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Author: Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra
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Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दीवारो के भी कान होते है।

किसी के महल भी सूने किसी झोपडी के मकान होते है महल मे भगवान [...]

मानव ने खूब की मनमानी

मानव ने खूब की मनमानी प्रकृति की कर दी हानि गंदी कर दी [...]

हम अपनी बात बताते है।

हम अपनी बात बताते है अपने उसूल पर चलते है निंदा की परवाह [...]

देश को मत बांटो तुम भाई।

देश को मत बांटो तुम भाई, अपने हित साधन हेतु सब कर रहे [...]

पल पल अनमोल है जीवन म।

संयोग मे योग करो श्रम से सारा दुख पल मे हरण होगा कोशिश बस [...]

मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था।

मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था ज्ञान कही कुछ कम था। अपना देखा [...]

संपनो को दिल मे रखता संजोता हूं।

अपने अनुभव अनुभूति को शब्द मे पिरोता हूं कल्पना मे घूमकर [...]

पता लगाओ सुबह कहां हो रही है।

पता लगाओ सुबह कहां हो रही है आज भी दुनिया पूरी सो रही है घना [...]

गांव की मिट्टी मे शोधी महक है।

गांव की शोधी महक है पेड के है छाव चिडियो की चहक [...]

हल की हल्की बात

फुर्सत के पल में बैठे तो, याद आ गई बीते पल की। कितने सुखद [...]

शब्द शक्ति

भाषा की शक्ति जब दी है ईश्वर ने हमको भरपूर । उसका हम [...]

पावस पर

वर्षा की शाम सुहानी बादल से पूरित नील गगन विस्तीर्ण शून्य मे [...]

कभी लेखनी कहती है ।

कभी कभी कागज कहता है , कभी लेखनी खुद कहती है आज तुम्हें कुछ [...]

वर्षा का मौसम है।

बूँदे गिरती छम छम है। कही अधिक कही कम है। दिखता नही कही तम है [...]

जिसके जान से ही मेरी पहिचान है

जिसके जान से ही मेरी पहिचान है, तुम नही तो दिन मेरा सूनसान [...]

कृपा निधान

शुचि जीवन निर्मल मन हो, दूर दुमति हो सद्सम्मति हो, जीवन भाषित [...]

बचपन के घरौदे

बचपन के घर ही अच्छे थे बटवारे का नही बिवाद एक साथ सब मिलकर [...]

कम कीमत लग गयी हमारी

कम कीमत लग गयी हमारी यह संसार बना बाजार किसी के संपने [...]

बदनाम

बदनाम सही से हो जाए मीरा ये कहती है। कर सकूं कार्य गतिरोध हीन [...]

हम कम मे जी लेते हैं ।

हम कम मे भी जी लेते है कभी कभी खुद को समझाते कभी उर के छाले [...]

बाल कविता (पुस्तक)

बाल कविता ( पुस्तक) हरी रंगीली काली पीली नयी किताबे [...]

हम सब आशावादी है ।

हम सब आशावादी हैं। गिरगिर कर गिर समतल से, उठकर चलने के आदी [...]