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Author: satyendra agrawal

satyendra agrawal
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चिकित्सा के दौरान जीवन मृत्यु को नजदीक से देखा है ईश्वर की इस कृति को जानने के लिए केवल विज्ञान की नजर पर्याप्त नहीं है ,अंतर्मन के चक्षु जागृत करना होगा

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

अनुभूतिया

जीवन की राहे सूनो हो चली मन उदासी के सागर में डूबता रहा राहे [...]

उड़ान

मन उमंगो के आसमान में उड़ने लगा राहे स्वयं राह दिखाने लगी [...]

उषा का स्वागत

प्रिय उषा को जन्म दिन पर भेंट पौष की ठिठुरन में धूप का टुकड़ा [...]

बचपन की बारिश

वर्षा की फुहारों में मन करता है रिमझिम के गीत गाते बिना छाते [...]

ईश्वर से परिचय

आज सुबह ईश्वसर से परिचय हुआ है मेरा,- गीत गाते उमंगो से भरे [...]

महाभारत तो जीतना होगा

हे कृष्ण कब आओगे आतंक का विकराल तांडव कब तक देखोगे अर्जुन आज [...]