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कविता

कुछ है जो…

Dinesh Sharma
कुछ है जो घूरते है आँखों में छिपी काली आँखों से, आँखों में [...]

कौन हूँ मैं

डॉ सुलक्षणा अहलावत
कौन हूँ मैं लाडली बेटी के रूप में मेरी माँ ने जनी। मैं किसी [...]

वक्त ✍✍

डॉ मधु त्रिवेदी
***वक्त तुझे रास ना आया मेरा मुस्कराना इठलाना जब भी मिला कोई [...]

साँवरे

डॉ मधु त्रिवेदी
साँवरे सूरति पर बारम्यार ,बलिहारी जाऊँ मैं चुरा-चुरा माखन [...]

मैं आज़ाद नहीं

MANINDER singh
मैं आज़ाद नहीं, अपनी सोच का गुलाम हु, अन्धविश्वाश, [...]

बेटी- तीन कवितायें

suresh chand
(एक) बेटी सबसे कीमती होती है अपने माँ-बाप के लिए जब तक वह घर [...]

प्यार का नशा

Dr ShivAditya Sharma
डरते हैं कहीं कहर ना बन जाये शाम सुहानी तपती दोपहर ना बन [...]

जाग युवा भारत के अब तो , ले आ वापिस देश की शान को

कृष्ण मलिक अम्बाला
हो गयी गलतियां तुझसे अतीत में बेशक, अब तो सम्भल जा वक्त है [...]

बारिश की वे साँझें (स्मृति चित्र )

रवि रंजन गोस्वामी
काली घटाएँ , साँझ , तेज हवायेँ और बारिश की फुहारें । छातों में [...]

रोल नम्बर 252

Jitendra Jeet
मरासिम दिल के यूँ पल भर में नहीं तोड़े जाते दर्द होता है दिल [...]

लाज बचा ले मेरे वीर

डी. के. निवातिया
लाज बचा ले मेरे वीर क्यों वेदना शुन्य हुई क्यों जड़ चेतन हुआ [...]

सोच-सोच घबराता हूँ

डी. के. निवातिया
ये सोच-सोच घबराता हूँ…….. पिता नही मेरी ताकत है वो,छाया में [...]

बचपन

डी. के. निवातिया
बचपन वो बचपन याद आता है तितलियो के पीछे भागना पकड़कर डब्बे [...]

✍✍आया है बसंत मेला✍✍

दुष्यंत कुमार पटेल
कू-कू करती कोयल बगीचे में, फैला रही है बसंत की संदेशा भौरे भी [...]

“दर्द”

Dr.Nidhi Srivastava
जज़्बातों की नर्म चादर लपेटे, लफ्जो के तकिये पे लेटे, करवटें [...]

नन्ही जिद्द और चाइना डोर

MANINDER singh
एक नन्ही सी जिद्द खामोश हो गयी, लगता है हर जिद्द पूरी कर सो [...]

मजहब के रंग हजार देखे हैं

NIRA Rani
सुना है मजहब के रंग भी हजार होते है कभी कभी हम भी इन्ही से दो [...]

धुंधली तस्वीर

रवि रंजन गोस्वामी
आज रात , आँखों में गुजर जायेगी । एक पुरानी किताब के बीच मिली [...]

* माँ मुझे बच्चा रहना है *

Narendra Kumar
* माँ मुझे बच्चा रहना है * माँ मुझे बच्चा रहना है बड़ी-बड़ी [...]

* आजाओ कन्हैया *

Narendra Kumar
* आजाओ कन्हैया * आजाओ कन्हैया हमरी नगरियाँ में पाप बढ़ी है [...]

बसंत है आया | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
कू-कू करती कोयल कहती सर सर करती पवन है बहती। फूलों पर भँवरें [...]

जब तक मानव नही उठेगा | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
जब तक मानव नहीं उठेगा, अपने हक़ को नहीं लड़ेगा, होगा तब तक उसका [...]

महबूबा | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
सबकी मेहबूबा है वो सबके दिल की रानी है। मेरी गली के लड़कों पे [...]

नजरें

डॉ सुलक्षणा अहलावत
माँ मैं आज के बाद घर से बाहर नहीं जाऊँगी, कारण मत पूछना मुझसे [...]

और न कुछ भी चाहूँ | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
और न कुछ भी चाहूँ तुझसे बस इतना ही चाहूँ। अपने हर एक जन्म [...]

एग्जाम एंथम | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
हम होंगे सब में पास हम होंगे सबमें पास हम होंगे सब में पास एक [...]

मास्टर श्यामलाल | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
हमारे मास्टर श्यामलाल, करा रहे थे गणित के सवाल। मास्टर जी ने [...]

मिसेज डोली | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
एक दिल मिसेज डोली, अपने पति से बोली। अजी! सुनिए आज आप [...]

सफर ये जो सुहाना है ।

कृष्ण मलिक अम्बाला
सफ़र ये जो सुहाना है होनी अनहोनी तो एक बहाना है डूबते को तूने [...]

ऐसा अपना टीचर हो

कृष्ण मलिक अम्बाला
मेरी बाल्यकाल की एक रचना , पुरानी भावनाये ताजा होने पर आपसे [...]