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कविता

कविता : रिश्ते हैँ कच्चे धागे

Radhey shyam Pritam
रिश्ते कच्चे धागे,मोल न इनका कोय। समझे तो ज़न्नत,न समझे तो नरक [...]

सवेरा

ABHISHEK SHARMA
नये वर्ष का एक नया सफर है बीते गम अब खुशियों की लहर है अपनो के [...]

गुल्लक

ABHISHEK SHARMA
" गुल्लक " बन्द देह की गुल्लक में अपनी काया है छोडो दौलत का [...]

कागज की कश्ती

arti lohani
भेजकर उसने कागज की कश्ती बुलाया है समन्दर पार मुझे वो नादाँ [...]

जीवन का खेल बडा अनोखा है.

shweta pathak
दो हसीन पल जी लेने दो यारो. ये जिन्दगी मिली है, बड़ी मुद्दतो [...]

जीवन का खेल बडा अनोखा है.

shweta pathak
दो हसीन पल जी लेने दो यारो. ये जिन्दगी मिली है, बड़ी मुद्दतो [...]

जीवन का खेल बडा अनोखा है.

shweta pathak
दो हसीन पल जी लेने दो यारो. ये जिन्दगी मिली है, बड़ी मुद्दतो [...]

जीवन का खेल बडा अनोखा है.

shweta pathak
दो हसीन पल जी लेने दो यारो. ये जिन्दगी मिली है, बड़ी मुद्दतो [...]

जो मिला उसे खुशी से जीना सीखो.

shweta pathak
ना करो गिला''ना हो सिकवा' सिकायत का रूख ना हो खुदा से; क्या [...]

हालाते वतन

shweta pathak
जुल्म की दुनिया.सब खौफ है.सब खौफ है....रहनुमा जो बन गया .रहगुजर [...]

आदमी

अजय '' बनारसी ''
बीत गए वो लम्हे अतीत के पन्नो पर कुछ छाप छोड़ गए कुछ मीठी [...]

पत्थर

अजय '' बनारसी ''
गाँव से गुजरने वाले रास्ते का पत्थर जो दिखने में है सिर्फ [...]

••जी लो ज़िंदगी••

रागिनी गर्ग
ज़िंदगी का क्या भरोसा, कब मौत के आगोश में चली जाये। उससे [...]

काश मुझे भी बिटिया होती

Kokila Agarwal
काश मुझे भी बिटिया होती उसकी आंखो में खुद को जीती महकी मेरी [...]

भारत का कोहिनूर

Sumita R Mundhra
           भारत का कोहिनूर                ------------------------ अपने कर्मों [...]

ओ अजनबी…

arti lohani
ओ अजनबी क्या तुम सचमुच अजनबी हो? वक्त-बेवक्त आ जाते हो [...]

“शरीर ही तो झुलसा है”

इंदु वर्मा
शरीर ही तो झुलसा है... रूह में जान अब भी बाकी है.. हिम्मत से [...]

क्यूँ ऐसी हूँ ———

पूनम झा
क्यूँ ऐसी हूँ -------- * उफ्फ: थक गई सबका मन रखते रखते। खुद को भी [...]

गया साल!

Madhumita Bhattacharjee Nayyar
बच्चों की मुस्कान सा मासूम, खिलखिलाता, किलोल करता, गया [...]

गरीबी

अजय '' बनारसी ''
जिस तरह शाख से टूटकर पेड़ की पाती समय के साथ सूख जाती है नाव [...]

इनको भी हक दो (बाल श्रमिक)

रागिनी गर्ग
जिन काँधों पर बस्ता सजाना था उन पर सजती जिम्मेदारी है छोटी [...]

लो चला मैं… ओमपुरी जी को श्रद्धांजलि

जयति जैन (नूतन)
लो चला मैं... तुम सबसे दूर कुछ के लिये बुरा तो कुछ के लिये [...]

यह जीवन रंगमंच है

रागिनी गर्ग
मौत ने ज़िन्दगी से कुछ यूँ कहा ऐ ज़िंदगी एक बात बता तू [...]

कभी अलविदा ना कहना

Balkar Singh Haryanvi
आप सब की नजर मेरी नई कविता... "कभी अलविदा ना कहना" मां की [...]

कहां गया वो वक्त

Vandaana Goyal
कहाॅ खो गया वो वक्त... जब खुषियों की कीमत माॅ के चेहरे से लग [...]

” भरी है गगरी , छलक न जाये “

भगवती प्रसाद व्यास
निर्जन राह, रूप हठीला ! रूप गर्विता, बदन गठीला ! आँचल सरकाया [...]

रुह को रुह में उतरने दो

arti lohani
आज लबों को बोलने की इजाज़त नहीं आंखो को ये काम करने दो करीब आ [...]

शुभ गणेशोत्सव

Sumita R Mundhra
शुभ गणेशोत्सव जय-जय-जय गणपति गणराज, पूर्ण करो भक्तों के सब [...]

मैं तो कहता हूँ

Brijpal Singh
मैं तो कहता हूँ...... मैं तो कहता हूँ हर युवा को अब जाग जाना [...]

बदले हुए रिश्तों की कुछ ऐसी कहानी है

रागिनी गर्ग
बदले हुए रिश्तों की कुछ ऐसी कहानी है , एक आँख तो सूखी है, [...]