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Author: सतीश तिवारी 'सरस'

सतीश तिवारी 'सरस'
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दिल कहे….

एक मैंने है कविता रची, उससे सूरत मिले आपकी। ००० पास में जो [...]

परम-प्रेमिका अब तलक दूर है

प्रेम-पुलकन पलक से झरी जा रही, पर परम-प्रेमिका अब तलक दूर [...]

हम स्वयं के बल रहे…

रास्ते पर बिनु डरे हम चल रहे, इसलिये बस दोस्तों को खल [...]

पिता आपकी याद में…

पिता पर केन्द्रित तीन कुण्डलिया छंद (1) पिता आपकी याद [...]

नहीं जगाना चाह….

अन्तर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (26 जून) प्रसंग पर (तीन [...]

वक़्त-वक़्त की बात…..

पहले जब कभी आते थे वह मेरे शहर तब मिलते थे मुझसे सबसे पहले पर [...]

बस धता दिखला रहे….

कोई ग़ज़लें ले हजारों घर में ही बैठा मगर, चार कवितायें लिये [...]

…यह क्या..!

चिड़िया उड़ी लेकर आशा छाया की वृक्ष की ओर/पर यह क्या? इससे [...]

एक कुण्डलिया छंद

वाह-वाह की भूख भी,होती बड़ी विचित्र। मगर कभी कहते नहीं,जाने [...]

हम के लिये

'मैं' 'मैं' है और 'तुम' 'तुम' अतः क्योंकर भिड़ना किसी के 'मैं' [...]

माँ तो माँ है……

*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत हैं कुछ [...]

सच की हरदम ही जय होवे

नया वर्ष मंगलमय होवे, दुःख-दर्दों का ख़ुद क्षय होवे. ००० रमा [...]

तीन कुण्डलिया छंद

(1) सच को मैं जो थामता,उतने हों वो दूर. अहंकार में ख़ुद [...]

काश! पुनः लौटें दिन…

चिट्ठियाँ नहीं आतीं अब अपनों की आते हैं कॉल औपचारिकता [...]

समाये रहें रंग…

लो आ गयी रंगपंचमी आज पर फीका है जीवन का रंग नहीं पास [...]

कठिन बहुत जीवन की राहें…

कभी-कभी लगता है हमको, कठिन बहुत जीवन की राहें, ००० जो कुछ भी [...]

गीत लिखूँ क्या?

भाव अभी अज्ञातवास पर गीत लिखूँ क्या, दोस्त ही खंजर भोंकने [...]

होली उत्सव प्रसंग पर…

तीन कुण्डलिया छंद (1) बहे बसंती पवन ले,अपने उर में प्यार. कोयल [...]

उर का कान्हा…..

*चंद दोहे* कठिन स्वयं को जानना,सचमुच मेरे मीत. बिनु जाने ख़ुद [...]

कुण्डलिया छंद के बारे में…

प्रिय मित्रो, मैं आपसे 'कुण्डलिया छंद' के बारे में कुछ [...]

काश….

एक पत्नी का होना भी ज़रूरी है जीवन में/ऐसा मुझे लगता [...]

तीन कुण्डलिया

(१) आ़यी जीवनसंगिनी,नहीं अब तलक यार. जाने कब देगा सरस,दुलहिन [...]

हे,मन

बढ़तों का हाथ थामते लोग समझ रहे ख़ुद को तीसमारखाँ जो देते [...]

गाना होगा

हों लाख व्यस्ततायें पगले, पर गान तो निज गाना होगा. आखिर तो [...]

तीन कुण्डलिया छंद

(१) मेरे-तेरे में लगा,क्यों कर के साहित्य. दिखे न अब उर का [...]

एक कुण्डलिया

परम्परा को तोड़ना,नव-पीढ़ी की रीत. जो कुछ गाया जा सके,वही [...]

नवनीत है बेटी

छंद-ग़ज़ल अरु गीत है बेटी, प्यार भरा संगीत है [...]

नवनीत है बेटी

छंद-ग़ज़ल अरु गीत है बेटी, प्यार भरा संगीत है [...]