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दोहे

मधुबन माँ की छाँव है

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
‘आकुल’ या संसार में, माँ का नाम महान्। माँ की जगह न ले सके, कोई [...]

एकादश दोहे:

Ambarish Srivastava
सिर्फ मलाई मारकर, जन्नत की हो सैर. दूध सभी को चाहिये, गायों से [...]

हिन्‍दी

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
हिन्‍दी की संगत करें, फिर देखें परिणाम। हिन्‍दी से स्‍वागत [...]

पनघट

Dr Archana Gupta
पनघट अब मिलते कहाँ , सूख गए सब कूप देखो अब तो गाँव का ,बदल गया [...]

आँखें ही अब बोलती, आँखें ही अब कान……….

SUDESH KUMAR MEHAR
उसने ही सब दिया , ये तन मन ये प्राण. उसकी खातिर मिट चलूँ, छोडूं [...]

जन्माष्टमी दोहे : उत्कर्ष

नवीन श्रोत्रिय
कृष्णपक्ष कृष्णाष्टमी,कृष्ण रूप अवतार । हुए अवतरित सृष्टि [...]

संघर्ष

Dr Archana Gupta
पल पल करके ही यहाँ,रहें बीतते वर्ष होते लेकिन कम नहीं, जीवन [...]

आज़ादी

Dr Archana Gupta
लिख आज़ादी खून से ,सौंपी हमें लगाम रक्षा करना देश की , अब हम [...]

किस्मत

Dr Archana Gupta
1 इम्तिहान ले ज़िन्दगी ,करे पास या फेल किस्मत भी इसमें बड़ा, [...]

भगवद् गीता के श्लोकों से

avadhoot rathore
(१)अवनि अंबर अनिल अनल, अंतस व अहंकार। मिलकर आप: औ अकल, अपरा [...]

दोहे मिश्रित (2)

RAMESH SHARMA
चढ़े खिलौनों के जहाँ, ...आसमान में भाव ! निर्धन ने तैयार की, फिर [...]

दोहे मिश्रित (1)

RAMESH SHARMA
जो दुनिया के सामने, ...बनकर रहा कठोर ! उसका भी औलाद पर, कब चलता है [...]

ॐ नमः शिवायः (दोहे)

Dr Archana Gupta
1. सावन में जपते रहो,शिव शंकर का नाम करने से शिव अर्चना,बनते [...]

“”मनुजता””

avadhoot rathore
(१) सुजनता और सुमनता,मनुजता के प्रमाण। मनुजता से हीन [...]

मंहगी सब्ज़ियाँ

avadhoot rathore
दोहे (१)बैठ सब्जी बाज़ार में,अपनी आँखें सेंक। ख़रीदना मुमकिन [...]

राखी के दोहे……..

Ramesh chandra Sharma
रक्षाबंधन ...... भेज रही भैया तुम्हें, राखी के दो तार, बन्द [...]

*****दोहे*****

Sureshpal Jasala
(१) धरम करम के सार को, रहे कृष्ण जी सींच । राजनीतिक के व्याल को, [...]

सावन ( दोहा छंद )

Ashok Kumar Raktale
काँपी रह-रह घाटियाँ, आया विकट असाढ़ | थर्राए गिरि देख कर , लाया [...]

दोहे

Jitendra Jeet
दोहे ---- "जीत" के झर झर निर्झर झर रहा, अम्बर से है नीर .. हरी भरी [...]

दोहे

Laxminarayan Gupta
कविता किरकी कांच जस, हर किरके को मोह छपने की लोकेषणा, करे छंद [...]

नीति के दोहे

Ankita Kulshreshtha
१. नमन करूँ माँ शारदे .. करुं विनय कर जोर। विद्या का वरदान [...]

बुढापे का दुख

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*दो दोहे* श्रमिक बना सुत ने किया, कितना आज तटस्थ। हाय बुढापे [...]

सम-सामयिक दोहे

Laxminarayan Gupta
सहिष्णु नर होता सफल, पकड़ सबूरी डोर| असहिष्णु नर ढोर सम, चरता [...]

दोहे

निर्मला कपिला
सब धर्मों से ही बडा देश प्रेम को मान सोने की चिडिया बने भारत [...]

प्रेम – दोहावली

Satish Mapatpuri
उमर थकाये क्या भला, मन जो रहे जवान. बूढ़ी गंडक में उठे , यौवन का [...]

दोहे

Satish Mapatpuri
पढ़कर के अखबार अब , पुरखे भी हैरान . बढ़िया है बानर रहे , बने न हम [...]

खपरैल. (दोहे)

Ashok Kumar Raktale
मिट्टी के खपरैल घर , संजोये हैं गाँव | वही चर्मराती खाट औ, घने [...]

राज दोहावली से – ( गुस्ताखी माफी सहित )

पुष्पराज यादव
पांच तारा होटल में, नाचे नग्न दिखाय| कहे दुशासन द्रोपदी, तुझे [...]

राज दोहावली से:-

पुष्पराज यादव
तुकबंदी से तुकबनी, कविता लई बनाय | भाषा के दुश्मन यहां, कविराज [...]

राज दोहावली से –

पुष्पराज यादव
जब अंधियारा था रमां, राम रमाया नाय| विकट अंधेरा पायके , रमा रमा [...]