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Author: डॉ. शिव "लहरी"

डॉ. शिव
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साहित्य सेवा के रूप में सामाजिक विकृतियों को दूर करने में व्यंगविधा कविता रूप को लेखन में चुना है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आज सिंह ने फिर दहाड़ा है।

आज सिंह ने फिर दहाड़ा है, गीदड़ो के झुण्ड को ललकारा है। कटाते [...]

तब तुम लौट आना पिय।

फूलों से लद जाये उपवन, भ्रमर सब गुन गुनगायें। सुगंध बहकाये [...]

कराहती धरती (पृथ्वी दिवस पर)

आओ हम लाज बचाये। इस धरती पर पेड़ लगायें।। सुखी धरती,निर्झर [...]

तुम्हारे आने की आहट में।

शूल सी,इस रात में, भूली तन मन को,बाट में, समीर सी में बह [...]

बेटियां

बेटियां है अनमोल, नहीं इनको तू तोल। बेटे से बढकर ही, ये करती [...]

बेटियां

बेटीयां है अनमोल, इनको तु ना तोल। बेटे से बढकर ही, ये करती [...]