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Author: सरस्वती कुमारी

सरस्वती कुमारी
Posts 17
Total Views 4,640
सरस्वती कुमारी (शिक्षिका )ईटानगर , पोस्ट -ईटानगर, जिला -पापुमपारे (अरूणाचल प्रदेश ),पिन -791111.

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

सास-बहू (लघुकथा)

सास-बहू (लघुकथा) आरती बहू जरा चाय बनाना साथ में पकौड़े [...]

बेटी आई घर-आँगन महकाई

बेटी आई घर-आँगन महकाई खिलखिलाती धूप सी आई सागर की मोती जैसी [...]

चूड़ियाँ

हर सुहागन का श्रृंगार है चूड़ियाँ साजन का मनुहार है [...]

होली

होली आई खुशियाँ खूब लाई मन को भाई। गुलाल उड़े नफरत [...]

नारी

हमें नारी होने का भान कराया जा रहा क्यों कठपुतली की तरह [...]

*कर्ज़*

*कर्ज़ * मातृ-ऋण से जग में होता नहीं कोई उऋण जिस जननी ने जन्म [...]

*कानहा खेले होरी *

कानहा खेले होरी संग राधा गोरी कानहा के हाथ कनक [...]

*धरा*

अपने आँगन में खेल रही धरा फूल-फूल को चूम रही है धरा कलि-कलि [...]

*बेटी को बचाना बेटी को पढाना है *

घर-घर शिक्षा का दीप जलाना है बेटी को बचाना,बेटी को पढ़ाना है [...]

इरादा

गर हो इरादा नेक मंजिल कदम चूमती है सारी दुनिया उसके आगे -पीछे [...]

*कानहा की लीला *

कानहा की मुरली तान है सुरिली कर दे नशिली। कानहा तेरी याद [...]

*महकती फूल हूँ *

महकती फूल हूँ मसले जाने या फिर मुरझाने का कोई गम नहीं है [...]

*महादेव *

*महादेव * हे देवों के देव महादेव! तुम ही सत्य हो तुम ही शिव [...]

उषा

*उषा * रजनी बीती हौले -हौले , उषा मुस्काती आई । लाल [...]

विरह गीत

फागुन में मन हिलोर मारे आईल ना अबहूं सजनवा सब सखियन मिली [...]

माँ गूँजने दो मेरी भी किलकारी

माँ तेरी बगिया की हूँ नाजुक सी कली क्यों चढ़ाती हो बार-बार [...]

माँ गूँजने दो मेरी भी किलकारी

माँ तेरी बगिया की हूँ नाजुक सी कली क्यों चढ़ाती हो बार-बार [...]