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Author: sushil sarna

sushil sarna
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I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

प्यार के रंग….

प्यार के रंग.... प्यार के रंग अपनी आँखों में लिए आ जाओ [...]

नेम प्लेट …

नेम प्लेट ... कुछ देर बाद मिल जाऊंगा मैं मिट्टी में पर देखो [...]

कस्तूरी….

कस्तूरी.... बीती रात की बात वो l .... बादल की बरसात वो l ...... सांसें [...]

प्रेम …

प्रेम ... अनुपम आभास की अदृश्य शक्ति का चिर जीवित अहसास है [...]

प्रेम …

प्रेम ... अनुपम आभास की अदृश्य शक्ति का चिर जीवित अहसास है [...]

यादों के सैलाबों में ….

यादों के सैलाबों में …. शराबों में शबाबों में ख़्वाबों की [...]

तिलस्म ..

तिलस्म .. मेरी दुनिया को सितारो स्याह न करो l ...मेरे गुलिस्तां [...]

तिलस्म ..

तिलस्म .. मेरी दुनिया को सितारो स्याह न करो l ...मेरे गुलिस्तां [...]

मधु क्षण….

मधु क्षण.... मौन भाव ..अभिव्यक्त करो तृषित निशा को तृप्त ..करो [...]

ज़िंदगी के सफ़हात …

ज़िंदगी के सफ़हात ... हैरां हूँ बाद मेरे फना होने के किसी ने [...]

पत्थर के ईश …

पत्थर के ईश ... झूठ की झोली में तो विष ही सदा आया .है कड़वा ही [...]

सुर्ख आरिज़ों पे ….

सुर्ख आरिज़ों पे …. सुर्ख आरिज़ों पे गुलाब रखते हैं ...वो चिलमन [...]

स्पंदन….

स्पंदन.... झुकी नज़र रक्ताभ अधर ...हुए अंतर्मन के भाव प्रखर [...]

मुलाक़ात….

मुलाक़ात.... बड़ी हसीन मुलाक़ात हो जाती है .....जब शब् को बरसात हो [...]

तुम्हारी कसम …

तुम्हारी कसम ... सच तुम्हारी कसम उस वक़्त तुम बहुत याद आये [...]

सौगातें …

सौगातें ... सावन की रातें हैं सावन की बातें हैं l ...सावन में [...]

अमर कलम …

अमर कलम ... चलो आओ अब सो जाएँ अश्रु के सीमित कणों में खो जाएँ [...]

खूंटी पर टंगी कमीज़ को ….

खूंटी पर टंगी कमीज़ को .... जब जब मैं छूती हूँ खूंटी पर टंगी [...]

स्पर्श ….

स्पर्श .... क्षण भर के आलिंगन का संसार मुझे तुम लौटा दो रजनी [...]

नज़र…

नज़र... मैं पीता नहीं तू पिलाने .लगी है क्यूँ चेहरे से पर्दा [...]

प्रणय गान …

प्रणय गान ... कौन मेरी हथेलियों पे एक आसमान लिख गया। स्मृति [...]

विश्वास ….

विश्वास .... क्या है विश्वास क्या वो आभास जिसे हम केवल महसूस [...]

शृंगार ….

शृंगार .... बीतता है क्षण जो प्रतीक्षा के अंगार में ...बदल जाता [...]

लम्हा…

लम्हा.... न ज़िस्म रखता हूँ मैं न पर रखता हूँ ...मैं कहाँ कभी दिल [...]

नकली परतें…

अर्श पर नकली परतें नहीं होती फ़र्श सी वहां नफ़रतें नहीं होती [...]

दीदार…

इस दीद को हुआ फिर दीदार आपका आया संग कयामत के ख़्वाब आपका [...]

1.विहग ..,, 2.रोटी …

1.विहग .. ले अरमान मधुर से मन ..में ...उड़े जा रहे विहग ..गगन में [...]

वो बुद्ध कहलाया …

वो बुद्ध कहलाया ... दुःख-दर्द,खुशी, सांसारिक व्याधियों के [...]

ज़माल…

ज़माल... इक यक़ीं इक ख़्वाब हो गया हर सवाल बे-हिज़ाब .हो गया थे [...]

जंगल …

जंगल ... जंगल के जीव अब शहरों में चले आये हैं स्वार्थी इंसान [...]