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Author: Santosh Khanna

Santosh Khanna
Posts 33
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Poet, story,novel and drama writer Editor-in-Chief, 'Mahila Vidhi Bharati' a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बाल कविता

बाल कविता बच्चों को दिवाली उपहार देखो खेले मेरी [...]

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं [...]

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं [...]

नमन

भारत देश को मेरा नमन सदा प्रेम का पाठ पढ़ाता युद्ध इसे कभी [...]

हिंदी

हिंदी हिंदी भारत माँ की बोली माँ के दूध -सी मिश्री [...]

यादों की छांव.में

अरसा बीता चले गये तुम फिर भी दिल से याद न जाये जाते सावन की [...]

बाल कविता

पढ़ना चाहें गे एक बाल कविता। थोड़े समय के लिए बन जाये [...]

अहसास

अहसास कितने ही बीत गए वर्ष हर्ष में भी, विषाद में [...]

आज की स्त्री

आज की स्त्री आंखों में विश्वास भावों में संवेदना विचारों [...]

युद्ध और शान्ति

नहीं देखता भारत स्वपन कभी विश्व विजय के नहीं किये युद्ध [...]

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं [...]

सच

सच यह सच है पत्थर की लकीर-सा जब मिलती हैं सहस्र [...]

खुशी

बहुत दिनों के बाद आज खालिस खुशी ने डाला फेरा जैसे उषा का [...]

चाह

चाह मेरे ह्रदय का हिमालय बार बार उठ खड़ा होता है वह फैल जाना [...]

सभ्यता

नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और [...]

सभ्यता

नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और [...]

कहर

बार बार रहा कांप धरा का धरातल मच रहा है तांडव तनाव व् विनाश [...]

दामिनी जिंदा है अभी

आज निर्भया यानी दामिनी या असली नाम ज्योति का जन्मदिन है। [...]

हिंदी

सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं हिंदी हिंदी भारत माँ की [...]

खबर।

खबर बहुत पहले की प्रकाशित मेरी एक रचना । तडफती धूप में खाली [...]

पेड़

मेरा पेड़ तपती दुपहरी में जलाता है सूर्य जब हर इमारत, हर [...]

शब्द

शब्द जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता [...]

बदलाव

पुरुष वर्चंस्व का विरोध करती फिर भी पुरुष के लिये सजती नहीं [...]

पहचान

अपने से पहचान कर लो । अपने से पहचान कर लो क्या किया जीवन में [...]

यमुना, एक मरन्नासन नदी

यमुना , एक मरनासन्न नदी कहां हो तुम कृष्ण? गाए चराते [...]

चिड़िया

चिडिया उड़ती चिडिया गाती चिडिया मन को बहुत लुभाती [...]

गज़ल

कौन है जो बादलों की ओट से मुस्काता रहा कर के ईशारे रोशनी के [...]

आईना

आईना कहीं नहीं हूँ मैं अपनी कविता में नहीं है मेरा कोई [...]

अहं

अहं जब जब सोचा पा ली है विजय मैंने अपने अहं पर पता नहीं [...]

बेटियां

जब से बता दिया है उसे नही है भेद लड़का हो या लड़की वह चहकने लगी [...]