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Author: डॉ. शिव "लहरी"

डॉ. शिव
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साहित्य सेवा के रूप में सामाजिक विकृतियों को दूर करने में व्यंगविधा कविता रूप को लेखन में चुना है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बेटियां

बेटियां है अनमोल, नहीं इनको तू तोल। बेटे से बढकर ही, ये करती [...]

बेटियां

बेटीयां है अनमोल, इनको तु ना तोल। बेटे से बढकर ही, ये करती [...]