साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

कविता

शर्म आती है

Laxminarayan Gupta
राष्ट्रधर्म को शर्म आती है जब भारत की धरती पर अपने ही [...]

कवि /लेखक /पत्रकार से

रवि रंजन गोस्वामी
कवि/लेखक तुम भावुक हो , संवेदनशील भी हो । किन्तु प्रश्न है । [...]

मजदूरों के बच्चे

Sandeep Kumar Sharma
मजदूरों के बच्चे पूरा दिन गगनचुंबी इमारतों में धमाल करते [...]

दोहरी जिन्दगी

लक्ष्मी सिंह
🌹🌹🌹🌹 सच-झूठ का मुखौटा पहन खुद से अनजान। दोहरी जिन्दगी जीने [...]

प्रेमपीरा

Rakesh kumar
जब रोम रोम टूट जाये जब ह्रदय मस्तिक्ष की ना सुन पाए जब पीर [...]

मैं, ने ही मैं को मारा है

Bhupendra Rawat
मैं, ने ही मैं को मारा है हम, ही तो रहा शेष रहा सारा है मैं, ने [...]

नारी

निहारिका सिंह
मैं विवश नही अब , मैं आदिशक्ति की ज्वाला हूँ । मैं हूँ अमृत [...]

#पृथ्वी का भूगोल…

तेजवीर सिंह
🌍 पृथ्वी का भूगोल 🌐 🌞🌛🌍☁🌐🌴🌐☁🌍🌛 समझ इसे तरबूज बड़ा-सा, पकड़ [...]

“गुजरना कभी”

Dr.Nidhi Srivastava
मन की इन वीथियों से गुजरना कभी, इतनी तंग भी नहीं हैं जैसा तुम [...]

अभी मत जा सावन

Vivek Kapoor
अभी मत जा सावन , भीगना तोह अभी बाकी है कुछ ही दिल जीते है, कुछ [...]

सदा सत्य का भान जरूरी

Vindhya Prakash Mishra
चिंतन के पोषक है हम सब; सत्य कथन का ज्ञान जरूरी| अमूर्त बिम्ब [...]

गृहस्थ और साधुवाद

Mahender Singh
शांति की चाह में पहुँच गए..जंगल में मंगल की आश में गए पहुँच.. [...]

प्रतीक्षा

Chandra Prakash
। प्रतिक्षा । हर पल तुम्हारी प्रतिक्षा करता हूँ .. तुम मेरे [...]

अब बचपन वाला इतवार नहीं आता ,

Chandra Prakash
अब बचपन वाला इतवार नहीं आता , ना गलियों में वो रसभरी कुल्फ़ी [...]

कर्मपथ

Kamla Sharma
जब भी हो कठिन डगर न आंको अपने को कमतर बस धैर्य को बांधे [...]

मैं भारत माता हूँ

डॉ०प्रदीप कुमार
"मैं भारत माता हूँ !" ------------- पहचाना मुझे ? नहीं ना !! पहचानोगे भी [...]

करतब नही दिखाना

Vindhya Prakash Mishra
कर्तव्य कर रहा हूं करतब नही दिखाना कौशल की कामना है प्रतिभा [...]

सरकारी नौकर

Chandra Prakash
सरकारी नौकर सरकारी नौकर का स्वतंत्र अधिकार है ..। दफ़्तरी पैड [...]

अजीब सपना

Bikash Baruah
मैं बैठा था घर में अकेला कोई पास नहीं था मेरा , तभी अचानक एक [...]

अभी तक तो इस शहर को आबाद किया था……

Awneesh kumar
अभी तक तो इस शहर को आबाद किया था इलाहाबाद को इलाहाबाद किया [...]

आज़ादी कैसे मनाये

संगीता शुक्ला
गांव शहर बनता गया, शहर पत्थरो से घिरता गया, आज़ादी कैसे [...]

बचपन के दिन की यादें

Vindhya Prakash Mishra
बचपन के दिन की यादे प्यारी सी तोतली बाते नही चाह नही [...]

हे पौरुषत्व –अपील है तुमसे हमारी

meenakshi bhasin
Displacement of anger मैने सुना था और Displacement of energy मैने खोजा है। हर रोज हम [...]

निडर बन

Bikash Baruah
तू उठ मेरे भाई निडर बन,कर लड़ाई, रोक न ले कदम तू तेरे हाथो है [...]

*ढलती उम्र और बुढ़ापे की दहलीज़**

अनुजा कौशिक
तेरी ढलती उम्र और बुढ़ापे का ज़िक्र तू न डर इंसान..अब ये कैसी [...]

एक दीपक ही अंधेरा निगल जायेगा

Vindhya Prakash Mishra
बचकर चलते रहो ठोकरें देखकर जमाना कभी तो बदल जायेगा कांटे [...]

गर मै….

Madhumita Bhattacharjee Nayyar
गर मै हवा होती, चहुँ ओर मै बहती रहती, कभी अलसाई सी, कभी पगलाई [...]

प्रकृति

लक्ष्मी सिंह
प्रकृति जो मधुर गीत गाती हैं वो सबको कहाँ सुनाई देती है [...]

प्रेम पत्र

Pushpendra Rathore
प्रिय लिख रहा पाती तुमको, इत्रों से महकाया इस को, अक्षर [...]