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Author: सोनू हंस

सोनू हंस
Posts 48
Total Views 512

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

गीता श्लोक

देहिनोअस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवन जरा। तथा [...]

ये रातें

ये रातें..... अब मेरे लिए, दहशत का पर्याय लगती हैं, तेरे न होने [...]

रंगीला फागुन

रंगीला फागुन आ गयो, री सखी! फागुन आ गयो; मोरा जिया रा यूँ हरसा [...]

महाशिव प्रार्थना

#ॐ नम: शिवाय# महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान् शिव को [...]

शहरी व ग्रामीण जीवन

मैं ग्राम का हूँ मैं शहर में भी हूँ अधिक दूर नहीं मैं ग्राम [...]

मुझे बेवफा न समझ

मुझे बेवफा न समझ, सितारों की तरह हर बार टूटता रहा हूँ आखिर [...]

प्रायश्चित

भास्कर ने उषा के साथ आँखें खोली ही थी कि चिडि़यों की चहचहाहट [...]

नीड़ का मोह

एक पंछी को अपने कुछ कार्यों की निष्पत्ति के लिए किसी आश्रय की [...]

अक्स

एक अक्स है जो, रातों की मेरी परवाह करता है; मुझमें समाहित सा [...]

वो बात अब नहीं जमाने में

वो बात नहीं अब जमाने में, जो कभी हुआ करती थी; वो हवाएँ अब नहीं [...]

अरे मूढ़ मन

अरे मूढ़ मन! इतना हठी न बन ऐसी चंचलता भी ठीक नहीं व्यर्थ [...]

मैं…. इंतजार में हूँ प्रिये

मैं..... इंतजार में हूँ प्रिय तुमने वादा किया था जो आने का कि [...]

नारी शक्ति जागो

क्यूँ हवस का सामान समझी जाती हैं नारियाँ! क्यूँ भोग्या की [...]

भूलें

नजर आज सब कुछ मुझे आ रहा है, कोई मुझसे यूँ जुदा हुए जा रहा है; [...]

मेरे श्याम

मुझे साथ अपने ले चल, मेरे श्याम.... साँवरे..... रहता है तू जहाँ [...]

किस्मत ए रंज

इस मद्धिम रोशनी में कोई पिघल रहा है अपने आगोश में ही कोई जल [...]

प्लास्टर

प्लास्टर........ अजीब चीज है न पर काम की है हाथ टूट जाए तो [...]

पुष्प और अलि

एक उपवन में यूँ खिली एक इठलाती कली, देख उसको पास में जा [...]

अ मेरी कलम

जानता हूँ तुझसा श्रेष्ठ, मेरे लिए कोई नहीं। अ 'कलम' तेरे [...]

समय

मैं.............. वक्त को दरकिनार कर चलता रहा, अपनी जवानी की उमंग में [...]

जो हो रहा है होने दो

मुझे जिंदगी से शिकवा नहीं, जो हो रहा है वो होने दो, हम शायद [...]

अनुशासन

अनुशासन से ही मनुजता की पहचान है, अन्यथा मनुज फिर पशु के समान [...]

राधिका प्रेम

*विधा*- राधिका छंद (प्रति चरण 22 मात्रा, यति 13, 9) मेरे प्रेम की न [...]

श्याम और राधा (प्रथम बार)

देखत नैना श्याम के, राधा है हरषाय। ऐसे मंजुल सुमन तो, मानस* भी [...]

चार दोहे

मेरे जीवन में नहीं, कोई भी इक आस। स्वाति बूँद मिले नहिं फिर, [...]

वो एक रात 8

नीलिमा की हालत बहुत ही खराब थी। वह हाँफती सी छत की सीढ़ियों [...]

उजली-सी किरण

वो उजली सी किरण चली थी कुछ यूँ निकलकर नभ से गिरी सी धरा पर [...]

वो एक रात 7

#वो एक रात 7 बटुकनाथ धूनी के पास पहुँच गए। वहाँ उपस्थित वे [...]

वो एक रात 6

#वो एक रात 6 रवि अंदर की ओर भागता चला गया। अचानक वह किसी से [...]

वो एक रात 5

#वो एक रात 5 चारों दोस्त भी गाँव से आई आवाज की ओर चल दिए। शोर [...]