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Author: sushil sarna

sushil sarna
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I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

नज़र…

नज़र... मैं पीता नहीं तू पिलाने .लगी है क्यूँ चेहरे से पर्दा [...]

प्रणय गान …

प्रणय गान ... कौन मेरी हथेलियों पे एक आसमान लिख गया। स्मृति [...]

विश्वास ….

विश्वास .... क्या है विश्वास क्या वो आभास जिसे हम केवल महसूस [...]

शृंगार ….

शृंगार .... बीतता है क्षण जो प्रतीक्षा के अंगार में ...बदल जाता [...]

लम्हा…

लम्हा.... न ज़िस्म रखता हूँ मैं न पर रखता हूँ ...मैं कहाँ कभी दिल [...]

नकली परतें…

अर्श पर नकली परतें नहीं होती फ़र्श सी वहां नफ़रतें नहीं होती [...]

दीदार…

इस दीद को हुआ फिर दीदार आपका आया संग कयामत के ख़्वाब आपका [...]

1.विहग ..,, 2.रोटी …

1.विहग .. ले अरमान मधुर से मन ..में ...उड़े जा रहे विहग ..गगन में [...]

वो बुद्ध कहलाया …

वो बुद्ध कहलाया ... दुःख-दर्द,खुशी, सांसारिक व्याधियों के [...]

ज़माल…

ज़माल... इक यक़ीं इक ख़्वाब हो गया हर सवाल बे-हिज़ाब .हो गया थे [...]

जंगल …

जंगल ... जंगल के जीव अब शहरों में चले आये हैं स्वार्थी इंसान [...]

हिचकी . ..

हिचकी . .. रुख़्सत हुए जहान से तो ये हयात हंसने लगी लाश अधूरी [...]

सांझ अमर हो जाएगी …….

सांझ अमर हो जाएगी ……. पलक पंखुड़ी में प्रणय अंजन से सुरभित [...]

सजदा …

सजदा ... सजदा करूँ तेरा ख़ुदा या पूजूँ मैं इंसान को भूल बैठा [...]

यकीं के बाम पे …

यकीं के बाम पे ... हो जाता है सब कुछ फ़ना जब जिस्म ख़ाक नशीं हो [...]

हर ख़ार …

हर ख़ार ... हर ख़ार तेरी राह का पलकों से उठा लेने दे हर अश्क [...]

हया …

हया ... उम्र जवानी की तो बेमिसाल होती है नज़र ही जवाब,नज़र सवाल [...]

बेनूर ….

बेनूर …. अग्नि चिता की बहुत मग़रूर हुआ करती है जला के ये [...]

आगाज़ ….

आगाज़ बदल जाते हैं अंज़ाम बदल .जाते हैं वक्त के साथ लोगों के [...]

नम पलक…

आवाज़ थी ख़ामोश और ख़ामोशियों में शोर था बन्द पलक में याद से [...]

कोठा….

कोठा.... अपनी हवस के लिए हमें ज़रिया बनाया जाता है और होटों से [...]

किरदार

अब जज़्बा-ए -ईसार का क्या कहिये ...और इज़हार-ए-प्यार का क्या [...]

गर्व ….

गर्व .... रोक सको तो रोक लो अपने हाथों से बहते लहू को मुझे [...]

बेशर्मी से … (क्षणिका )

बेशर्मी से ... (क्षणिका ) अन्धकार चीख उठा स्पर्शों के चरम [...]

एक गुंचा…..

एक गुंचा (२१२ x ३ ) क्यूँ हवा में ज़हर हो गया हर शजर बेसमर हो गया [...]

व्यथा….

एक लंबे अंतराल के पश्चात तुम्हारा इस घर मेंं पदार्पण हुअा [...]

हया में लिपटा ….

हया में लिपटा .... तन्हाई में तूने जब खुद को संवारा होगा [...]

आभास (वर्ण पिरामिड )

आभास (वर्ण पिरामिड ) मैं तुम यथार्थ और हम एक विश्वास जीवन [...]

वर्ण पिरामिड….

वर्ण पिरामिड में प्रथम प्रयास : है धूप ही धूप हर ओर हुआ [...]

तुम्हारे बाहुपाश के लिए …….

तुम्हारे बाहुपाश के लिए ……. कितने वज्र हृदय हो तुम इक बार [...]