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Author: डॉ संदीप विश्वकर्मा "सुशील"

डॉ संदीप विश्वकर्मा
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

भ्रुण हत्या

बेटी है गर्भ के अंदर एक बाप यह जान गया था.. बेटी कि भ्रुण हत्या [...]

पिता

एक पिता ही है जो ख्वाहिशे अपनी बच्चो के नाम करता है... परीवार [...]

पहली बारिश

खिलखिलायी है बहार मोसम सुहाना आ गया... सबके मन को रिझाने वाला [...]

वो हो सकते इंसान नही…

विद्ध्यालय तो बहुत है लेकिन, बचा किसी मे ग्यान नही.. पड़े लिखे [...]