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Author: Dr.Priya Sufi

Dr.Priya Sufi
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हम फकीरों का बस इतना सा फ़साना है, न अम्बर मिला न ज़मीं पे आशियाना है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

नन्हीं गुड़िया

मैं नन्ही सी प्यारी गुडिया मम्मी की दुलारी गुडिया चंदा है [...]

नाम है शिक्षक हमारा (गीत)

ज्ञान दे कर कल सँवारे, अनुभवों की खान है। नाम है शिक्षक हमारा, [...]

गज़ल

मेरे रहबर, मेरे मेहरम, सनम मुझ पर अहसान करो, मैं तूफानों का [...]

सागर उदास है

उस सागर की क्या बात सुनाऊँ वो आजकल उदास रहता है। किनारों [...]

मिर्जा साहिबा

मोहब्बत की दुनिया में साहिबा का नाम विश्वास और धोखे के ताने [...]

नदी अभी जागी है…!

सुनो नदी अभी जागी है अभी तो सिराये हैं मैंने कुछ पूजा के फूल [...]

सोचती हूँ…..

सोचती हूँ किसी दिन पी लूं तुम्हारे होठों की मय एक ही सांस [...]

फोक्ट का तमाशा

यह रविवार था। वीणा के लिए सुखद सुहानी भोर का आनन्द लेने का [...]

सवाल तुमसे…..

कभी देखा है अग्निमुख नग के साये में बसे घरों की लुटी पिटी [...]