साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

कुण्डलिया

चमन-सदृश गुणबान , प्रीति बन कहते गांधी

Brijesh Nayak
गांधी जी की जयंती, सत्य-अहिंसा-प्रेम| पाठ पढ़ो औ जानकर, धारण [...]

नहीं चैन में कोई, छोड़ दो कक्का बीड़ी /सूरज नाम परंतु, पी रहे बुद्धू-बीड़ी

Brijesh Nayak
बीड़ी औ सिगरेट पी, पत्नी को दें ज्ञान| कहें नहीं दिखला मुझे, [...]

कैसें दिखे स्वराज,हृदय है जब बिन भाव

Brijesh Nayak
भाव बिना गणतंत्र दिन, घटना बना सुजान| गुण गायन कर बीर का, भूले [...]

नहीं भटकिए आप, मिलेंगे यम कुछ आगे

Brijesh Nayak
आगे मंदिर कृष्ण का, पीछे आश्रम-धाक| आँगन में फिर भी चले, [...]

कुंडलिया : शहीदों को सलाम

Radhey shyam Pritam
शहीद दिवस पर करते,शहीदों को सलाम। जिनकी बदोलत है ये,स्वतंत्र [...]

गहन बोध-आलोक, लोक का कल है बेटी/ पकड़ प्रीति को कहो एक हैं बेटा-बेटी

Brijesh Nayak
बेटा-बेटी सम समझ,कर समता जलपान| दो संताने बहुत हैं,पकड़ [...]

हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान

Dr Archana Gupta
शत शत नमन हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान राजगुरु [...]

अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम

Brijesh Nayak
हम स्वतंत्रता दिवस पर, करते उनको याद| जो शहीद बन आज भी, करें [...]

तीन कुण्डलिया छंद

सतीश तिवारी 'सरस'
(1) सच को मैं जो थामता,उतने हों वो दूर. अहंकार में ख़ुद [...]

योग रूप की धार, न कम करना श्री योगी

Brijesh Nayak
योगी जी की सुबुधि में, सदा ज्ञान की आग| दिखा किंतु दिल में परम, [...]

चेतन बनिए आप, नशा दुख की जड़ काका

Brijesh Nayak
काका पीकर चिलम नित, बने साँस का रोग| समल जगत् का रूप गह , फँसें, [...]

जस भोजन, तस आप, पियो मत धारा गंदी

Brijesh Nayak
गंदी नाली बन गया पी शराब की धार| गिरवी रखा समूल मन, गहकर [...]

उलझे उलझे बाल

RAMESH SHARMA
मैंने अपने हाथ पर,ज्यों ही रखा गुलाल ! याद किसी के आ गये, .गोरे [...]

बने व्याधि के पूत, हाँफते पीकर गाँजा

Brijesh Nayak
गाँजा-चरस-अफीमची,बन सिकुड़ी है खाल| जब-बंधन की खाट पर, ठोक रहे [...]

सदा ज्ञान जल तैर रूप माया का जाया

Brijesh Nayak
जाया करवा-चौथ व्रत, रख देती उपदेश| फिक्र कि अगले जनम में ,पुनि [...]

मारे ऊँची धाँक,कहे मैं पंडित ऊँँचा

Brijesh Nayak
ऊँचा मुँह कर बोलते, गुटखा खा श्रीमान| गाल छिले, फिर भी फँसे, [...]

* कुण्डलिया *

surenderpal vaidya
* कुण्डलिया * १. चारवाक का देखिए, मनमोहन अवतार। कहता है बस आज [...]

गया मुलायम राज

बसंत कुमार शर्मा
टोली बबुआ की गई, गया मुलायम राज योगी जी अब हो गए, यू पी के [...]

“नारी की महत्ता “(कुण्डलियाँ छंद)

ramprasad lilhare
"नारी की महत्ता " (कुण्डलियाँ छंद " 1.नारी तुम ये न समझो, तुम हो [...]

“होली की कुण्डलियाँ “(कुण्डलियाँ छंद)

ramprasad lilhare
"होली की कुण्डलियाँ " (कुण्डलियाँ छंद) 1. सजना,सजनी से कहे, [...]

मनाओ मिलकर होली

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
टेसू, सेमल खिल उठे, बजे बसन्ती राग मस्ती, रंग, गुलाल से, देखो [...]

देख फिर आई होली

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
पीली सरसों ने किया, स्वर्ण कनक मनुहार नीली अलसी मिल हुआ, अजब [...]

होली

Kaushlendra Singh Lodhi
होली पर्व है प्रेम का, भाई चारा धर्म। मन का कलुष मिटाइए, समझ [...]

बिखर रहे हैं रंग

surenderpal vaidya
बिखर रहे हैं रंग। (कुण्डलिया) १. देखो होली आ गई, बिखर रहे हैं [...]

खेलें ऐसी होली

AWADHESH NEMA
होली के त्यौहार पर, खुशियां मिले अपार । झूम उठे मन आपका, हो [...]

होली उत्सव प्रसंग पर…

सतीश तिवारी 'सरस'
तीन कुण्डलिया छंद (1) बहे बसंती पवन ले,अपने उर में प्यार. कोयल [...]

होली

Dr Archana Gupta
बंदर जैसा मुख हुआ, गर्दभ जैसी चाल रंगो ने मिल भाँग से , ऐसा [...]

नारी शक्ति

Rajni Ramdev
नारी फौलादी समझ, सुकुमारि नही मान उमा रमा सीता सती, ...रानी [...]

नारी

Dr Archana Gupta
नारी के इस दर्द को , कौन सका पहचान जननी होकर सृष्टि की, मिला [...]

II सबसे बड़ा है पैसा..II(कुंडलिया)

संजय सिंह
कुण्डलिया छंद ----- सबसे बड़ा है पैसा ,संबंधों को त्याग l हम [...]