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कविता

मुस्कुराते है चंद चेहरे….

Dinesh Sharma
दुःख के तपिश में फिर भी मुस्कुराते है चंद चेहरे अपने दम [...]

नासमझ है…

Dinesh Sharma
उसने मुझे एक कागज थमाया,मुस्कुराते हुए कहा इसमें लिखा है [...]

फ़ौज़ी का खत प्रेमिका के नाम

शिवदत्त श्रोत्रिय
कितनी शांत सफेद पड़ी चहु ओर बर्फ की है चादर जैसे कि [...]

वो वैश्या

dr. pratibha prakash
मैंने एक वैश्या को देवी से ऊपर देखा एक पण्डित को उसके कदमो [...]

घुटती सिसकियां

dr. pratibha prakash
------ घुटती रहेंगी आखिर कब तक सिसकियाँ दरवाजो में लुटती रहेगी [...]

कन्या भ्रूण संरक्षण

avadhoot rathore
कविता क्यों बिटिया तुम्हें रास आती नहीं ? क्यों ख़ुशियाँ [...]

निगाह

Dinesh Sharma
जलता है मन जलती हुई निगाह देखकर डरती है कली काले मन का काला [...]

बदलते चेहरे बदलते रिश्ते…

Dinesh Sharma
दिया था.... मांग कर जाने क्या गुनाह हो गया अपनों में बुरे हो [...]

यह कौन आया

Harish Bhatt
यह कौन आया छेड़ दिए दिल के तार दिल से निकली आहट वर्षों से [...]

वही आवाज़

dr. pratibha prakash
SUPRABHAT मित्रों आज फिर से उसने आवाज लगाईं जो मुझे सुनाई मीरा [...]

औरत

shalni sri
अमूर्त सी भावनायें आहत बहुत करतीं हैं, टूटने की आवाज [...]

” भोर “

Dr.Nidhi Srivastava
लावण्यमय है भोर धवल , सुरम्य श्वेत कली कमल , सुरभित सरोवर में [...]

“लिखूँ मैं”

Dr.Nidhi Srivastava
शब्द लिखूँ ,गीत लिखूँ, छन्द लिखूँ मैं , आज नव - रूप सजा उमंग [...]

माँ तेरी याद के है बहुत मौके

Dinesh Sharma
जब गूंजते ये शब्द कानो में किसी माँ के, बेटा अभी खाया ही क्या [...]

धरती माँ

Laxminarayan Gupta
धरती धर ती कितना बोझा नहीं कभी हमने ये सोचा भेदभाव के बिना [...]

अम्बर पुकारे

Laxminarayan Gupta
गतिशील रहना धरती सिखाये निस्वार्थ सेवा सूरज सिखाये चलती [...]

मैं तुम्हें वैसे ही पढना चाहता हूँ

Vishal Vishu
मैं तुम्हें वैसे ही पढना चाहता हूँ जैसे कोई बच्चा चिल्ला [...]

“बस रोक रखी थी”

Dr.Nidhi Srivastava
टूट तो मैं कब की चुकी थी, बस रोक रखी थी,खुद को बिखरने से| एक [...]

“स्मृति स्पन्दन”

Dr.Nidhi Srivastava
आज मौन में कुछ हलचल सी है , नयनों में कुछ कल - कल सी है | उर -आँगन [...]

संगीत दिवस

dr. pratibha prakash
सारा दिन हुई योग की चर्चा आओ अब गीत शारदे गा लें संगीत की बज [...]

बड़ा हाथ (लघु कथा)

हरीश लोहुमी
बड़ा हाथ ******* .….आइये बाबू जी आइये। ये लीजिये सवा पांच रुपये का [...]

मैने तुम पर गीत लिखा है

शिवदत्त श्रोत्रिय
एक नही सौ-२ है रिस्ते है रिस्तो की दुनियादारी, कौन है अपना [...]

झुलस

dr. pratibha prakash
धरती के झुलसते आँचल को अम्बर ने आज भिगोया है झूम उठे वायु संग [...]

प्रेम

dr. pratibha prakash
जीवन अधूरा प्रेम बिना भक्ति अधूरी प्रेम बिना है समर्पण [...]

पापा

dr. pratibha prakash
मुझे लगता नहीं पापा कि कोई दिन विशेष हो तुम्हें याद करने के [...]

“यादों के अवशेष”

सन्दीप कुमार 'भारतीय'
"यादों के अवशेष" एक अरसे बाद गाँव में यूँ ही निकल पड़ा अकेला [...]

चमत्कार

Dinesh Sharma
चमत्कार को नमस्कार है आज धन ही चमत्कार है इंसान के पास अगर धन [...]

अफ़सोस

dr. pratibha prakash
अफ़सोस जताने ये मन निकला क्यों ज्ञान में खोखलापन निकला हम [...]

मिथक

dr. pratibha prakash
कल्पना में मत उलझ है मिथक सारा जगत सत्य से रु-ब-रु हो जन्म से [...]

साथ

dr. pratibha prakash
जिनके साथ चले हम घर से वे तो दूर बड़े रे निकले सोचा चोट अब [...]