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Author: Shri Krishna Shukla

Shri Krishna Shukla
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

एक पौधा बेटी के नाम

आज एक पौधा लगाओ बेटियों के नाम लाड़ नित उसपर लुटाओ हर सुबह औ [...]

जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर का निर्माण हो

पूरी हो मन की अभिलाषा जन जन का कल्याण हो जन्मभूमि पर रामलला [...]

द्रौपदी ही अब हरेगी द्रौपदी के उर की पीड़ा

रोज होते हैं स्वयंवर, रोज होती द्यूत क्रीड़ा है नहीं कोई हरे [...]

वोट डालने निश्चित जाना

नेताजी लेकर आए हैं लोक लुभावन ढेरों वादे जनता तो है भोली [...]

हिंदी अपनाओ

हिंदी दिवस पर वर्ष १९८६ , १४_९_८६ को लिखी अपनी एक कविता [...]

हिंदी अपनाओ

हिंदी दिवस पर वर्ष १९८६ , १४_९_८६ को लिखी अपनी एक कविता [...]

असुर हमारे भीतर ही है

बंगलोर में छात्रा से छेड़छाड़ की घटना से क्षुब्ध मन द्वारा [...]

नववर्ष की शुभकामना

नववर्ष आपके जीवन में खुशियाँ अनन्त दे पल पल में हर स्वप्न [...]

चोरों की बस्ती में हल्ला है

बड़े बड़े नोटों की बंदी का जबसे फरमान हुआ है एक एक भारतवासी [...]