साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

कहानी

सतरंगी चुनरी

जयति जैन
बडे दिनों के बाद आज मालू पागल हुए जा रहा था, समझ ही नहीं आ रहा [...]

{{{{{ कवि }}}}}

दिनेश एल०
[[[[ कवि ]]]] ###_दिनेश_एल०_जैहिंद सोई आत्माअों को जो झंकृत कर दे [...]

संयोग

रजनी मलिक
"मम्मा !मै कुछ नहीं जानती ,आज हमारे ओल्ड ऐज होम को पूरा एक साल [...]

खुली बटनें !

Satyendra kumar Upadhyay
पिताजी आपकी बटन खुली है ! बंद कर लीजिए ना ! तभी कड़कदार आवाज [...]

बीती बातें

Naval Pal Parbhakar
बीती बातें बहुत दिनों के बाद आज गांव की याद आने लगी हैं। काम [...]

नमन माता पिता को

सगीता शर्मा
नमन माता पिता को. 💐🙏🏼💐🙏🏼💐🙏🏼💐 नमन जो हम करे उनको तो जीवन [...]

एक श्वान की व्यथा

महावीर उत्तरांचली
मोती यानी "मैं" और जैकी नरकीय 'पिताजी'! (क्योंकि हमारे कर्म ऐसे [...]

बीती बातें

Naval Pal Parbhakar
बीती बातें बहुत दिनों के बाद आज गांव की याद आने लगी हैं। काम [...]

बेनाम रिश्ता

जयति जैन
बात करीब साढे चार साल पहले की है, सोनू अकेला पर खुश था, और नीतू [...]

शादी

Naval Pal Parbhakar
शादी आजकल शिक्षा इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि उसके बिना तो [...]

स्त्री

Naval Pal Parbhakar
स्त्री महिला सशक्तिकरण, अबला नारी, नारी शक्ति पहचानो । कुछ [...]

टुकड़ा टुकड़ा यादें (प्रतिनिधि कहानी)

महावीर उत्तरांचली
वह अब भरी दुनिया में अकेली थी। ऐसा नहीं कि उसका कोई सगे वाला [...]

अर्थपुराण (प्रतिनिधि कहानी)

महावीर उत्तरांचली
"कहाँ घुसा जा रहा है कंजर? आँखें फूट गई हैं क्या?" पोछा लगाते [...]

क्षणभंगुर शादी की खुशी

Naval Pal Parbhakar
क्षणभंगुर शादी की खुशी एक दिन मैं दौड़ता हुआ, न जाने [...]

प्रेम का ज्वार : भाग-२

अजय कुमार मिश्र
प्रेम का ज्वार-भाग-२ ------------------- समय इसी तरह गुज़रता रहा । [...]

दूसरा जन्म

Naval Pal Parbhakar
अधेड़ उम्र की औरत गांव से बाहर काफी दूर एक बड़े से बरगद के [...]

ये जाना !

Satyendra kumar Upadhyay
जानू आज रूक जाओ ! घूँघट सँभालते हुए रश्मि ने तिरछी देख ! [...]

प्रेम में पीएचडी

सन्दीप कुमार 'भारतीय'
एक छोटी सी लम्बी कहानी " प्रेम में पीएचडी " वर्ष २००७ की जुलाई [...]

इजहार-ए-इश्क़

Deepti Singh
हर कोई बस चल रहा हैं,इस ज़िन्दगी के सफ़र में कोई हमसफ़र के लिए [...]

मौत खरीदता युवक

Naval Pal Parbhakar
मौत खरीदता युवक एक बार मैं एक ट्रेन से कहीं बाहर से आ रहा था । [...]

वरण / हरण ।

Satyendra kumar Upadhyay
बच्चा ! नौकरी में हो ! जबाब देने में उसकी घिग्गी बंद हो गयी थी ; [...]

बढ़ावा ए बर्बादी !

Satyendra kumar Upadhyay
अरे दो लोग आ गये हो ! बहुत है , आठ लोगों की ड्यूटी में ! तब तक [...]

पैदायशी बुजुर्ग ।

Satyendra kumar Upadhyay
कौन आया है ? सुघरा के घर आकर पूॅछते ही , सौम्या की सास ने गोद में [...]

लाचार ओढ़नियाॅ ।

Satyendra kumar Upadhyay
हाॅ ! बोलो ; टीना जी ! क्या हुआ ? क्यूँ लेट हो गयीं ? वह बस कहीं [...]

मायका ।

Satyendra kumar Upadhyay
सुरेश शाम घर पहुँचा, सारे टीन-टप्पर इधर-उधर , पड़ोसी व पुलिस [...]

वतन की ओर वापसी

Naval Pal Parbhakar
वतन की ओर वापसी एक अधेड़ उम्र, सफेद बाल, कमर से झुकी, बार-बार [...]

मौत खरीदता युवक

Naval Pal Parbhakar
मौत खरीदता युवक एक बार मैं एक ट्रेन से कहीं बाहर से आ रहा था । [...]

विज्ञान तेरी जय

Naval Pal Parbhakar
विज्ञान तेरी जय मैं और मेरे दोस्त सभी लोग एक बगीचे में घुमने [...]