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Author: सौम्या मिश्रा अनुश्री

सौम्या मिश्रा अनुश्री
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धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी बढ़ें, करने को शब्द गुंजन। कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ, कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें, करने साहित्य में हवन। सुगमित अमिय हुआ सवेरा , छटेगा तम जो था घनेरा, अब बनेगा उत्कृष्ट चमन। सबका साथ सबका विकास, दृढ़ निश्चयी होवे विश्वास, महके ये सारा उपवन। धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। सौम्या मिश्रा अनुश्री

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

चिंता – चिंतन

विचार मेरे मन में अंतर्नाद करते हुए चिंता पशोपेश का विवाद [...]

जीवन तो एक चुनौती

जीवन तो है एक चुनौती, जीवन भीषण संग्राम है। कुछ आशाएं तुम [...]

महात्मा सूरदास

हैं ये साहित्य के महाकवि भक्ति काल कृष्ण भक्त [...]

आह्वान

उठो युवकों नव जोश को भर बनो चेतित चेतना पूर्ण होवे शाश्वत [...]

जय वीर सुभाष

नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी को शत शत नमन। वीर रणधीर अति प्रबल [...]

बेटियां

नील छंद विधान ~ भगण×5 + गुरु शील विनीत समाहित सुन्दर सोहक [...]