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दोहे

मत करिए उपहास

RAMESH SHARMA
जिस पनघट के नीर से, सदा बुझायी प्यास ! उसका भूले से कभी, ...मत [...]

दोहे रमेश शर्मा के

RAMESH SHARMA
कितना भी समझाइये, दें कितने भी तर्क ! घडा रहा चिकना अगर, नहीं [...]

लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप। जरा जरा सी बात पर, करिये नहीं विलाप।।

Rakesh Dubey
लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप जरा जरा सी बात पर, करिये [...]

दोहे रमेश के दिवाली पर

RAMESH SHARMA
संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश ! दीवाली को पूजते, इनको सभी [...]

दोहे ताजा घटनाक्रम पर

RAMESH SHARMA
बाजारों में मच गया, जमकर हाहाकार ! आतंकी हैं खौफ में,.. जनता है [...]

कुछ दोहे

दुष्यंत कुमार पटेल
(1) दर्शन करने श्याम का,चल वृन्दावन धाम ! जग का पालन हार वो , जप [...]

कुछ दोहे

Rajeev 'Prakhar'
घोर तमस संसार में, भटक रहा इन्सान l सबके अपने देखिये, अलग-अलग [...]

दोहे

Kokila Agarwal
जीवन की ये चाकरी मुझको नहीं सुहाय थामूं बहिया अापकी मुझको [...]

धुंध अंधाधुंध….

Pravin Tripathi
पर्यावरण की दुर्दशा पर कुछ विचार... क्या दिल्ली लखनऊ क्या, [...]

पंच दोहे

Pravin Tripathi
पंच दोहे.... पनप रहा है देश में, बहु आयामी आतंक। नहीं अछूता अब [...]

जगमग हो परिवेश

हिमकर श्याम
चकाचौंध में खो गयी, घनी अमावस रात। दीप तले छुप कर करे, [...]

मिटे भेद विकराल

हिमकर श्याम
सज धज कर तैयार है, धनतेरस बाजार। महँगाई को भूल कर, उमड़े [...]

माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान

हिमकर श्याम
चाक घुमा कर हाथ से, गढ़े रूप आकार। समय चक्र ऐसा घुमा, हुआ बहुत [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
दिल सम्हाल कर राखिए,ना जाये यह टूट। दिल बिन प्रेम में ना [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
राजनीति बाज बैठो, करत गरीब संहार । अापनो वजूद राखो , करत सहज [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
मेघा संदेशा तुम जा ,अलकापुरी कहना । तुमरे बिना कैसे हो, यक्ष [...]

दोहे

डॉ मधु त्रिवेदी
दोहा दुखियारे घर घर बसे,कोउ न देखन जाय । देखन उनको जाये जो [...]

वंदना

prerna jani
वंदना मात शारदे कृपानिधान ज्ञानवान आज दास पे दयालुता अटूट [...]

नेह लुटाती चाँदनी

हिमकर श्याम
शीतल, उज्जवल रश्मियाँ, बरसे अमृत धार। नेह लुटाती चाँदनी, कर [...]

विजय पर्व पर कीजिए, पापों का संहार

हिमकर श्याम
जगत जननी जगदम्बिका, सर्वशक्ति स्वरूप। दयामयी दुःखनाशिनी, [...]

कुछ दोहे…

त्रिलोक सिंह ठकुरेला
फँसी भंवर में जिंदगी, हुए ठहाके मौन । दरवाजों पर बेबशी, टांग [...]

नित

डॉ मधु त्रिवेदी
लड़की नित आगे बढ़े , लड़के करें न काम । मान भंग हो कुल का , अपना [...]

करिए नष्ट समूल….( छंद दोहा)

Ambarish Srivastava
काले बादल छा चुके, आरक्षण चहुँ ओर. दे अयोग्य को नौकरी, करे देश [...]

बंधु जानिये मर्म…दोहे

Ambarish Srivastava
अतिशय धन की लालसा, बनी कोढ़ में खाज. भौतिकता में बह रहा, 'हिन्दू' [...]

यार मुबारक ईद….: दोहे

Ambarish Srivastava
‘यार मुबारक ईद..’ _________________________________ बेकसूर का ही गला, काट रहा [...]

जागेश्वर का जन्म दिन…:दोहे

Ambarish Srivastava
गोलोकवासी श्रद्धेय कवि जागेश्वर बाजपेयी के जन्म दिवस पर [...]

‘होते मानव के लिए, मानव के अधिकार’ : दोहे

Ambarish Srivastava
छंद:-दोहा (दो पंक्तियाँ, चार चरण, प्रति पंक्ति १३, ११ [...]

आग लगा जो स्वार्थी, रहे रोटियां सेंक …: दोहे

Ambarish Srivastava
समसामयिक दोहे: गर्म खून को देखकर, रक्त हो गया गर्म. आग बना जो [...]

बालक लेता थाह..: दोहे

Ambarish Srivastava
लहरों से यह लड़ रहा, है जल राशि अथाह. मृगशावक ले हाथ में, बालक [...]

पहुँचाते राहत त्वरित….: दोहे

Ambarish Srivastava
बाढ़ उत्तराखंड हो, या जम्मू कश्मीर पहुँचाते राहत त्वरित, भारत [...]