साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

कविता

मिनटां के म्ह हाँसै

गंधर्व लोक कवि श्री नंदलाल शर्मा
एक और बेहतरीन रचना.... *मिनटा के म्ह हाँसे,मिनट मै रो लुगाई [...]

थोड़ी सी जिंदगानी खातर

गंधर्व लोक कवि श्री नंदलाल शर्मा
नदंलाल जी का ब्रह्म ज्ञान... टेक:थोड़ी सी जिन्दगानी खातिर नर [...]

नव रूप…..बेटियाँ

Beena Lalas
माँ अम्मा या हो आई हर रूप में बेटी समाई बेटी बनकर दुर्गा [...]

बेटियाँ

डॉ मधु त्रिवेदी
जमा कर पैर रखना राह कंकडों से सभलना है अकेले जिन्दगी की इस [...]

थोड़ा इश्क़

ravi bhujang
तुम समय काटने के लिए, इश्क़ का सहारा लेते हो! ग़ालिब की [...]

“बेटियों तुम कोमल हो कमजोर नहीं “

Ritu Asooja
बेटियाँ बहुत प्यारी होती हैं । घर आँगन की राजकुमारियाँ होती [...]

विदाई

Sajan Murarka
विदाई की अब बजने को है शहनाई विरह के सायों में यादो की [...]

बेटियां

shalinee dubey
कहते है दो कुलों को जोड़ती है बेटियां मुश्किलो को [...]

नज़र का खेल

Sajan Murarka
नज़र का खेल नज़र उठी-नज़र गिरी-नज़र मिलाकर ; नज़र फड़की-नज़र [...]

ससुराल मे पीड़ित एक बिटिया का पैगाम -पापा के नाम

Sajan Murarka
ससुराल मे पीड़ित एक बिटिया का पैगाम -पापा के नाम पापा, बताना [...]

अक्षम्य है

DrRaghunath Mishr
परिणाम गलती का गलत ही होगा अंततः जानकर की गई गलती अक्षम्य [...]

बेटी

Prashant Sharma
बेटा होता घर का लाडला तो बेटी लाडली होती है। बेटा मानो फूल है [...]

काहे को ब्याहे महतारी ?

Dr. Nisha Mathur
सौंधी माटी की खुश्बू को यूं चाक चाक ढल जाने दो, छोटी सी कच्ची [...]

जननी जन्म से वंचित क्यों ?

विजय कुमार सिंह
दोहा गर्भ में नहीं मारिये, जगजननी का रूप I बिटिया घर को [...]

“बेटियाँ

Mahatam Mishra
सादर नमस्कार, साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता बेटियाँ में [...]

“जग स्तंभ सृष्टि है बिटिया “

दुष्यंत कुमार पटेल
यहाँ अजन्मी मर जाती है, क्यों माँ कि कोख पर बिटिया| देवी का [...]

दर्द….

CM Sharma
मैं सरिता कल कल करती...मेरी पीड न जाने कोई... जो भी आता मैल ही [...]

न हिन्दू मरा,न कोई मुसलमान,मरा है तो सिर्फ इंसान

Bhupendra Rawat
ना कोई हिन्दू मरा ना ही मरा है कोई मुसलमान इतिहास गवाह [...]

मेरी बेटी – मेरा वैभव

Bijender Gemini
कविता मेरी बेटी - मेरा वैभव - बीजेन्द्र जैमिनी मेरी [...]

सारे रंग बेटियों से ही तो हैं…

Upasna Siag
आँखे बंद करके सोचा जब तुझे , तो बहुत ही करीब पाया ... छोटे - [...]

नववर्ष

सुनील पुष्करणा
नववर्ष पर मेरे विचारों का यह अनुअंकन व्यतीत होते वर्ष को करे [...]

मोदी-गांधी

सुनील पुष्करणा
"मोदी" किस अधिकार से तू चरखे से फोटो जोड़ आया था...? "गांधी" [...]

मैं

Kokila Agarwal
गुज़रती हूं अंधेरो से लिये तक़दीर हाथों में बिखरती हूं [...]

बेटियां

रीना देवी पटेल
सृष्टि में मानव जीवन का आधार बेटियां हैं। मां बेटी बहन रूप [...]

मैं वर्तमान की बेटी हूँ

रवीन्द्र सिंह यादव
बीसवीं सदी में, प्रेमचंद की निर्मला थी बेटी, इक्कीसवीं सदी [...]

वो बेटियाँ ही हैं

satguru premi
वो बेटियाँ ही हैं हमें जीना सिखातीं । जिन्दगी-मौत के संघर्ष [...]

“बेटी बोझ नही…”

विनोद सिन्हा
मेरी यह कविता उन माता - पिता के लिये एक संदेश जो बेटीयों को बोझ [...]

ईश की टीष

Ashok Kumar
रे मनुष्य, मेरे कारखाने का तू था मास्टरपीस, तुझे बना कर [...]

ग़ज़ल

Sudhir Mishra
दोस्तों एक ताज़ा तरीन ग़ज़ल आपकी अदालत में रख रहा हूँ।ग़ौर [...]

करुणा

राकेश श्रीवास्तव
करुणा शाखों से पत्ते जब टूटे पतझड़ में, शाखें कब शोक मनाती [...]