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कविता

बौराया बादल

डॉ मधु त्रिवेदी
मै पागल बौराया बादल हूँ. करू छेडाखानी जा मेघों से. कालिदास [...]

फिर उसे मेरी याद आ रही होगी – कुमार विश्वास

MridulC Srivastava
आप आये या बाहर आई नव जीवन नई चाँदनी साथ लाई,तोड़ ही चुके थे इस [...]

रमेशराज के ‘नव कुंडलिया ‘राज’ छंद’ में 7 बालगीत

कवि रमेशराज
क्या है 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ? ----------------------------------------- मित्रो ! 'नव [...]

मत चल मानुष ! उल्टी चालें

Rita Singh
ताटंक छंद मत चल मानुष ! उल्टी चालें एक दिवस पछताएगा । समय [...]

यादें

अनुपम राय'कौशिक'
सोचता रहता हूँ हर पल, अब तो बस बातें तेरी, कैसे थे वो दिन [...]

जगतमें हो कोई न उदास :: जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट११६)

Jitendra Anand
श्रंगार छंद ------------++ जगत् में हो कोई न उदास । सरस हो हास और [...]

अनेक एक हो जाते हैं( शेष भाग) जितेन्द्रकमल आनंद ( पोस्ट११५)

Jitendra Anand
तब आवश्यकता नहीं रहती मूर्ति अर्चना की / प्रस्तर - वंदना [...]

रिश्ता

Mohsin Aftab Kelapuri
रिश्ता कल उसने पूछ ही डाला तुम आख़िर कौन हो मेरे हमारे [...]

अनेक एक हो जाते हैं ! —–जितेन्द्र कमलआनंद ( ११३)

Jitendra Anand
प्रिय आय्मन ! जब स्वयं का चोला ही रंग जाता है उसके रंग में , तब [...]

याद रखो ! शक्ति का जहॉ होता है दुरुपयोग: जितेंद्र कमल आनंद ( ११२)

Jitendra Anand
याद रखो ( मुक्त छमद कविता ) ----------- प्रिय आत्मन ! याद रखो ! शक्ति [...]

कोई ना जाने……….

MANINDER singh
कोई ना जाने कब वक्त दगा कर जाये, चलती फिरती देह कब मिटटी हो [...]

रस लीजिए आध्यात्मिक साहित्यिक : जितेन्द्रकमल आनंद (१११)

Jitendra Anand
राजयोगमहागीता::: अध्याय२१का घनाक्षरी २० ******************** रस लीजिए [...]

हास्य -व्यंग्य कविता -समाज को जागरूक रखेंगे

डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज
समाज को जागरूक रखेंगे ---------------------------------- मैंने एक दिन चाहा खुली [...]

जीवितरहने की स्पृहा ही तेरा है बंधन:: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१०९)

Jitendra Anand
राजयोगमहागीता:: घनाक्षरी *******************" जीवित रहने की स्पृहा ही [...]

स्वयंकोविश्वरूप संशयमुक्तजानकर:: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१०८)

Jitendra Anand
राजयोगमहागीता: घनाक्षरी ------------------------ स्वयंको विश्वरूप संशय [...]

कन्‍यादान

मनहरण मनहरण
कन्‍यादान कलेजे को टुकड़े को दान किए जा रहा हूँ, नम है मेरी [...]

तीन तलाक

डॉ सुलक्षणा अहलावत
खुश हो लिए तुम तीन बार तलाक कह कर, पता है मन भर गया है तुम्हारा [...]

*मेरे घर में बना बगीचा*

आनन्द विश्वास
मेरे घर में बना बगीचा, हरी घास ज्यों बिछा गलीचा। गेंदा, [...]

सरहद

शिवदत्त श्रोत्रिय
सरहद, जो खुदा ने बनाई|| मछली की सरहद पानी का किनारा शेर की सरहद [...]

शांत और मुक्त भी मैं ,निर्भय हूँ निराश्रय:: जितेंद्रकमलआनंद( पोस्ट१०३)

Jitendra Anand
राजयोगमहागीता: घनाक्षरी : अधंयाय२ छंद १८ -------------------------- शांत और [...]

कविता

डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज
नारी ------ जैसे होठों पर जिसके लाली लगी हो , माथे पर [...]

आऩंद – अणु से मिलनातुर :: जितेंद्रकमल आनंद( पोस्ट१०१)

Jitendra Anand
आनंद ,-- अणु से मिलनातुर ( मुक्त छंद कविता ) -------------------------- सखे ! जिस [...]

निकला हूँ अपने पथ पर/मंदीप(कविता)

Mandeep Kumar
निकला हूँ अपने पथ पर/मंदीप निकला हूँ अपने पथ पर अब पा कर [...]

सृष्टा की यह सृष्टि याकि विश्व की : जितेंद्रकमलआनंद ( १००)

Jitendra Anand
घऩाक्षरी :: ------------- सृष्टा की यह सृष्टि याकि विश्व की सृष्टि, [...]

आत्मा से विश्व है, यह विश्व भी मैं :: जितेंद्रकमलआनंद ( पोसंट९९)

Jitendra Anand
घनाक्षरी -------------- आत्मा से विश्व है , यह विश्व भी मैं ही हूँ और [...]

आनंद- पथ पर ,प्रकाश की ओर:: जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट९६)

Jitendra Anand
आनंद - पथ पर ( मुक्त छंद कविता ) -------------------------+----------------- प्रिय आत्मन् [...]

वह स्वयं में व्याप्त है ::: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट९५)

Jitendra Anand
वह स्वयं में व्याप्त है ( मुक्त छंद कविता [...]

आनंद प्रवाह : यदि तुम अपनी चेतना :: जितेन्द्र कमल आनंद ( ९४)

Jitendra Anand
आनंद -- प्रवाह ( छंद मुक्त ) ---------------------------- प्रिय आत्मन ! यदि [...]