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Sahitya

लौट के आ जाओ तुम

सतीश चोपड़ा
लौट के आ जाओ तुम मुझपर ये रहम कर दो मुश्किलहै तुम बिन जीना नजर [...]

तन्हाईयां (ग़ज़ल)

ISHWAR DAYAL GOSWAMI
ज़िन्द़गी का हौस़ला , तनहाईयाँ । काव्य की सुंदर कला, [...]

महात्मा सूरदास

सौम्या मिश्रा अनुश्री
हैं ये साहित्य के महाकवि भक्ति काल कृष्ण भक्त [...]

आह्वान

सौम्या मिश्रा अनुश्री
उठो युवकों नव जोश को भर बनो चेतित चेतना पूर्ण होवे शाश्वत [...]

मंगल नववर्ष मनाएंगे

राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय
गाँव-गाँव में शहर-शहर में, कैसी छायी उजियाली है; खेतों में अब [...]

21वीं सदी का इन्सान

Raj Vig
गली मे आज फिर लगी है भीड़ कत्ल हुआ है इन्सानियत का देखती रह [...]

राष्ट्र-भक्ति गीतिका

ISHWAR DAYAL GOSWAMI
शस्य-श्यामला इस धरती को , बारम्बार प्रणाम है । हरे-भरे-से इन [...]

ग़ज़ल

ISHWAR DAYAL GOSWAMI
ज़मानें ये जब भी ज़मानें न होंगे । तराऩें ये तब भी पुरानें न [...]

गर्मी

Punam Garg
बाबा रे बाबा देखो आ गई गर्मी जली धरती [...]

ढोंगी पाखंडी

लक्ष्मी सिंह
💓💓💓💓💓💓 धर्म और संन्यास की आड़ में, साधु का छिपा आसली [...]

*अफसर की अगाड़ी और घोड़े की पिछाड़ी *

भूरचन्द जयपाल
चर्चा का विषय था अफसर अफसर के पास या अफसर से दूर एक मोहतरमा [...]

वक्त आ गया है जबाव का

ISHWAR DAYAL GOSWAMI
वक्त आ गया है, जब़ाब का । हुए बहुत दिन घिसते-पिसते , वेईमानी [...]

*** मुझे निभृत चाहिए ***

भूरचन्द जयपाल
मुझे निभृत चाहिए या जीवन का अवसान सियरान हो जाये मेरा [...]

अपना के मुझको, ठुकरा ना देना

कृष्णकांत गुर्जर
अपना के मुझको,ठुकरा ना देना| हँसाके के मुझको ,रुला तू ना [...]

जिक्रे उल्फत

RASHMI SHUKLA
जिक्रे उल्फत का कुछ ऐसा नजारा था, मेरा सारा वक़्त उनका और उनका [...]

चलो मितवा हम प्यार करें

सुनील पुष्करणा
चलो मितवा हम प्यार करें नील निलय के अंक में प्रीत का उपहार [...]

आँचल संभाल कर चलना : कविता

Radhey shyam Pritam
आँचल संभाल कर चलना हवाएँ तेज हैं। कमसिन उम्र की होती ये [...]

!!–जिस तन लागे वो ही जाने–!!

अजीत कुमार तलवार
दर्द उसी को होता है, जिस को चोट लगती है दुनिया का क्या वो तो [...]

लगन ये कैसी ?

डॉ०प्रदीप कुमार
" लगन ये कैसी"? --------------------- लगा के मेंहदी डाल के घूँघट ! नाची आज [...]

गीत : ये दिल की बात है

Radhey shyam Pritam
दिल की बात लब पर आती नहीं। बिन कहे भी रूह चैन पाती [...]

*** अज्ञान तिमिर ***

भूरचन्द जयपाल
जीवन में अज्ञान-तिमिर का फैला है विस्तृत मैदान कौन हटाये [...]

“हम चलते रहे”

Dr.Nidhi Srivastava
कितने ठहराव रहे जिन्दगी के मगर हम चलते रहे। देख साहिल दूर [...]

सतरंगी चुनरी

जयति जैन
बडे दिनों के बाद आज मालू पागल हुए जा रहा था, समझ ही नहीं आ रहा [...]

!! मृत्यु से कैसा डर !!

अजीत कुमार तलवार
क्यूं करें खौफ मृत्यु से जिस का आना निश्चित है न जाने कितने [...]

जिंदगी

bharat gehlot
हँसने - हँसाने का नाम है जिंदगी , गमो में भी मुस्काने का नाम [...]

“तुझसे मिलने के बाद”(शेर-ओ-शायरी)

ramprasad lilhare
"तुझसे मिलने के बाद" (शेर-ओ-शायरी) तु मिली मुझसे ये खुदा का रहम [...]

!! सत्संग !!

अजीत कुमार तलवार
आज न जाने कितने होते सत्संग, हमारे आस पास और दुनिया भी आती [...]

गज़ल :– बेवजह लोग गंगा नहाते रहे ।।

Anuj Tiwari
तरही गज़ल :-- बेवजह लोग गंगा नहाते रहे । बहर :-- 212--212--212--212 मीठे सपने [...]

एक मुक्‍तक माॅ शारदे केे चरणो में

bharat gehlot
नमन है बारम्‍बार माता शारदे , अन्‍धकार मिटा जगती का , [...]

!! शायरी !!

अजीत कुमार तलवार
सही काम करने वाले के दुश्मन हो जाते हैं लोग न जाने क्या क्या [...]