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Author: suresh sangwan

suresh sangwan
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

जब तलक ज़िंदगी है फूल की महकता है

जब तलक ज़िंदगी है फूल की महकता है जलता जितना है सोना आग में [...]

हर तरफ़ फूल ही फूल खिलाते चलिये

हर तरफ़ फूल ही फूल खिलाते चलिये इस क़दर चमन सारा महकाते [...]

छलका दिये आंसू देखा जब सूखा हमने

छलका दिये आंसू देखा जब सूखा हमने गुलशन इसी तरहा बाख़ूबी [...]

यूँ घेर लेते हैं झोंके उलझनों के मुझको

यूँ घेर लेते हैं झोंके उलझनों के मुझको तमाम ज़रूरी बातें काम [...]

लिखती है तब ही कोई नज़्म शायरा

लिखती है तब ही कोई नज़्म शायरा खाती है गहरा जब ज़ख्म [...]

ज़बान पे कुछ और है दिल में है कुछ और

ज़बान पे कुछ और है दिल में है कुछ और जिस्म के दर्द और हैं दिल [...]

तेरे कहे का था यकीन बहुत, जाता रहा

तेरे कहे का था यकीन बहुत, जाता रहा कमान में जो तीर था जाने [...]

ज़ज़्बात अपने हैं ख़यालात अपने हैं

ज़ज़्बात अपने हैं ख़यालात अपने हैं लफ्ज़ मगर मैने चुराए [...]

दुनियाँ भर की खाक़ हम छानते रहे

दुनियाँ भर की खाक़ हम छानते रहे ज़िंदगी में ज़िंदगी से [...]

ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंकते रहे

ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंकते रहे हिलता हुआ फिर अक्स अपना [...]

ज़ुल्फ़ो के पेच-ओ-ख़म में गिरफ़्तार रहने दो

ज़ुल्फ़ो के पेच-ओ-ख़म में गिरफ़्तार रहने दो तीर- ए- नज़र ही [...]

जिंदगी का वो अपनी नज़राना लिए फिरता है

जिंदगी का वो अपनी नज़राना लिए फिरता है नज़रानों में [...]

कहना चाहती है इक़ सुनहरी सी मुस्कान कुछ

कहना चाहती है इक़ सुनहरी सी मुस्कान कुछ रस्म-ए-उल्फ़त का [...]

राहें बहारों की कौन देखे हम खिज़ाँ के पाले हुए हैं

राहें बहारों की कौन देखे हम खिज़ाँ के पाले हुए हैं काँटों [...]

इंसान कभी बुरे नहीं हालात बुरे होते हैं

इंसान कभी बुरे नहीं हालात बुरे होते हैं दिल से होते हैं साफ़ [...]

चल दिया सफ़र पर अब मिलना किससे मिरा हो

चल दिया सफ़र पर अब मिलना किससे मिरा हो क्या मिले कैसा मिले [...]

आएगी वो भी सिमटकर बहार क्यूँ ना हो

आएगी वो भी सिमटकर बहार क्यूँ ना हो उसके तस्व्वुर से दिल [...]

मोहब्बत की तुमसे रवानी चली है

मोहब्बत की तुमसे रवानी चली है अब जाके मिरि जिंदगानी चली [...]

यूँ कि हम बोलते बहुत हैं पर कहना नहीं आता

यूँ कि हम बोलते बहुत हैं पर कहना नहीं आता जीये रहगुज़र में [...]

दुनियाँ-ए- महफ़िल में हँसना हँसाना जान गये

दुनियाँ-ए- महफ़िल में हँसना हँसाना जान गये हम अपने दर्द [...]

आज का दिन भी कल के रोज़ सा है

आज का दिन भी कल के रोज़ सा है मे गंगू तेलि ये राजा भोज सा [...]

नहीं उम्र भर तबियत कुछ देर बहल जाएगी

नहीं उम्र भर तबियत कुछ देर बहल जाएगी तमन्ना -ए-दिल है जहाँ फिर [...]

बशर कैसे बचे बचा तो खुदा भी नहीं

बशर कैसे बचे बचा तो खुदा भी नहीं ज़िंदगी कुछ इश्क़ के सिवा [...]

ईश्क़ जिसे लाचार कर दे मैं वो नहीं

ईश्क़ जिसे लाचार कर दे मैं वो नहीं आँख को ख्वाबों से भर दे [...]

सलाम आया है अभी पैग़ाम बाकी है

सलाम आया है अभी पैग़ाम बाकी है उठा नहीं अभी तक वो गाम बाक़ी [...]

शोख़ नज़रों में हाय मैख़ाना लिए फिरता है

शोख़ नज़रों में हाय मैख़ाना लिए फिरता है फिर भी हर दिल ख़ाली [...]

बग़ैर बरसे ही घटाओं को खोते हुए पाया हमने

बग़ैर बरसे ही घटाओं को खोते हुए पाया हमने ख़ेल तमाशा ही [...]

तमन्ना थी ज़माने में कोई हमसा निकले

तमन्ना थी ज़माने में कोई हमसा निकले कोइ फिर उससे [...]

तमाम जिस्म की नज़र बना के देखिये हुज़ूर

तमाम जिस्म की नज़र बना के देखिये हुज़ूर दुनियाँ-ए-नज़र सि [...]

बैठकर साहिल पे लहर का उठना देखेंगे

बैठकर साहिल पे लहर का उठना देखेंगे जल उठी शमां अब परवाने का [...]