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Author: Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra
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Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कह दो रात चली अब जाए

कह दो रात चली अब जाए! सूरज निकला नही अभी तक अरूण तथापि गगन [...]

तलाश

मानव की तलाश मे हर नगर ढूंढता है अमरता की प्यास मे गंगाजल [...]

हम नेता ही लोकतंत्र के रखवाले है

हम नेता ही लोकतंत्र के रखवाले है एक नही सौ सौ गुंडे पाले [...]

दीपावली

घने अंधेरा को काटेगे अमा निशा मे प्रकाश बांटेगे दीपो ने यह [...]

बेटियाँ

बेटियां हर्ष का कारण है बेटियो से हर्षित आंगन है बेटियां [...]

शिक्षक दिवस पर

अध्यापक अध्येता है बचपन संवार शिक्षा देता है सही राह [...]

मरकर भी सह रही गरीबी

देख दुर्दशा दीन दुखी की जिसने जीवन साथी खोया शायद ही अन्तिम [...]

हमको तो सच ही कहना है

स्वरचित (अनुभूति) हमको तो सच ही कहना है पराभव का भाव [...]

चिंतन

चिंतन पर पहरे अनेक है पर उडने के पर है मेरे कीमत कम है पर [...]

दृढ पन

आज कही मन की कह दे सफल विफलता का विश्लेषण पर हम कुछ ऐसा कर दे [...]

प्रश्नोत्तर

बडे बडे प्रश्न है जवाब चाहते है अच्छा लगा मुझे भी कुछ [...]

चलो पग साधकर साथी

चलो पग साधकर साथी सुनहरे स्वप्न पूरे हो नये आकाश तक [...]

कलमकार

लेखनी साथ है मेरे अमूर्त. चिंतन का पोषक हूं लिपि का उभार देता [...]

काँटो का सेतु बनाकर चलने में ही मस्ती है ।

जीत हार से न घबराए ऐसी मेरी हस्ती है । तूफानो से पार लगाए ऐसी [...]

बचपन के घरौदे

बचपन के घर ही अच्छे थे बटवारे का नही बिवाद एक साथ सब मिलकर [...]

विज्ञान तेरी हार है।

जब तक है दूषित पानी हवाओं में प्रदूषण की भरमार विज्ञान [...]

भ्रमित होता युवा

बिना आरोप आक्षेप यदि यदि गौर किया जाय तो युवा अपने लक्ष्य [...]

साथियों हम है बेरोजगार

साथियों हम है बेरोजगार कर्म कर मेहनत से भरपूर दौड दौड [...]

बडे राज

बडे ही राज रक्खे है दिलों मे दबा करके कभी कह दो बहाने से मौका [...]

चिंतन की दिशा

चिंतन की दिशा । हम सब मानव प्राणी जितने सामाजिक माने जाते [...]

सदा सत्य का भान जरूरी

चिंतन के पोषक है हम सब; सत्य कथन का ज्ञान जरूरी| अमूर्त बिम्ब [...]

करतब नही दिखाना

कर्तव्य कर रहा हूं करतब नही दिखाना कौशल की कामना है प्रतिभा [...]

बचपन के दिन की यादें

बचपन के दिन की यादे प्यारी सी तोतली बाते नही चाह नही [...]

एक दीपक ही अंधेरा निगल जायेगा

बचकर चलते रहो ठोकरें देखकर जमाना कभी तो बदल जायेगा कांटे [...]

“बच्चे को बच्चा ही समझे”

किसी ने सच कहा है "बच्चों को बच्चा ही समझे" बडो जैसी अपेक्षाए [...]

माँ (एक शब्द महान)

माँ एक शब्द महान जिससे जन्म लिए इंसान । माँ ममता की खान [...]

मुमकिन है।

मुमकिन है सही करके गलत कहा जाऊ सम्भव है गिर गिर कर कही थक भी [...]

मुखौटा

मुखौटा पहने है लोग यहां सच की कैसे पहचान करे बाहर से अमृत है [...]

पत्ता पत्ता सीख दे रहा।

सूरज की है सीख अंधेरे से बाहर आना सीखो चांद की है सीख रात मे [...]

क्या गरीबी वंशानुक्रम से आती रहेगी

क्या विडम्बना है जो हाथ लोगो को कमाकर देते हैं ।वही दूसरो की [...]