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Author: Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra
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Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

विधाएं

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कविता (98 Posts)


दिवाली शुभ होवे

घर मे हो लक्ष्मी का वास खुशियां हो सबके पास अंधेरे का हो जाए [...]

एक एकता

आइये एक होकर चले राह पर नफरतो को दिलो से मिटा दीजिए हम [...]

फिर आया चुनावी त्योहार

आया फिर चुनावी त्योहार, जनता को दिखाते लाली पाप, फिर [...]

छोटा जीवन

हमने छोटे जीवन मे बडे कर्म करके देखे हमने अपने आप से भी गलती [...]

सुख ले लेता है ब्याज

हौसला हिम्मत को ताकत देता है घनी रात से गगन सुबह को देता [...]

ठोकरे खाकर सम्भलता नही

ठोकरे खाता रहा पर सम्भलता नहीं लोग कुछ भी कहे मुझको खलता [...]

भूलना भी अच्छी बात है

स्वरचित भूलने की आदत से परेशान हूं क्या करू मै भी एक इंसान [...]

(@ करवा चौथ@) पति से खूब प्रीति बढै निशदिन इस हेतु ही व्रत ये धारति हैं ।

(@ करवा चौथ@) पति से खूब प्रीति बढै निशदिन इस हेतु ही व्रत ये [...]

पूनम का चाँद

पूनम का चांद चांदनी विखराता मोती सदृश छिटक कर नभ भाता तारे [...]

चलने का संकल्प मन में है ठाना

चलने का संकल्प मन में है ठाना नही फर्क पड़ता किधर है जमाना [...]

जूझकर हारने मे संतोष है ।

अपनी नाकामी छिपाने का बहाना है नही होगा मुझसे ये बुरा जमाना [...]

दशहरा

कितना ज्ञान भरा हो अंदर कितनी होवे शक्ति अपार कितनी सेना [...]

नव किसलय

नव किसलय स्फुटित हो चटक रही है कली कली गुंजित है हर फूल खिला [...]

किसी का सदा बोलबाला कहाँ है

तंगी मे काटे है जीवन सदा ही गरीबों को मिलता निवाला कहाँ [...]

अब तो हमें वार करना है दुश्मन ने ललकारा है ।

अब तो हमें वार करना है दुश्मन ने ललकारा है । कई जवान शहीद हो [...]

अमर रहे गणतंत्र हमारा

तीन लोक तक फहराये तिरंगा; मान रहा जग सारा अमर रहे गणतंत्र [...]

पाक तेरा क्या होगा अंजाम

क्या होगा अंजाम पाक तेरा क्या होगा अंजाम कोई तेरी औकात नही [...]

सदा सुकृति ही जीवित रहती रहे सदा न नश्वर गात

सदा सुकृति ही जीवित रहती रहे सदा न नश्वर गात । अभी दिखा है [...]

शब्द वेद है शब्द कुरान्

शब्द ताकत है शब्द दुआ है शब्द घातक है शब्द दवा है शब्द वेद है [...]

जीवन में आया नवल बसंत

जीवन मे आया नवल वसंत खुशियो की कोकिल कूंक रही हो रहा [...]

हिंदी की गौरव गाथा (हिंदी दिवस पर विशेष )

हिंदी है मेरी मातृ सदृश हिंदी की गौरव गाथा है । हिंदी में [...]

संयोग मे योग करो श्रम को

संयोग मे योग करो श्रम से सारा दुख पल मे हरण होगा कोशिश बस [...]

शिक्षा का गिरता स्तर

शिक्षा के गिरते स्तर मे किसका दोष निकाल रहे। देखे अब [...]

मेरे दृगो से दूर ही रहो अश्रु विन्दु की धारा

मेरे दृगो से दूर रहो हे अश्रु विन्दु की धारा पता चल चुका [...]

कुछ करने की सोच

है रही सोचकुछ करने की है यही सोच कुछ करने की पर परबश होकर [...]

अपने को सक्षम मान चलो

कद मत देखो पद मत देखो कौशल देखो सम्बल देखो यदि समझ रहे खुद को [...]

मेरी लेखनी कुछ तो बोल

मेरी लेखनी कभी क़िसी दिन चुपके से सबसे बचकरके मेरे मन की [...]

प्रात की बात निराली

प्रात की बात निराली बहती है हवा मतवाली खिलती कलियां हर [...]

कह दो रात चली अब जाए

कह दो रात चली अब जाए! सूरज निकला नही अभी तक अरूण तथापि गगन [...]

तलाश

मानव की तलाश मे हर नगर ढूंढता है अमरता की प्यास मे गंगाजल [...]