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दोहे

“प्रकृति और मानव”

Dr.rajni Agrawal
"प्रकृति और मानव" (१)वन उपवन खंडित लखे, तरुवर सरिता खोय। [...]

आफत मे है जान

RAMESH SHARMA
बिन पानी सब सून है, सत्य समझ इंसान ! किल्लत से अब नीर की,आफत [...]

जैसे उँचे पेड पर,कच्चे पिंड खजूर

RAMESH SHARMA
मुझको उसकी बात ये, लगी अनोखी खास! छोड गया जाते समय, खुद को [...]

सेना की हुंकार

RAMESH SHARMA
बैरी को चढने लगा,सौ से अधिक बुखार! सीमा पर जब भी भरी, सेना ने [...]

संत

Neelam Sharma
वल्गा- संत विद्या-दोहा मुक्तक संत संत अब हैं नहीं,सतपथ दीना [...]

हुई शर्म से लाल

RAMESH SHARMA
किरणो ने जब सूर्य की,छुए भोर के गाल ! खिली रात की चाँदनी, .हुई [...]

दोहे

Neelam Sharma
दोहे कृष्ण नाम शुभ नाम है, जो सुमिरै सिधि होय। जप जप मीरा पार [...]

पानी मे जब झूठ के पक जाती है दाल

RAMESH SHARMA
गढ़ता है समभाव से , सारे कलश कुम्हार ! होते हैं तैयार पर,....सही [...]

बढा दायरा सोच का

RAMESH SHARMA
बढा दायरा सोच का , तेरा मनुज जरूर ! दुनिया से इंसानियत, किन्तु [...]

मिल जाती तारीख

RAMESH SHARMA
चली नहीं कानून की, उन पर कभी कटार ! होते हैं जो जुर्म के,..... असली [...]

🌴🌳 विश्व पर्यावरण दिवस 🌳🌴

तेजवीर सिंह
🌴पर्यावरण 🌴 व्यथित हुआ पर्यावरण, देख मनुज की चाल। जितने [...]

करो सत्य स्वीकार

RAMESH SHARMA
कितना भी कर लीजिए,यहाँ एक का चार! जाना खाली हाथ है,..करो सत्य [...]

रमेशराज के विरोधरस के दोहे

कवि रमेशराज
क्रन्दन चीख-पुकार पर दूर-दूर तक मौन आज जटायू कह रहा ‘सीता [...]

दिया पिटारा खोल

RAMESH SHARMA
धमकाया मैने बहुत, लिया खूब पुचकार! मुआ पिटारा याद का,खुल [...]

ग़ालिब का दीवान

RAMESH SHARMA
रहा भूख औ प्यास का,मुझे कहाँ फिर ध्यान ! आया हाथों में जहाँ, [...]

गिरवी पडा मकान

RAMESH SHARMA
बड़ा घिनौना रोग है, कहते जिसे दहेज़ ! सबको होना चाहिए, अब इससे [...]

समय बड़ा बलवान

RAMESH SHARMA
ताकत का होता नही,जिसको कभी गुमान ! होता है संसार मे,....वही बडा [...]

राजनीति व्यवसाय

RAMESH SHARMA
बीच सड़क में काटकर ,माँ को रहे पकाय ! राजनीति दुर्बुद्धि से [...]

स्वप्न

Khoob Singh 'Vikal'
स्वप्न पूर्ण हो आपके, जो भी दिखें न्यारे। रात हुई है बहुत, अब [...]

इश्क

Khoob Singh 'Vikal'
जिन्दा रहना इश्क में, 'विकल' नहीं आसान। हँसी-खेल अब इश्क को, [...]

इनसे है संसार

RAMESH SHARMA
धूप हवा जल जान हैं, जीवन के आधार ! इनसे ही है जिंदगी,... इनसे हैं [...]

विविध दोहे

Kaushlendra Singh Lodhi
विविध दोहे पानी स्वयं बचाइए, करिये स्वयं सुधार। औरों को [...]

कैसे बने रईस

RAMESH SHARMA
उनके चेहरों पर दिखे, एक अजब सी खीस ! टीवी पर चिल्ला रहे ,..ऐसे [...]

रमेशराज के प्रेमपरक दोहे

कवि रमेशराज
तुमसे अभिधा व्यंजना तुम रति-लक्षण-सार हर उपमान प्रतीक में [...]

पर्यावरण खराब

RAMESH SHARMA
ढूंढें छायां पेड़ की, खड़ी करें जब कार ! पेड़ लगाने का कभी, करते [...]

उसका करें विरोध

RAMESH SHARMA
फैलाते दुर्गंन्ध जो,... ऐसे रस्म रिवाज ! उनका करना चाहिए,झटपट [...]

जीवन के दिन चार

RAMESH SHARMA
करें शरारत वो कभी, करें कभी तकरार ! समझूं इसको दिल्लगी, या [...]

आएगा चितचोर

RAMESH SHARMA
बदरा बरसे झूमकर ,करे बिजुरिया शोर ! बैठे कंत विदेश में ,मन में [...]

मन मे उठे हिलोर

RAMESH SHARMA
रात चाँदनी चाँद की ,कालिंदी कर शोर ! देख नजारा ताज का,मन में [...]

कुदरत से खिलवाड

RAMESH SHARMA
जीवन मे अपने कभी, नही लगाया झाड ! जंगल के जंगल मगर,हमने दिए [...]