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गज़ल/गीतिका

नही चाहता

Rishav Tomar (Radhe)
सब कुछ त्याग कर मैं पत्थर नही बनाना चाहता इंसान ही ठीक हूँ [...]

* मंज़िलों के दीप*

Dharmender Arora Musafir
मेरी हिम्मत देखकर जब रास्ते चलने लगे ! मंज़िलों के दीप हर सू [...]

ग़ज़ल /गीतिका

kalipad prasad
अब लूटपाट स्त्रीत्व हरण, सब चरम हुए व्यभिचार छल कपट, यही सबके [...]

नाम याद आता है।।

GOVIND SINGH LODHI
हर बार वही नाम याद आता है। तन्हाई में मुझे क्यों रुलाता [...]

अब भी है।

Neelam Sharma
रदीफ- अब भी है। कलम मेरी,उनके अशआर अब भी हैं। दूर हैं, मगर [...]

मुहब्बत होती है

बसंत कुमार शर्मा
स्वीट कभी नमकीन, मुहब्बत होती है जग में बहुत हसीन, मुहब्बत [...]

मज़ा आ गया।

Neelam Sharma
गिरह- हंसके जीने का सीखा नया इक सबक, ग़म जहां से छिपाया, [...]

गजल

Rishav Tomar (Radhe)
चाहत में किसी को ठुकराया नही जाता है केवल रूह से रूह को [...]

छत पर चाँद

Rishav Tomar (Radhe)
आज मेरी छत पर वो चाँद आया उसको देख आँखों को सुकून आया जब लबो [...]

किसी की याद में तडपु किसी की याद में जागु,

bharat gehlot
किसी की याद में तडपु किसी की याद में जागु, किसी के वादे है [...]

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी करते रहे

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी करते रहे बस यही इक काम था जो हर [...]

गजल

Rishav Tomar (Radhe)
दर्द के आलम में भी मुस्कुराया जा सकता है पत्थर पर कोमल फूल [...]

गज़ल

Neelam Sharma
चराग मैं बनके चराग-ए-चमन जलती ही रही महबूब बड़ी शिद्धतों से [...]

“लड़ता हूँ”

Prashant Sharma
अब लड़ता नहीं यार जीतने के लिए। लङता हूं बस दिल बहलाने के [...]

बस धता दिखला रहे….

सतीश तिवारी 'सरस'
कोई ग़ज़लें ले हजारों घर में ही बैठा मगर, चार कवितायें लिये [...]

सच कहकर

विजय कुमार नामदेव
अपने मन को यूं ही मत भरमाओ जी।। गीत वफ़ा के एक दफ़ा तो गाओ [...]

कैसे मुकर जाओगे — डी के निवातिया

डी. के. निवातिया
यंहा के तो तुम बादशाह हो बड़े शान से गुजर जाओगे । ये तो बताओ [...]

हिन्दुस्तान लेकर निकला हूँ

M Furqan Ahmad
छोटे शहर से मैं बड़े अरमान ले कर निकला हूँ मैं खुद अपनी मौत [...]

मोहब्बत है मुझे

डॉ. दीप्ति गौड़
जिंदगी तुझसे शिकायत है मुझे l चंद खुशियों की जरूरत है मुझे [...]

गजल

Rishav Tomar (Radhe)
आँखो में ख्याबो को सजाती है चाहत सदा गिरते हुओं को उठती है [...]

चलो फटे में टाँग अड़ाएँ

बसंत कुमार शर्मा
यार चलो नेता बन जाएँ और फटे में टाँग अड़ाएँ शेयर जैसे [...]

” पल मुस्कराने लग गये ” !!

Bhagwati prasad Vyas
कदम क्या संभले हमारे , वे पास आने लग गये | अपना पराया पहचानने [...]

इल्तजा

Manas mishra
ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है रंज करना बुज़दिलों का काम है [...]

“अब तो यहाँ चारों ओर फ़कत पथराव दिखता हैं “

ramprasad lilhare
"अब तो यहाँ चारों ओर फ़कत पथराव दिखता हैं " अब तो चारों ओर बस [...]

गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना…

आकाश महेशपुरी
गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना... ★■★■★■★■★■★■★■★■★ देखिये [...]

लगा है।

Neelam Sharma
फिलबदीह -१३५ मिसरा- मरेंगे बिन तेरे लगने लगा है। काफिया- [...]

लगी हैं।

Neelam Sharma
उन्वान- जब से खामोशियां मुस्कुराने लगी हैं। जिंदगी भी मधुर [...]

देखते हैं।

Neelam Sharma
रद़ीफ- देखते हैं। चुरा के वो हमको, नज़र देखते हैं। वो घड़ी दो [...]

चलती जायेगी क्या उम्र भर ज़िन्दगी

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी
चलती जायेगी क्या उम्र भर ज़िन्दगी और कितना करेगी सफ़र ज़िन्दगी [...]

चाय की प्याली कहे कुछ भेज दो अब चिट्ठियाँ

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
बून्द इक बारिश की देखो आज जो उतरी यहाँ ख्वाहिशें दिल में उठी [...]