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Author: Acharya Shilak Ram

Acharya Shilak Ram
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मैं, आचार्य शीलक राम, । मेरी अब तक धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, लोकसाहित्य, काव्य संग्रह आदि पर पैंतीस से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं । इसके अलावा मैं ग्यारह International Research Journals का संपादक भी हूं। वर्तमान में दर्शन विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में तैनात हूँ। संपर्क -9813013065, 8901013065 acharyashilakram.blogspot.in https://www.facebook.com/acharya.shilakram

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‘ढाई आखर’ की भूल-भुलैया

दैहिक प्रेम करना जरूर, परंतु रखना साक्षीभाव। बेहोशी में यदि [...]

प्यार- व्यार झूठी बातें हैं..

प्यार- व्यार झूठी बातें हैं खेल है बस स्वार्थ का सारा! दिया [...]

मन की व्यथा!!!!

मन चाहा तब रो लिए! प्रेम मिला उसी के हो लिए!! अपने सम माना [...]

भारत की सिंहगर्जना

इस युग के प्रसिद्ध रहस्यदर्शी, योगी, दार्शनिक एवं चिन्तक ओशो [...]

चिन्तन

चिन्तन करो अवश्य, चिन्तन सन्तुष्टि होय ।। चिन्तन से पथ [...]