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दोहे

कुछ दोहे

दुष्यंत कुमार पटेल
(1) दर्शन करने श्याम का,चल वृन्दावन धाम ! जग का पालन हार वो , जप [...]

कुछ दोहे

Rajeev 'Prakhar'
घोर तमस संसार में, भटक रहा इन्सान l सबके अपने देखिये, अलग-अलग [...]

दोहे

Kokila Agarwal
जीवन की ये चाकरी मुझको नहीं सुहाय थामूं बहिया अापकी मुझको [...]

धुंध अंधाधुंध….

Pravin Tripathi
पर्यावरण की दुर्दशा पर कुछ विचार... क्या दिल्ली लखनऊ क्या, [...]

पंच दोहे

Pravin Tripathi
पंच दोहे.... पनप रहा है देश में, बहु आयामी आतंक। नहीं अछूता अब [...]

जगमग हो परिवेश

हिमकर श्याम
चकाचौंध में खो गयी, घनी अमावस रात। दीप तले छुप कर करे, [...]

मिटे भेद विकराल

हिमकर श्याम
सज धज कर तैयार है, धनतेरस बाजार। महँगाई को भूल कर, उमड़े [...]

माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान

हिमकर श्याम
चाक घुमा कर हाथ से, गढ़े रूप आकार। समय चक्र ऐसा घुमा, हुआ बहुत [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
दिल सम्हाल कर राखिए,ना जाये यह टूट। दिल बिन प्रेम में ना [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
राजनीति बाज बैठो, करत गरीब संहार । अापनो वजूद राखो , करत सहज [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
मेघा संदेशा तुम जा ,अलकापुरी कहना । तुमरे बिना कैसे हो, यक्ष [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
दोहा दुखियारे घर घर बसे,कोउ न देखन जाय । देखन उनको जाये जो [...]

वंदना

prerna jani
वंदना मात शारदे कृपानिधान ज्ञानवान आज दास पे दयालुता अटूट [...]

नेह लुटाती चाँदनी

हिमकर श्याम
शीतल, उज्जवल रश्मियाँ, बरसे अमृत धार। नेह लुटाती चाँदनी, कर [...]

विजय पर्व पर कीजिए, पापों का संहार

हिमकर श्याम
जगत जननी जगदम्बिका, सर्वशक्ति स्वरूप। दयामयी दुःखनाशिनी, [...]

कुछ दोहे…

त्रिलोक सिंह ठकुरेला
फँसी भंवर में जिंदगी, हुए ठहाके मौन । दरवाजों पर बेबशी, टांग [...]

नित

डॉ मधु त्रिवेदी
लड़की नित आगे बढ़े , लड़के करें न काम । मान भंग हो कुल का , अपना [...]

करिए नष्ट समूल….( छंद दोहा)

Ambarish Srivastava
काले बादल छा चुके, आरक्षण चहुँ ओर. दे अयोग्य को नौकरी, करे देश [...]

बंधु जानिये मर्म…दोहे

Ambarish Srivastava
अतिशय धन की लालसा, बनी कोढ़ में खाज. भौतिकता में बह रहा, 'हिन्दू' [...]

यार मुबारक ईद….: दोहे

Ambarish Srivastava
‘यार मुबारक ईद..’ _________________________________ बेकसूर का ही गला, काट रहा [...]

जागेश्वर का जन्म दिन…:दोहे

Ambarish Srivastava
गोलोकवासी श्रद्धेय कवि जागेश्वर बाजपेयी के जन्म दिवस पर [...]

‘होते मानव के लिए, मानव के अधिकार’ : दोहे

Ambarish Srivastava
छंद:-दोहा (दो पंक्तियाँ, चार चरण, प्रति पंक्ति १३, ११ [...]

आग लगा जो स्वार्थी, रहे रोटियां सेंक …: दोहे

Ambarish Srivastava
समसामयिक दोहे: गर्म खून को देखकर, रक्त हो गया गर्म. आग बना जो [...]

बालक लेता थाह..: दोहे

Ambarish Srivastava
लहरों से यह लड़ रहा, है जल राशि अथाह. मृगशावक ले हाथ में, बालक [...]

पहुँचाते राहत त्वरित….: दोहे

Ambarish Srivastava
बाढ़ उत्तराखंड हो, या जम्मू कश्मीर पहुँचाते राहत त्वरित, भारत [...]

हिन्दी दिवस : दोहे

Ambarish Srivastava
हिन्दी में धड़के हृदय, हों जब नैना चार. 'आई लव यू' छोड़कर, हिन्दी [...]

लें अचूक हथियार…..: दोहे

Ambarish Srivastava
आतंकी कश्मीर का, बना फिर रहा बाप. हूर बहत्तर बाँटता, असह्य [...]

सृष्टि स्वयं वंदन करे…: दोहे

Ambarish Srivastava
नौ रूपों में है बँटा, माता का शुचि रूप. सृष्टि स्वयं वंदन करे, [...]

पाकपरस्ती चीन की….. : दोहे

Ambarish Srivastava
जाति दिखा दी चीन ने, मिले कबूतर बाज. पाकपरस्ती चीन की, जगजाहिर [...]

“ नदिया पार हिंडोलना ” [ दोहा-शतक ] +रमेशराज

कवि रमेशराज
कबिरा माला कौ नहीं, अब रिश्वत कौ जोर कर पकरै, अँगुरी गिनै, धन [...]