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दोहे

आएगा चितचोर

RAMESH SHARMA
बदरा बरसे झूमकर ,करे बिजुरिया शोर ! बैठे कंत विदेश में ,मन में [...]

मन मे उठे हिलोर

RAMESH SHARMA
रात चाँदनी चाँद की ,कालिंदी कर शोर ! देख नजारा ताज का,मन में [...]

कुदरत से खिलवाड

RAMESH SHARMA
जीवन मे अपने कभी, नही लगाया झाड ! जंगल के जंगल मगर,हमने दिए [...]

दोहे….

शालिनी साहू
दोहा... . कउन कहै मन के बात, कउन सुनावै तान| मन कैदी होय गा अब,जब [...]

दोहा

ATUL PUNDHIR
पलकें अनशन कर रहीं, आँखें बेउम्मीद अगर मोल मिल जाय तो, ला दो [...]

रिश्तों की वह डोर

RAMESH SHARMA
मैने खुद ही तोड दी,.रिश्तों की वह डोर! लगी स्वार्थ वश जो [...]

मातृ दिवस पर दोहे

RAMESH SHARMA
माँ के दिल को पढ लिया,जिसने भी इंसान ! नही जरूरी बाँचना,...गीता [...]

केवल माँ को ज्ञात

बसंत कुमार शर्मा
एक कला संसार में, केवल माँ को ज्ञात बिन भाषा बिन बोल के, समझे [...]

मातृशक्ति को नमन्

तेजवीर सिंह
🙏🙏 माँ 🙏🙏 🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺 *माँ* ममता मूरत मधुर,माँ मधुरिम [...]

माँ तो माँ है……

सतीश तिवारी 'सरस'
*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत हैं कुछ [...]

कुछ दोहे

Hema Tiwari Bhatt
💐💐💐कुछ दोहे💐💐💐 एक जैसे भावों की,नकल टीपतेे लोग| फेसबुकी [...]

डाँटे बहुत जमीर

RAMESH SHARMA
आँखें दोनों मूँदकर, किया अगर विश्वास ! होगा तुमको [...]

ज्यों ही किया निकाह

RAMESH SHARMA
मैने उनकी याद से, ज्यों ही किया निकाह ! कविता करने की बढ़ी,स्वत: [...]

हुए बुद्ध सिद्धार्थ

RAMESH SHARMA
बरगद नीचे बैठ कर, हुए बुद्ध सिद्धार्थ ! अर्जित सच्चे ज्ञान [...]

ऱिश्ता -ए -उम्मीद

RAMESH SHARMA
लेते सभी प्रयोग मे,...मुझे स्वाद अनुसार! हुआ नमक की भाँति [...]

मां गंगा का नीर है

अनिल अयान श्रीवास्तव
मां गंगा का नीर है मां गंगा का नीर है व मां बरगद की [...]

🙏 ब्रजरज 🙏

तेजवीर सिंह
🙏🌴 ब्रज के दोहे 🌴🙏 💐🌺🌸🌼🌷🌼🌸🌺💐 ब्रजरज सों कट जात [...]

ऱिश्तों की पहचान

RAMESH SHARMA
कैसे भूलूँ आपका, मै दुर्दिन अहसान ! सहज कराई आपने,रिश्तों की [...]

चली गई इंसानियत

RAMESH SHARMA
खबरें अब अखबार की,लगती है नासूर ! चली गई इंसानियत, छोड शहर को [...]

,श्रम साधक मजदूर

RAMESH SHARMA
मजदूरी के नाम पर,..मिले सेर भर धान ! इसमें कैसे खुद जिएं, खायें [...]

रमेशराज के विरोधरस दोहे

कवि रमेशराज
फूल उगाने के लिए खुशबू के जल्लाद बना रहे हैं आजकल जनता को ही [...]

रमेशराज के शृंगाररस के दोहे

कवि रमेशराज
नैन मिले ऐसे दिखी मुदित कपोलों लाज खिलें कमल की पाँखुरी [...]

आदत से मजबूर

RAMESH SHARMA
जल्दी से माने कहाँ,अपना कभी कसूर ! ऐसा ही है आदमी, .आदत से [...]

“कुदरत का उपहार”

RAMESH SHARMA
बेटी है अनमोल धन,..कुदरत का उपहार ! जिसको मिलना चाहिए, जीने का [...]

सूख गये उद्यान

RAMESH SHARMA
दूषित है जलवायु अब,...सूखे कई प्रदेश ! चलो लगायें बाग हम,मिलकर [...]

वहशी नक्सलवाद

RAMESH SHARMA
झपटें सारे नक्सली, जैसे गीदड़ बाज ! हमने सत्तर साल में, ढूंढा [...]

“सियासत”

Prashant Sharma
सियासत का बस धर्म एक,सत्ता मिलें बस यार। मैं बैठा बेटा [...]

“अहंकार”

Prashant Sharma
अहंकार से ना बचें, राजा रंक फकीर। दूजे सह खुद भी मिटें,घात होय [...]

पृथ्वी दिवस पर

RAMESH SHARMA
खनिज लवण जल दे रहा,मानव को वरदान ! पृथ्वी पिंड विशाल यह, लगता [...]

अति पीडा की छाप

RAMESH SHARMA
उसके चेहरे पर दिखी, अति पीड़ा की छाप ! मारा जिसको भूख ने ,मरा [...]