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Author: satguru premi

satguru premi
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मैं सतगुरु प्रेमी बेसिक शिक्षा परिषद् द्वारा अध्यापक हूँ, गीत,गजल,छन्द और कविताएँ लिखने का प्रयास करता हूँ,पत्र,पत्रिकाओ में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहतीं हैं , सारंधा की आन, प्रेमी विरह, छाया ' प्रकाशित कृतियाँ हैं।

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बढ़िया पकड़ावति लीक नहीं

बढ़िया पकड़ावति लीक नहीं । जबते यहु देशु अजाद भवा, हमका नहि [...]

वो बेटियाँ ही हैं

वो बेटियाँ ही हैं हमें जीना सिखातीं । जिन्दगी-मौत के संघर्ष [...]

सब आपनि-आपनि गाय रहें

सब आपनि-आपनि गाय रहें । दुनिया का यहै दस्तूर हवै, सबही का नोट [...]

बिरवा कहिसि

हमका यहु गर्व हवै बहुतै अपना तन तोहि लुटाइत है। जब भूख ते [...]