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Author: shuchi bhavi

shuchi bhavi
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Physics intellect,interested in reading and writing poems,strong belief in God's justice,love for humanity.

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

खंड खंड मैं-अखण्ड तुम

।।खंड-खंड मैं,अखण्ड "तुम"।। खंड खंड होता है इंसान संपूर्ण तो [...]

स्वागत है,,,

01.08.16 नसीब में मिली सिर्फ़ तन्हाई,स्वागत है, बुराई गर है ईनामे [...]

पंछी वत ही डोली,,,

28.07.16 समय के साथ चलते चलते जब थकी, तो पनाहों में समय के ही वो हो [...]

तुममें वो पुरानी बात ढूंढती हूँ,,

तुममें मैं वो पुरानी बात ढूंढती हूँ, ढूंढती हूँ वो बीते [...]

इक घर अपना भी बने प्यारा,,,,

26.07.16 इक घर अपना भी बने प्यारा,,, इक तिनका आज फिर लायी हूँ नीड़ [...]

खत्म होती पर आस नहीं,,

26.07.16 "आस", बिन बह्र कुछ,, नयन भर भर पीता आँसूं, खत्म होती पर [...]

क्षणिकाएँ—1

25.07.16 क्षणिकाएँ,,,,, * वक्त के साथ चली तो पिछड़ गयी खुद से खुद ही [...]

कब्र में खाली हाथ जाते हैं

उम्र भर मालो ज़र कमाते हैं क़ब्र में खाली हाथ जाते हैं [...]

छोड़ भवि यूँ इंतज़ार करना

रोज वादे यूँ ही झूठे यार करना आ गया हमको भी दो के चार करना [...]

पलाश का साधुत्व

ऐ पलाश! मैंने देखा है तुम्हें फूलते हुए, देखा है [...]

चाहत

18.07.16 तुम्हें टूट कर चाहने की सजा पाये हैं अब भुला कर तुम्हें, [...]

बोलो तुम्हें किसने बुलाया है??

14.07.16 क्यूँ आज समन्दर आया है सहरा सहरा हम तो थे अब नयनों ने [...]

मोहब्बत को पैरहन की तरह हमेशा ही बदले जो

मोहब्ब्त को पैरहन की तरह हमेशा ही बदले जो बातें ताज की ही फिर [...]

किसी के काम तो आया

मेरा नाकाम होना किसी के काम तो आया, जुबां पर भूले से ही यूँ [...]