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Author: Sonika Mishra

Sonika Mishra
Posts 27
Total Views 4,394
मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो!

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो! तुम्हारी गली में, यूं न भटका [...]

कभी वो पास आता है, कभी तो रूठ जाता है!

कभी वो पास आता है, कभी तो रूठ जाता है! मेरे लिए ही तो, खुशियां [...]

मैं तो अब भी तुममें ही जीता हूं

दिन भर गर्मी में जलता हूं! तब तुमको खुश करता हूं! तुम मुझको [...]

वक्त की खींचा तानी में जमाने चले गए

वक्त की खींचा तानी में जमाने चले गए! अँधेरे की चौखट पर दर्द [...]

खेलती है चिन्गारियां

खेलती है चिन्गारियां बेबस आग के लिए है मजदूर लहू [...]

देखकर शोहरत मेरी

देखकर शोहरत मेरी क्यूँ जल रहा है वो था अभी तक साथ मेरे क्यूँ [...]

आज की बेटी

है अग्रसर देश मेरा पर आज की बेटी कहां है खुद की आवाज बनती खुद [...]

कतरा कतरा जी रही है वो

गजल :- कतरा कतरा जी रही है वो-: कतरा कतरा जी रही है [...]

एक रूप में हिन्दुस्तानी

निर्मल पावन सुंदर स्वर्णिम सुशोभित करते नाद मेरे भारत माँ [...]

क्या सोचा है तुमने,

क्या सोचा है तुमने, आज दिवाली क्यूँ मना रहे । ऐसी कौन सी विजय [...]

हद से बढ़ा

हाइकु :- हद से बढ़ा ! वो सरहद पर ! आकर खड़ा !! आज है भरा ! हमारे [...]

शायरी भाग 1

मेरी ज़िंदगी की तन्हाई का, कोई रास्ता नहीं है | हर पल एक चोट सी [...]

सच

कोई जीतने की चाहत रखता है, कोई प्यार की इबादत करता है | बड़ा [...]

तू हार न अभी

तू हार न अभी छमता को अभी पहचानना है ख़ामोशी को लगा न गले [...]

अंधेरे जोड़ के

मुक्तक :- तुम गये क्यूं छोड़ के ! कसमे वादे तोड़ के ! जी रहे हैं [...]

प्रमाण चाहिये

मुक्तक उसको हर बात का जवाब चाहिये ! मेरे दिन और रात का हिसाब [...]

कब सावन आवे

धूप सुनहरी चलती रहती, वक्त का दामन थामे | पर्वत नदियाँ सब [...]

जीतने का जूनून

आसमां क्या चीज़ है वक्त को भी झुकना पड़ेगा अभी तक खुद बदल रहे [...]

आशियाना है वहां

ना जाने वो कहां इस गली इस शहर को छोड़कर वो अब रहता [...]

ऐ बचपना

ऐ बचपना, मुझे जाने दे आगे बड़ना है मुझे तेरी मासूमियत को [...]

एक हलचल सी है

हवाओं में भी, एक हलचल सी है । तुमसे मिले तो, आहट सी है ।। खोकर भी [...]

झूठ बहका,सच है महका

झूठ बहका,सच है महका पाप के अंधकार में, रोशनी का दीप कहता था [...]

वक्त

वक्त जो गुज़र गया उसको तलाशते रहे किसी की याद में वो आज भी [...]

क्युँ नहीं है

हम हार के भी मुस्कुराते है तू जीत कर खुश क्युँ नहीं है एहसास [...]

एक सवाल बनकर

ऐसा न हो भीड़ में खो जाए हम कुछ पल चले और ठहर जाएं हम बिखर न [...]

ऐे ज़िंदगी

ऐे ज़िंदगी मुझे तुझसे मोहब्बत क्युँ है, तू हसती है मेरे [...]

मेहनत

तू क्यूं करता है तुलना उनसे जो रहते है जग में बनकर न्यारे जरा [...]