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Author: Mandeep Kumar

Mandeep Kumar
Posts 78
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नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का बखान करेगी।और जब वो रूठता है तो मै मेरे दिल का बखान करूँगा।हा पर बहुत अच्छा है वो और मेरे दिल में उस के लिए खास ही जगह है ।जहाँ तक कोई पहुँच भी नही पायेगा। मेरा दिल जरूर दुःखता है पर मेरा दिल उसे बार बार माफ़ कर देता है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दिल अपने को(गजल)

दिल अपने को हम समजा लेगे/मंदीप दिल अपने को हम समाज [...]

गिरे ऐसे चाहत मे(गज़ल)

गिरे ऐसे चाहत में/मंदीप गिरे ऐसे चाहत में तुम्हारी दोबारा [...]

मेरे ख्वाबो में ना आया करो(गज़ल)

मेरे ख्वाबो में ना आया करो, रातो को हमे ना सताया करो। मानता [...]

तेरे मेरे दरमियान (गज़ल)

तेरे मेरे दरमियान/मंदीपसाई तेरे मेरे दरमियान कुछ तो बाकि [...]

चहरा रहा रात भर

आँखो के सामने चहरा रहा रात भर, उसकी यादो का पहरा रहा रात [...]

खामोशिया(गज़ल)

खामोशिया/मंदीप कुछ तो बया करती है ये खामोशिया, बिना समझे [...]

मै वो वेश्या हूँ/मंदीपसाई

तन की मेरी बोली लगाई जाती, गैरो के बिस्तर पर सजाई जाती। में [...]

याद में उसकी/मंदीप

याद में उसकी/मंदीप याद में उसकी कतरा कतरा मर रहा हूँ, प्यार [...]

500 और 1000/मंदीप

500 और 1000/मंदीप देखो मच गया आज फिर हाहाकार, पाँच सौ और हजार के [...]

याद तुम्हारी बहुत रुलाये/मंदीपसाई

याद तुम्हारी बहुत रुलाये/मंदीप ये गलिया तेरी याद [...]

हुसन तेरा जालिम/मंदीपसाई

हुसन तेरा जालिम मुझ पर कहर बरसाये, चाल तेरी मस्तानी मेरे दिल [...]

हाले दिल का दर्द(गजल)/मंदीप

हाले दिल का दर्द सुने कौन, टूटे हुए दिल को जोड़ें कौन। मिलता [...]

क्यों बिन तेरे जिंदगी सुनी सी है/मंदीप

क्यों बिन तुम्हारे जिंदगी सुनी सी है/मंदीप क्यों बिन [...]

दूर हो कर भी कोई पास है/मंदीप

दूर हो कर भी कोई हमारे पास है, हमारे दिल में बसा कोई खास [...]

दो नैनो से तीर/मंदीप

दो नैनो से तीर/मंदीप दो नैनो से दिल पर तीर ना चलाया करो, होती [...]

आज अरमानो को टूटते हुए देखा/मंदीप

आज अरमानो को टूटते हुए देखा, किसी को आज हाथ छोड़ते हुए [...]

मै आज दीवाली मनाऊ कैसे/मंदीप

मै आज दीवाली मनाऊ कैसे/मंदीप मै आज दीवाली मनाऊ कैसे, मेरे [...]

एक मुलाकात(लघु कथा)

"एक मुलाकात" "साई"फिर से वो गली से निकली और मै छुप कर देख रहा था [...]

निकला हूँ अपने पथ पर/मंदीप(कविता)

निकला हूँ अपने पथ पर/मंदीप निकला हूँ अपने पथ पर अब पा कर [...]

सिर्फ तुम/मंदीप

सिर्फ तुम/मंदीपसाई तारो में तुम फिजाओ में तुम हो चाँद की [...]

मुझ को कभी छु नही पाओगे/मंदीप

मुझ को कभी छु नही पाओगे/मंदीप तुम को हर जगह मिलूँगा, हर [...]

मै तुम्हे कैसे बताउ/मंदीप

मै तुम्हे कैसे बताऊ/मंदीप है तुम से कितनी चाहत मै तुम्हे [...]

ऐ जिंदगी क्या होगा आगे/मंदीप

ऐ जिंदगी क्या होगा आगे/मंदीप ऐ जिंदगी तेरी फितरत तो [...]

ऐ चाँद आज तू जल्दी आ/मंदीप

ऐ चाँद आज तू जल्दी आ, बूखा है मेरा चाँद तू जल्दी आ। खड़ा मेरा [...]

पुतला हूँ मिटटी का मैने तो एक दिन मिट जाना है/मंदीप

पुतला हूँ मिटटी का मैने तो एक दिन मिट जाना है/मंदीप ढूढो गे [...]

कैसे कहु मेरा देश आजाद है/मंदीप

समझा जाता जहाँ नारी को जूती के समान, होता जहाँ नारी का हर रोज [...]

तुम ना मिलते तो यू दिल घायल ना होता/मंदीप

तुम ना मिलते तो यू दिल घायल ना होता, पा के दर्द तुम से मै इस तरह [...]

देख सूरत उसकी सारी शिकायते दूर हो जाती है/मंदीप

देख सूरत उसकी सारी शिकायते दूर हो जाती है, ना जाने क्यों देख [...]

राहो में हम अब तुम्हारी क्यों आये/मंदीप

राहो में हम अब तुम्हारी क्यों आये, बेवजय किसी की याद में आँसू [...]

ना मै हिन्दू हूँ ना ही मुसलमान/मंदीप

ना मै हिन्दु हूँ ना ही मुस्लमान , जब मै आया था तो सिर्फ एक [...]