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दोहे

मापदंड दुहरे हुए, ….राजनीति के आज

RAMESH SHARMA
हक़ तो वह होगी नहीं , और न होगी भीख ! छोटों से पायी हुई ,.... कोई [...]

प्रजातंत्र की मेज पर , उठने लगे सवाल !

RAMESH SHARMA
शिक्षा को सौदा समझ, करना मत व्यापार ! हर कन्या को दीजिये, [...]

आईना सा हो गया, उनका भी किरदार

RAMESH SHARMA
आईना सा हो गया, उनका भी किरदार ! आया जो भी सामने,हुआ उसी का यार [...]

इच्छाओं का काफिला, कब होता है शांत !!

RAMESH SHARMA
चाहे भारी भीड़ हो, ..या गुमसुम एकांत ! इच्छाओं का काफिला, कब होता [...]

इस होली रंग लो मुझे, साजन अपने रंग

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
खुशियाँ लेकर आ गया, होली का त्यौहार गाल रंगे गुलाल से, रंगों [...]

होली के दोहे

Dr.rajni Agrawal
होली पर दोहे [...]

रंगो का त्योंहार

RAMESH SHARMA
दिखे नहीं वो चाव अब, .रहा नहीं उत्साह ! तकते थे मिलकर सभी,जब [...]

होली हैं (दोहे)

ramprasad lilhare
" होली है"(दोहे) 1. खेलों सभी जन मिल के, होली का त्योहार। भेदभाव [...]

भू-जल संग्रह दोहावली

AWADHESH NEMA
धरती माँ की कोख में, जल के हैं भंडार । बूंद-बूंद को तड़प रहे, फिर [...]

उर का कान्हा…..

सतीश तिवारी 'सरस'
*चंद दोहे* कठिन स्वयं को जानना,सचमुच मेरे मीत. बिनु जाने ख़ुद [...]

नारी का सम्मान

RAMESH SHARMA
पेंडिंग हों जहँ रेप के, . केस करोड़ों यार ! तहँ रमेश महिला दिवस, [...]

फिर सात दोहे ।

रकमिश सुल्तानपुरी
बुधवार स्वतन्त्र दोहे --- ----------------फिर सात दोहे--------------- फूक फूक [...]

“नारी की महत्ता”दोहे

Dr.rajni Agrawal
"*नारी की महत्ता पर दोहे* [...]

नारी का उत्थान

Dr Archana Gupta
अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस की हार्दिक बधाई नारी के उत्थान [...]

देख तुम्हारी सादगी ,

sushil yadav
अपने-अपने दंभ को ,भूल-बिसर के आज शामिल होली में रहो ,जुड़ता [...]

टपकेगी जब आरजू

RAMESH SHARMA
टपकेगी जब आरजू, नैनो से बन बूंद ! लेना ही तब ठीक है,आँखे अपनी [...]

नीति रा राजस्थानी दूहा

हनुमान प्रसाद
टैम-टैम री बात है,टैम करै मजबूर| कुण नै भावै खूंसडा,चुगणा बोतल [...]

कुछ दोहे

Laxminarayan Gupta
कविता किरकी कांच जस, हर किरके को मोह । छपने की लोकेषणा, करे [...]

शिव दोहे

Dr.rajni Agrawal
द्वादश लिंग बिराजते, पावन तीरथ धाम। आग नयन विष कंठधर, [...]

शंकर का अभिषेक

RAMESH SHARMA
बच्चे खड़े कतार में ,भूखे जहाँ अनेक ! वहीं दूध से हो रहा,भोले का [...]

दोहे…नीति पर

कौशल कुमार पाण्डेय
प्रीत रीत सबसे सुघर,तोडो़ मत विश्वास। बिना प्रेम मानव [...]

नेता।

रकमिश सुल्तानपुरी
नेता। नेता नेता न रहे,,,,,,,,,,,रहा न वो जज्बात । राजनीति मे ढह [...]

अंग्रेजी में फूल

RAMESH SHARMA
जिनको चुभते थे कभी, हम भी बनकर शूल ! वही दे रहे आजकल, हमको [...]

बढ़ चढ़ कर मतदान

RAMESH SHARMA
लोकतंत्र की राह जब,..... लगे नहीं आसान ! फर्ज समझकर तब करो, बढ़ चढ़ [...]

बसन्त के फूल

रकमिश सुल्तानपुरी
फूल।पुष्प।प्रसून । सरसों उमड़ी खेत में, ,,,खिले बसन्ती फूल । [...]

“मेरी सम्पत्ति ,विचारों की सम्पत्ति”

Ritu Asooja
💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐 💐"हमारे विचार हमारी संपत्ति हैं [...]

ईर्ष्या

रकमिश सुल्तानपुरी
दोहे।ईर्ष्या। ईर्ष्या दुख की बावली,,,,,,,जो उर रखो सजोय । मान [...]

मतदान

रकमिश सुल्तानपुरी
।मतदान। नेता निर्छल कर्मठी,, योगी सरस् सुजान । देश गांव [...]

मित्र।

रकमिश सुल्तानपुरी
दोहे।। मित्र । जग में सच्चे मित्र से,,,,,,,,,,,मिलिए बारम्बार ।। [...]

फिर तीन दोहे।

रकमिश सुल्तानपुरी
फिर तीन दोहे - मन को पावन राखिये, तन सा निर्मल आप । धन का [...]