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गज़ल/गीतिका

“मोहन से मिलने को आयी राधा मोहिनी”

Vinod Kumar
"मनहरण घनाछरी छंद" काजल लगा के चक्षु,शशि रुप धरे हुये, मोहन [...]

सावन रातों में तुमबिन तन्हा गुजारा है

दुष्यंत कुमार पटेल
सावन रातों में तुमबिन तन्हा गुजारा है बसंत आगमन तेरे आने का [...]

तू मेरे मन मधुबन बन जा

दुष्यंत कुमार पटेल
मेरे प्रियतम तू मेरे मन मधुबन बन जा भीगती रहूँ मैं तू ऐसा [...]

मेरी जिंदगी मेरी जरूरत हो तुम

Devanshu Maurya
मेरी जिंदगी मेरी जरूरत हो तुम, कहूँ कैसे बहुत खूबसूरत [...]

गज़ल (बोल)

मदन मोहन सक्सेना
गज़ल (बोल) उसे हम बोल क्या बोलें जो दिल को दर्द दे जाये सुकूं [...]

ग़ज़ल( ऐतबार)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल( ऐतबार) जालिम लगी दुनिया हमें हर शख्श बेगाना लगा हर पल [...]

ग़ज़ल(मन करता है)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल(मन करता है) लल्लू पंजू पप्पू फेंकू रबड़ी को अब देख देख [...]

ग़ज़ल ( सच्चा झूठा)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल ( सच्चा झूठा) क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना [...]

ग़ज़ल ( खुदा का रूप )

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल ( खुदा का रूप ) गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का हम [...]

ग़ज़ल (खेल देखिये)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (खेल देखिये) साम्प्रदायिक कहकर जिससे दूर दूर रहते थे [...]

गज़ल (रचना )

मदन मोहन सक्सेना
गज़ल (रचना ) कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार [...]

ग़ज़ल ( जिंदगी का सफ़र)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल ( जिंदगी का सफ़र) बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम न मिल [...]

ग़ज़ल (हिम्मत साथ नहीं देती)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (हिम्मत साथ नहीं देती) किसको अपना दर्द बतायें कौन सुनेगा [...]

ग़ज़ल ( जिंदगी जिंदगी)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल ( जिंदगी जिंदगी) तुझे पा लिया है जग पा लिया है अब दिल में [...]

ग़ज़ल (ये रिश्तें)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (ये रिश्तें) ये रिश्तें काँच से नाजुक जरा सी चोट पर टूटे [...]

ग़ज़ल (ऐतवार)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (ऐतवार) बोलेंगे जो भी हमसे बह ,हम ऐतवार कर लेगें जो कुछ [...]

ग़ज़ल (क्यों हर कोई परेशां है)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (क्यों हर कोई परेशां है) दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो [...]

ग़ज़ल (किस को गैर कहदे हम)

मदन मोहन सक्सेना
ग़ज़ल (किस को गैर कहदे हम) दुनिया में जिधर देखो हजारो रास्ते [...]

ऊपर से चाहें तुम हँसते रहते हो

Dr Archana Gupta
ऊपर से चाहें तुम हँसते रहते हो दर्द पता है अंदर अंदर गहते हो [...]

सोच समझ कर बोला कर राज़ न दिल के खोला कर

Rakesh Dubey
सोच समझ कर बोला कर राज़ न दिल के खोला कर इतनी सख़्ती ठीक [...]

बोलें सोच विचार कर, कह कर गये कबीर

Rakesh Dubey
बोलें सोच विचार के, कह कर गये कबीर रखो जीभ के पाँव में, डाल सदा [...]

ग़ज़ल

रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव
क्यूँ नज़र से नज़ारे जुदा हो गये लग रहा खुद नज़र में खुदा हो [...]

अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं

अमरेश गौतम
न देखिये यूं तिरछी निगाहों से मुझे, अभी-अभी तो होश में आया [...]

प्यार से दिल का भरा भंडार है!

शुभम् वैष्णव
रौशनी का ईद जो त्यौहार है। प्यार से दिल का भरा भंडार है। [...]

वो पगली न समझी |ग़ज़ल|

दुष्यंत कुमार पटेल
वो अन्जान बनती है ज़िंदगी का चैन चुरा के वो दे गई हजार जख्म दिल [...]

तेरी याराना पसंद है |ग़ज़ल|

दुष्यंत कुमार पटेल
मुस्कुरा कर दर्दे दिल छूपाना पसंद है तुम्हें तो दिल जलाकर [...]

तम से लड़ी है जिंदगी

Ashok Kumar Raktale
मौत है निष्ठूर निर्मम तो कड़ी है जिंदगी जो ख़ुशी ही बाँटती हो [...]

“तुम्ही तुम”

Anita Mehta
जला के राख करती है , तपिश तेरी निगाहों की , पिघलती अब शमा रहती , [...]

याद इक किस्सा पुराना आ गया

kamni Gupta
याद इक किस्सा पुराना आ गया। सामने बीता ज़माना आ गया। अब न [...]

नाराज़ वो क्यों बैठे हैं एक गिला ले कर —- गज़ल

निर्मला कपिला
गज़ल नाराज़ वो क्यों बैठे हैं एक गिला ले कर कह दें तो चले [...]