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Author: विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव
Posts 19
Total Views 7,806
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आंखे

दो आंखों की जेल में उसकी हम गिरफ्तार रहे हैं। एक जमाने से इस [...]

यादों के जंगल

यादों के जंगल आने दो। साथ बिताये पल आने दो।। समस्याएं [...]

बरहम सी ज़िन्दगी

बरहम सी जिंदगी है सँवार दो तो अच्छा है। दर्द दिया ठीक किया [...]

दिखता है

और क्या-क्या ना यार दिखता । प्यार अब इश्तिहार दिखता है।। [...]

चिठ्ठियां

इन दोस्तों ने कितनी लिखायी थी चिठ्ठियां उनकी सहेलियों को भी [...]

जान के दुश्मन

जान के दुश्मन मन में रहकर पलते हैं मेरे दीये तेरी यादों से [...]

राम से

ेशर्म की कलम से हर चमन और हर कली के नाम से, हैं आज कल कुछ रोज [...]

गधा परेशान है

छेड़ते हुये जो मुझे, मेरा एक छात्र बोला... सर जी सुना है आप, बड़े [...]

हज़ल

हज़ल। भूरे लोग करिया लोग। तपे हुए है सरिया लोग।। ज्यादा शान [...]

दो लफ्ज़

बेशर्म की कलम से दो लफ्ज़ प्यार के दो लफ्ज़ प्यार के गर [...]

ख्वाब शशि के

बेशर्म की कलम से ख्वाब शशि के कहने को अपवाद रहा हूँ। पर [...]

आ रहे है

बेशर्म की कलम से आ रहे हैं दिन दिन निखरते जा रहे हैं।।। [...]

दूर नही

बेशर्म की कलम से मुझसे दोनों जहान दूर नही। दोस्त अब [...]

ठाठ रहे रे

बेशर्म की कलम से बुंदेली पुट अरे कछु ने कर रय हैं सब [...]

बाँट रहे रे

बेशर्म की कलम से अब ना अपने ठाठ रहे रे। निज जख्मों को [...]

तू जो कह दे

बेशर्म की कलम से मैं तेरे प्यार की कीमत भी चुका सकता हूँ। तू [...]

शाम डरते हुए

बेशर्म की कलम से शाम डरते हुए रोज कितने मुख़ौटे लगाता हूँ [...]

बेशरम

दिल ही है बेशर्म या दिलदार बेशरम। करना नही है प्यार का [...]

बेटी है तो

घर, घर है गर घर में बेटी है बेटी है तो खेल हैं,खिलौने [...]