारा स्वास्थ्य भी

राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'
आज का समय तेजी से भागती दुनिया का है। प्रतियोगिताओं के जंजाल [...]

हमारा हिंदुस्तान

RASHMI SHUKLA
आज देखा माता की चौकी को एक मुस्लिम दे रहा था सहारा, वो अपना [...]

अल्लाह का दूसरा रूप है : पंचमहाभूत

Shalini Tiwari
अल्लाह ( अलइलअह ), यदि हम इसका विश्लेषण करें तो पाएगें कि अ- आब [...]

धर्म के नाम पर पशु हत्या क्यों?

Umesh Pansari
मानव को यह जीवन निर्बल की सहायता हेतु मिला है फिर क्यों नहीं [...]

इन रावणों को कौन मारेगा?

कवि रमेशराज
क्वार सुदी दशमी को बेहद उल्हास के साथ मनाये जाने वाले उत्सव [...]

पितरों के सदसंकल्पों की पूर्ति ही श्राद्ध

कवि रमेशराज
‘श्राद्ध प्रकाश’ में बृहस्पति कहते हैं कि सच्चे मन और [...]

नारी-शक्ति के प्रतीक हैं दुर्गा के नौ रूप

कवि रमेशराज
ग्रीष्म ऋतु में चैत्रमास की अमावस्या के दूसरे दिन प्रारंभ [...]

शिव ही बनाते हैं मधुमय जीवन

कवि रमेशराज
शिव समस्त देवों के देव माने गये हैं, क्योंकि वे मनुष्य ही [...]

शिव-स्वरूप है मंगलकारी

कवि रमेशराज
शास्त्रों की मान्यतानुसार पावन गंगा को अपनी लटों में धारण [...]

लक्ष्मी-पूजन

कवि रमेशराज
कार्तिक मास की अमावस्या को पूरी धूमधाम से मनाये जाने वाले [...]

हर घर में नहीं आती लक्ष्मी

कवि रमेशराज
दरिद्रता जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। आदमी यदि दरिद्र हो तो [...]

द्रौपदी ने भी रखा था ‘करवा चौथ’ का व्रत

कवि रमेशराज
कार्तिक वदी चतुर्थी के दिन रखे जाने वाले व्रत का नाम [...]

बड़ी मादक होती है ब्रज की होली

कवि रमेशराज
तरह-तरह के गीले और सूखे रंगों की बौछार के साथ बड़ी ही धूम-धाम [...]

मस्ती का त्योहार है होली

कवि रमेशराज
होली शरारत, नटखटपन, मनोविनोद, व्यंग्य-व्यंजना, हँसी-ठठ्ठा, [...]

लक्ष्मी-पूजन का अर्थ है- विकारों से मुक्ति

कवि रमेशराज
कार्तिक मास की अमावस्या को पूरी धूमधाम से मनाये जाने वाले [...]

धनतेरस जुआ कदापि न खेलें

कवि रमेशराज
कार्तिक बदी त्रयोदसी मनाये जाने वाले त्यौहार ‘धनतेरस’ को [...]

विष का कलश लिये धन्वन्तरि

कवि रमेशराज
कार्तिक बदी त्रयोदशी को कृष्ण पक्ष में रात को घर की देहरी पर [...]

भगवान ने कहा-“हम नहीं मनुष्य के कर्म बोलेंगे“

कवि रमेशराज
नारदजी ने भगवान विष्णु से कहा कि, ‘‘प्रभु आज कार्तिक शुक्ल [...]

फिर मिलेंगे

Rahat Wasim
आऊंगा फिर कभी तेरी ओर अपने साथ लेके एक नई पहचान अभी चलता हूं [...]

रिश्ता

Rahat Wasim
अजीब है ये रिश्तो की पहेली अगर समझ आ जाएं तो ज़िंदगी सवर जाती [...]

स्वाभिमान बनाम अभिमान

डॉ०प्रदीप कुमार
" स्वाभिमान बनाम अभिमान " --------------------------------------- सांख्य दर्शन की [...]

जब ‘नानक’ काबा की तरफ पैर करके सोये

कवि रमेशराज
अपने-अपने धर्म और अलग-अलग ईश्वरों दैव-शक्तियों को लेकर भेद [...]

भाईचारे का प्रतीक पर्व: लोहड़ी

कवि रमेशराज
‘लोहड़ी’, ‘तिल’ तथा ‘रोड़ी’ शब्दों के मेल से बना है, जो शुरू में [...]

कश्मीरी पण्डितों की रक्षा में कुर्बान हुए गुरु तेगबहादुर

कवि रमेशराज
सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर सरल-सौम्य और संत स्वभाव के थे। [...]

गुरु तेगबहादुर की शहादत का साक्षी है शीशगंज गुरुद्वारा

कवि रमेशराज
मुगल बादशाह औरंगजेब महत्वाकांक्षी, क्रूर और अत्याचारी [...]

गुरु रामदास

कवि रमेशराज
गुरु रामदास जी अपने विचारो से दृढ़, अद्भुत संगठनकर्ता और [...]