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Author: रणजीत सिंह रणदेव चारण

रणजीत सिंह रणदेव चारण
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रणजीत सिंह " रणदेव" चारण गांव - मुण्डकोशियां, तहसिल - आमेट (राजसमंद) राज. - 7300174627 (व्हाटसप न.) मैं एक नव रचनाकार हूँ और अपनी भावोंकी लेखनी में प्रयासरत हूँ। लगभग इस पिडीया पर दी गई सभी विधाओं पर लिख सकता हूँ। आप सभी मेरी प्रत्येक रचना को पढकर अपनी टिप्पणी देंवे और कोई गलती हो तो सुधार भी बतावें। मेरी आशा मेरा हौंसला। धन्यवाद

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

जिंदगी

ये मासूमियत यूं ही ढल रही हैं, जिंदगी में तन्हाई यूं खल रही [...]

-सहर्ष सूखी पडी धरा

सहर्ष सूखी पडी धरा ,हैं बादल अब आओ तो। किसान तेरी राह देख रहा, [...]

-दीवाली

दीवाली पर्व को मैं द्वार तुम्हारे* धन, हर्ष, व रंगरोचन [...]

कुछ ह्रदय उद्गारों का कहना हैं

समतल धरा से , लेकर हिमगिरी तक, जीवन से स्वयं का ओझल होने तक,, [...]

मैं दीपावली न सुरज न चाँद की

अमावस्या को दीपों से चमकती, मैं दीपावली न सुरज न चाँद [...]

मोदी जी की बाजी

मोदी जी की बाजी अंधों को बर नहीं आती। अंधे बरक्कत चाहते पर ये [...]

देशद्रोही छुप बैठे हैं

देशद्रोही छुप बैठे हैं, हिंदु वतन की रिक्तियों में। [...]

देश रक्षा के ए-सिपाई

देश सीमा को न ओझल होने देता। भूखा , प्यासा होकर धरा लिए रहता [...]

विदाई का त्योहार

सूना गूरूजी से की विदाई का आया त्यौहार । मैं थम गया अब कैसे [...]

आखिर जवानी में भुल जाते हों

गीतो को तुम तो गुन गुनाते हो, भरी जवानी में क्यो इतराते हो [...]

मन्दिर, मस्जिद नाम हैं मेरा , शिश झुकाने का करते फैरा।

मन्दिर, मस्जिद नाम हैं मेरा,, शिश झुकाने का करते फैरा | [...]

-वो भारत देश हैं मेरा, जिस पर जन्म लेकर किया मैंने सवेरा।

वो भारत देश हैं मेरा, जिस पर जन्म लेकर किया मैंने सवेरा। वो [...]

आओ नेताजी हम दोनों कुछ बात करें

आओ नेताजी हम दोनों कुछ बात करें,, हमारे देश के लिए हम कुछ काम [...]

बदला तो लेना हैं मगर ( पाक को समझाने के लिए एक रचना)

बदला तो लेना हैं मगर, तेरा बचना हैं नामुंमकिन | आजा पाक आजा [...]

-चल आना अब लौट

चल आना अब लौट,आशा का नूर जगाना हैं, न आया तो तु मेरे दिल का [...]

माँ ओ मेरी माँ

माँ ओ माँ मेरी वो तेरा कहना था, बुढापे मे सहारा बताना था | भुलु [...]

-दिल तो कहता हैं

दिल तो कहता हैं बहूत ओ यारा मगर | यूँही हटा देता हूं, उन नजरो से [...]

-मैं फौलाद ( मैं फौलाद, मैं फौलाद, हूँ हूँ, भारत माँ की औलाद।)

मैं फौलाद, मैं फौलाद, हूँ हूँ, भारत माँ की औलाद | मैं फौलाद, [...]

जीवन में आभा की ज्योत जगा दो ( ह्रदय की आभा)

जीवन में आभा की ज्योत जगा दो, जीवन में थोडा कुछ कर [...]

प्रकृति परिवेश वर्षा से रंग – बे गुलशन खिलता

प्रकृति परिवेश वर्षा से रंग-बे गुलशन खिलता। देखकर के ये सब [...]

जीवन परिश्रम और आशाएँ

निर्जन नाम साथ हरे-भरे खेत - खलिहान, ओर कुछ आडी - टेडी बस्तियों [...]

-हरिनाम

हरिराम जपले प्राणी ; जन्म यो सुधर जाय । केऊ मन हित सोच के ; [...]

मोदी जी जिओं हजारों साल

भारत का सपना साँझ लिये , सीढ़ी से मंजिल चाल लिये,, गली - गली में [...]

नयें युग का बदलाव

नया युग सा आया हैं ,जर्रा इसकी बौछारें देखना। हाल- ए- हाल [...]

-जन की कौन देख रहा?

कौन तडफ रहा है, इस समर भारत देश में, क्या किया तुमने त्रिकुणी [...]

-देखों तो आंखों के आगे जुर्म दिखता हैं

जुर्म की धारा इन पाखण्डों से दिख रही है। उनके कर्मों से ये भु [...]

-होली आई – रे ( होली गीत )

देखों-देखों होली आई रें, खुशियां रंगा में छाई रे। हाँ रे होली [...]

हैं सखी रंग – रंगदो ना गुलाल (होली गीत)

प्रिय मोरी सखी तुम रंग-रंग दो ना रंग गुलाल। फाग की तानें [...]

-बचपन का मेला

मेले के जीवन से एकदम विपरित बचपन में था मैं भोला - सयाना। [...]