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कविता

अमर शहीदों के घर की दीपावली

Naveen Jain
अमर शहीदों के घर की दीपावली देशभक्ति का दीपक जिन वीरों ने [...]

नतमस्तक हुआ विज्ञान

Rita Singh
नत मस्तक हुआ विज्ञान आज प्रकृति के आगे , प्रदूषण की है मार [...]

धुंध की चादर मे शहर सिसक रहा है

NIRA Rani
न जाने क्यू दिल मे कुछ हलचल हो रही थी द्वार पे जाकर देखा तो इक [...]

लिखूँ तेरा नाम

डॉ मधु त्रिवेदी
लिखू आज एक अन्तरा नाम तुम्हारे. पहली पंक्ति का प्रथम अक्शर [...]

वेदना

ईश्वर दयाल गोस्वामी
वीणा-सी झंकृत होती, आवाज माँ की , अब सहमी हुई है,दो बरस से [...]

भाई दूज

Rajeev 'Prakhar'
लेकर थाली खड़ी अकेली, मुझको गीत सुना जा ना l भाई-बहिन का प्यार [...]

कोहरा

Kokila Agarwal
बहुत सोचा कि अश्को को भुला फिर मुस्कुराऊंगी कभी मुझसे कभी [...]

वाह वाह दिल्ली

विजय कुमार अग्रवाल
कैसे बचें और कैसे बचाये ज़हर हवा में फैल गया है । दो दो [...]

लापरवाह माली

ईश्वर दयाल गोस्वामी
बेशक ! जिस तरह खिलना चाहिए उस तरह अब नहीं, खिल रही हैं कलियाँ [...]

कवि और पाठक

ईश्वर दयाल गोस्वामी
अन्वय,अर्थ है आपका , लिखना अपना काम । श्रवणभक्ति-फल [...]

‘लोक कवि रामचरन गुप्त’ के 6 यथार्थवादी ‘लोकगीत’

कवि रमेशराज
।। कपड़ा लै गये चोर ।।---1. ----------------------------------------- ध्यान गजानन कौ [...]

एक रूप में हिन्दुस्तानी

Sonika Mishra
निर्मल पावन सुंदर स्वर्णिम सुशोभित करते नाद मेरे भारत माँ [...]

आँसू

ईश्वर दयाल गोस्वामी
दृगों से छलकता नीर ही परिचय नहीं है,तुम्हारा । त्रासदी के [...]

कविता – शिक्षक

डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज
जैसे माली पौधों को सही करता है नित काट - छाँट कर , वैसे ही [...]

आल्ह छंद में एक रचना

Pravin Tripathi
आल्ह छंद पर आधारित एक रचना.... (मापनी 31 तथा 16,15 पर यति, अंत में [...]

माधव इस संसार में

Rita Singh
माधव इस संसार में तरह तरह के लोग , कुछ माया में हैं रमे कुछ का [...]

तत समय …. जरूरी है

मनहरण मनहरण
जिंदगी में कितनों तूफान हों, और झंझावत ही कितनों हो, तत समय [...]

औरत

preeti tiwari
निकलती है ज्यों ही औरत कमाने को आ जाते है सभी,हाथ आजमाने [...]

ओंकार, अघनाशक,परम आनंद हैं जो: जितेंद्र कमल आनंद ( १३१)

Jitendra Anand
ओंकार, अघनाशक ,परम आनंद हैं जो , क्यों न करें भक्त यशगान आठों [...]

मैं नही शब्द शिल्पी

डॉ मधु त्रिवेदी
मैं नहीं शब्द शिल्पी ✍✍✍✍✍✍✍✍ मैं नहीं कोई शब्द शिल्पी जो [...]

बात

डॉ मधु त्रिवेदी
बात ✍✍✍✍ बात जो कहनी है लबों तक आती है कुछ देर ठहर देख [...]

बुदबुदाते हो

डॉ मधु त्रिवेदी
होठ पर आकर क्यों बुदबुदाते हो नीदों में आ क्यों रातें [...]

चाँद

डॉ मधु त्रिवेदी
चाँद ✍✍ हर रोज आसमाँ में दिखाई देता है चाँद फिर क्यों [...]

गरीबी

NIRA Rani
गरीबी गरीबी … गरीबी भी कितनी अजीब है शायद ये ही उनका नसीब [...]

चली पनघट

डॉ मधु त्रिवेदी
चली पनघट ✍✍✍✍✍ झनन - झनन झनन - झनन चलत बजावत है पायलियाँ के [...]

कली

डॉ मधु त्रिवेदी
कली ✍✍ बगियाँ में जब एक कली खिली आ भँवरे ने एक बार [...]

झरना

डॉ मधु त्रिवेदी
झरना ✍✍✍ झरना हँसी का जो हसीन था नजरों से तेरी महक उठा [...]

सर्द

डॉ मधु त्रिवेदी
सर्द ✍✍ मौसम ने ली फिर अँगराई धुंध की चादर पसर आई आगाज हो [...]

लिखूँ आज

डॉ मधु त्रिवेदी
लिखू आज एक अन्तरा नाम तुम्हारे. पहली पंक्ति का प्रथम अक्शर [...]

अच्छी बेटी

Shri Bhagwan Bawwa
सभी बेटियों को समर्पित ! मन लगाकर पढ़ती हूं , और शान से जीती [...]