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Author: विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे
Posts 43
Total Views 3,440
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बेटी की विदाई

• बेटी की विदाई बेटी जब-जब सपना देखे बाबुल का घर अपना [...]

कितने अरमान दिल में छुपा लाया है

कितने अरमान दिल में छुपा लाया हैं, कोई है शख़्स जो मेरा अपना [...]

तमन्ना~ए~ज़िन्दगी

तुझ पर विश्वास तो पूरा था मेरी तमन्ना~ए~ज़िन्दगी जानता न था [...]

चली जा रही है, कली जा रही है

जाने ये हालात हमें कहाँ ले चले, दो पल पास बैठो, ये दिल कुछ कहना [...]

हमारी चाहत आई है।

उन्हें कद्र ही नहीं हमारे प्यार की, जिनके नाम हमने ये जिंदगी [...]

हुस्न को गुरुर किस बात का है,

हुस्न को गुरुर किस बात का है, ये चाँद भी बस रात का है। *** *** ये [...]

हम खामोश है मगर तुम्हें भूल न पाते हैं

हम खामोश है मगर तुम्हें भूल न पाते हैं दिल से सदा देकर [...]

गुलशन-ए-इश्क़

‘दवे’ ये ख़ार गुलशन-ए-इश्क़ के भी क्या ख़ार है, दिल चीर कर कहते [...]

हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का।

ज्यादा जुनून नहीं था मुहब्बत में कुछ पाने का , हम तो हौसला रख [...]

उस लम्हा

उस लम्हा काश हम थोड़ा ठहर गए होते, जब तेरे दिल में उतर जाना [...]

शायरी

ये मौसम बदलता जा रहा है रंग अपना, और वो अपनी बात पर कायम [...]

दुनिया का चाल-ओ-चलन देख लिया

उस शख़्स की आँखों में बचपन भी था और जवानी भी, उसकी बातो में [...]

मेरे क़त्ल की ख़बर

मेरे क़त्ल की ख़बर किसी को पता क्यों नहीं, उनकी बेरुखी ने मुझे [...]

नवरात्री

बड़ी बड़ी बाते करने का, ये वक़्त नहीं है मेरे यारा, एक छोटा सा [...]

रंग

रंगों की दुनिया से एक खबर लाई है, ये नमकीन हवाएँ उसे छूकर आई [...]

रात की रंजिशें

रात की रंजिशें मिटाकर तो देखो, आफताब दिलों में उगाकर तो [...]

ख़िज़ां के रखवाले बाग में बहार आने नहीं देते

ख़िज़ां के रखवाले बाग में बहार आने नहीं देते, मेरे गुलशन के ख़ार [...]

पागल मछली

अब हमे यह फ़िक्र नहीं कि वो रूठ जाएगी , ये पागल मछली समन्दर से [...]

शायरी- अँधेरा

इतना तो दर्द लाज़िम है 'दवे'बेलौस जवानी में, बारिश हो अश्क़ों [...]

ख़्वाब लिए जाता हूँ

आज रुखसत होना है तेरी महफ़िल से, तोहफे में तुझे प्यार दिए जाता [...]

डर लगता है

डर लगता है इन रातों से, इन रातों से डर लगता है, कब कौन कहाँ कैसे [...]

ये इंतजार

दुनिया के अपने रिवाज ओ रवायतें है प्यार करने के, बस नफ़रत पर [...]

कौन उजाला लाएगा

वतन को रिश्वतों के रिवाज़ में जकड़ बैठे है, कैसे ज़ाहिल लोग [...]

किताब-ए-इश्क़

किताब-ए-इश्क़ के हर पन्ने पर एक ही ख़ुशबू थी, इबादत-इ-इश्क़ का कभी [...]

घाव

नाम लिखते है मिटाते है, अपने ही नाम से अपना दिल बहलाते है, [...]

वतन

उस वक़्त का इन्तजार है जब वतन में खुशहाली होगी, पतझर हो या [...]

बारिशें

वो बारिशें अब कहाँ मयस्सर हैं, जिनमें नादान शरारतें होती [...]

पानी

कभी किसी की आँखों से बरसा है, कभी आसमान से पानी। ज़रा संभाल [...]

टूट कर

टूट कर बिखरना तो आइनों की फितरत है मेरे यार, बस तुम्हारी [...]

शायरी

फूल देखकर जिसकी याद आती थी, आज न जाने क्यों वो शख़्स कांटो सा [...]