साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

कविता

अलसायी सी सुबह

रीतेश माधव
आज अलसायी सी सुबह है, उचटा सा मन है न लिखने को शब्द हैं न कोई [...]

अक्षय तृतीया

Dr Anil Kumar Kori
अक्षय तृतीया के दिन गुड्डे गुड़िया का विवाह मेरी बिटिया ने [...]

यादें~३

कमलेश यादव
आज पूछतीं हुँ सपने से आज पूछतीं हुँ तुमसे क्या तुम्हें याद [...]

क्योंकि,मैं जो हूँ स्वतः हूँ..!

रीतेश माधव
क्योंकि,मैं जो हूँ स्वतः हूँ..! स्वयं रचता हूँ स्वयं पढता [...]

कविता : हुआ अपेक्षित है आवश्यक

Jitendra Anand
हुआ अपेक्षित है आवश्यक,सद् मारग पर तुमको चलना। परहितार्थ [...]

जिन्दगी

Raj Vig
माया के चक्र मे भ्रमित है हर इक जिन्दगी अधूरी इच्छाओं से [...]

कहिए, कितने सुखी है आप

सदानन्द कुमार
सम्मुख करू प्रस्तुत, एक प्रश्न मै आज किस माथे है मानव का [...]

दहेज़ एक अभिशाप

नीरज द्विवेदी
मैं करुण वंदना करता हूँ ऐ प्रभु इसे स्वीकार करो सृजनकर्ता [...]

जरुरत ही क्या जख्मों को कुरेदने की…

शालिनी साहू
जरूरत ही क्या उन जख्मों को फिर से कुरेदने की! जिनका [...]

“मधुशाला”

Dr.rajni Agrawal
"मधुशाला"(माहिया छंद, विधा-२२२२२२ २२२२२ २२२२२२,पहली तीसरी [...]

तब तुम लौट आना पिय।

डॉ. शिव
फूलों से लद जाये उपवन, भ्रमर सब गुन गुनगायें। सुगंध बहकाये [...]

मैं और तू

डी. के. निवातिया
मैं और तू *** शीर्ष लोम से चरण नख तक एक तेरे ही नाम से बंधी हूँ [...]

मौसम गर्मी का

डी. के. निवातिया
मौसम गर्मी का सूरज ने जब दिखलाई हेकड़ी तरबूज बोला फिर मुँह [...]

व्याकुल इंसान

डी. के. निवातिया
व्याकुल इंसान दरखत झूमे, सरोवर तीर, निर्झर निर्झर बहे [...]

अलबेला हूँ

डी. के. निवातिया
अलबेला हूँ ! भीड़ में खड़ा हूँ, फिर भी अकेला हूँ कदाचित इसीलिए [...]

बड़ा अच्छा लगता है

डी. के. निवातिया
बड़ा अच्छा लगता है उगते सूरज की लालिमा को तकना बैलो के गले [...]

चलता रह घिसटता रह….जीवन भर…!

रीतेश माधव
भूल गया मैं अपना पथ और मंजिल भी और ना रही जीवन मे कुछ [...]

चलता रह घिसटता रह…. जीवन भर..!

रीतेश माधव
भूल गया मैं अपना पथ और मंजिल भी और ना रही जीवन मे कुछ [...]

“परिंदे”

Dr.rajni Agrawal
"परिंदे" आँखों में परिंदे पाले थे उम्मीद लगा इंसानों [...]

जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए

Brijesh Nayak
जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए ,जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए मानव मन [...]

शून्य पर प्रयास

Pramod Raghuwanshi
🌙शून्य पर मेरा प्रयास------ शुन्य का भी अपना एक अलग स्थान [...]

शहीद की पाती

Anirudh Dubey
मा भारती की पुकार है ये हे वीर सपूतों वार करो।। मातृभूमि की [...]

खुशी

लक्ष्मी सिंह
🌹🌹🌹🌹 खुशी आत्मा की उपज है। सबको मिलती नहीं सहज है। 🌹 कोई [...]

कविताएँ

ashok dard
फैंके हुए सिक्के .... फैंके हुए सिक्के हम उठाते नहीं कभी | अपनी [...]

मित्र की मित्रता..

शालिनी साहू
तुम्हें शब्दों में परिभाषित करना आसान नहीं है मित्र! [...]

यादें~२

कमलेश यादव
आज पूछतीं हुँ सपने से कहाँ थे तुम कहाँ खो गये थे दुनिया की इस [...]

ब्राह्मण कुल दिनकर

शाम्भवी मिश्रा
ब्राह्मण कुल के वे दिनकर थे, नारायण के अवतारी थे। जटा शीश और [...]

!! थोथा चना बाजे घना !!

अजीत कुमार तलवार
शोहरत और धन दौलत पर कत्ले आम हो रहा है, आज जिधर को भी देखो [...]

कोई तो आये ….( कविता)

Onika Setia
कोई तो आये ....( कविता) [...]

सुजश कुमार शर्मा की कविताएँ

सुजश कुमार शर्मा
1. होने की अभिव्यक्ति विशिष्ट शादी! होने की अभिव्यक्ति [...]