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Author: Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra
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Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

विधाएं

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कविता (54 Posts)


सदा सत्य का भान जरूरी

चिंतन के पोषक है हम सब; सत्य कथन का ज्ञान जरूरी| अमूर्त बिम्ब [...]

करतब नही दिखाना

कर्तव्य कर रहा हूं करतब नही दिखाना कौशल की कामना है प्रतिभा [...]

बचपन के दिन की यादें

बचपन के दिन की यादे प्यारी सी तोतली बाते नही चाह नही [...]

एक दीपक ही अंधेरा निगल जायेगा

बचकर चलते रहो ठोकरें देखकर जमाना कभी तो बदल जायेगा कांटे [...]

माँ (एक शब्द महान)

माँ एक शब्द महान जिससे जन्म लिए इंसान । माँ ममता की खान [...]

मुमकिन है।

मुमकिन है सही करके गलत कहा जाऊ सम्भव है गिर गिर कर कही थक भी [...]

मुखौटा

मुखौटा पहने है लोग यहां सच की कैसे पहचान करे बाहर से अमृत है [...]

पत्ता पत्ता सीख दे रहा।

सूरज की है सीख अंधेरे से बाहर आना सीखो चांद की है सीख रात मे [...]

हँसते हँसते जीना है

हमने संघर्षो से जीवन जीना सीखा है हमने भी कठिन परिश्रम [...]

हम अपना भार उठाते है

हम अपना भार उठाते है जीवन की गाडी ठीक नही पर उसे रोज बनाते [...]

ये देश तरक्की वाला है

ये देश तरक्की वाला है बीमार को दवा न मिलती पग पग पर [...]

कद मत देखो

कद मत देखो पद मत देखो कौशल देखो सम्बल देखो यदि समझ रहे खुद को [...]

असल में नकली

नकली का जब हुआ प्रसार असली अपना अस्तित्व खो गया बिकता रहा [...]

आंखें

नही बात है शब्द नही है कुछ समझाया आंखों ने मौन होंठ ने [...]

मै नेता हूँ ।

मै नेता हूँ । लोगों को बेवकूफ बनाकर वोट लेता हूँ । मै नेता [...]

मै अकेला न था राह था साथ मे

मै अकेला न था राह था साथ मे मै तो हारा न था कुछ मिला हाथ मे जो [...]

विज्ञान आज अभिशाप बन गया

याद आ रही उन दिनो की समय चल रहा धीरे चाल गति प्रगति की मंद रही [...]

अब तो सहन नही होगा

अब तो सहन नही होगा किए वार पर वार पाक ने हम सहकर मानवता [...]

सुबह हुआ भौरों ने यह बात बतायी

हुआ सबेरा प्राची है मुस्काई नजर मिली फूलो से उसकी मन मे तब है [...]

शशि शीत में

आसमान मे भरी चांदनी हंसता है आकाश रातभर दौड लगाता शशि [...]

मुझे न गवारा कि बुजदिल कहाए

चलो अपना रास्ता स्वयं हम बनाएं चले सही पथ पर बिना पल [...]

बडा ऊंचा समझते हो अपना कद नही देखा

बडा ऊंचा समझते है अपना कद नही देखा पकड बडी ही कहते हो अपना जद [...]

मिट्टी मेरी पहचान

मिट्टी का बना खिलौना मिट्टी मे हंसना रोना मिट्टी ही [...]

न को नकार

न को नकार सच स्वीकार पाने को जीत मिलती है हार सोच रही सकार [...]

एक रूमानीकविता

(एक रूमानीकविता ) होठों पर उसका नाम हुआ जिसके लिए वह बदनाम [...]

सुख दुःख दिखे एक ही साथ मे।

आसमां तक चमक आ गयी सूर्य की अब अंधेरा धरा पर नही रूक सका सर मे [...]

बेशकीमती केवल सोना नही है ।

खुद को भीड मे खोना नही है हमको दुख अब ढोना नही है मिलता है [...]

विचार मेरा कर्म क्षेत्र है

विचार मेरा कर्म क्षेत्र है शिक्षा है आधार लेखन मेरी शक्ति [...]

मै शब्दो का मूर्तिकार शब्दो का महल बनाता हूं।

मै शब्दो का मूर्तिकार मै शब्दो का महल बनाता हूं। धन नही पैसे [...]

सच्ची राह पर चलने वाला

कितनी राते आयी बीती सूरज हर सुबह उगता है सच्ची राह पर [...]