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Author: Sunder Singh

Sunder Singh
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I am a voice of justice. I do not want to write just for the sake of laurels of praises and awards or name and fame. I just want to spread humanity in the world. That's it.

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

ये शादी के बंधन

वो शादी के बंधन हैं झूठे सभी जहाँ मन से मन की लगन ही न हो वो [...]

धार्मिक कौन

धार्मिक कौन (लघु कथा) नवरात्रों की शुरुआत हो चुकी थी। घर घर [...]

नारी जीवन सतत एक संग्राम है

नारी जीवन सतत एक संग्राम है हर किसी का ही जग में ये अंजाम [...]

तू भी थोड़ा बदल जरा

तू भी थोड़ा बदल जरा ****************** सदियों से ये नदी निरन्तर बस बहती [...]

थोड़ा तो विश्वास करो

बेटी को बस कम ही कम अब आंकना तुम छोड़ दो हम से भी है शान देश [...]

क्यों रोता है चिल्लाता है

क्यों रोता है चिल्लाता है ******************** ये जीवन भी क्या [...]

जय बजरंग बली

हास्य रस में प्रस्तुत एक संदेश जय बजरंग बली एक बार की बात [...]

एक बार झाँक कर देख कभी

एक बार झाँक कर देख कभी ^^^^^^^^^^^^^^^^ कुछ सही गलत का पता नहीं खुद को [...]

क्यों इतना घबराता है

क्यों इतना घबराता है '''""""""""""”""""" प्रातःकाल की किरणों से सब [...]

देखो रवानी मिल गई

ठहरे से इस जीवन को , देखो रवानी मिल गई जैसे सूखे पेड़ को फिर [...]

संसार है ये परिवार

संसार है एक परिवार अपना तो ये सारा ही संसार है एक [...]

स्वागत आगत वर्ष तुम्हारा

नोटबंदी ने , बहुत है मारा मुश्किल है ,अब और गुजारा कुछ तो [...]

खुद ही खुद से मिलता चल

खुद ही खुद से मिलता चल माना है दूर बहुत मंजिल और कदम-कदम पर [...]

एक सामूहिक हत्या थी

भोपाल गैस त्रासदी पर कुछ बह निकले व्यथा के शब्द इक सामूहिक [...]

ये मात्र लेखनी नहीं

ये मात्र लेखनी नहीं एक तुला है न्याय की ये मात्र लेखनी [...]

सादगी में आनन्द

सादगी में आनंद सादगी का आनंद जो भी जान गया एक बार फिर [...]

नोटबंदी कर दी जाती है

नोटबंदी जैसे बच्चे को , थाली में माँ चन्दा दिखलाती [...]