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Author: Sajan Murarka

Sajan Murarka
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

समझौता

चलो कुछ समझौता कर ले वक्त न तुम्हारा न होगा हमारा कुछ आपस [...]

मुक्तक

बुढ़ापे में जो नज़र कमज़ोर हो गई अफ़सोष सब की नीगह पलट गई हर [...]

राम नाम सत्य है

बड़ा अजीब लगता मृत शरीर को कंधे पर रखकर लोग चिल्लाते रहे राम [...]

बसंत

बसंत खड़ा द्वार पल्लवित कुसुम,हरित कोमल पत्र सम्भार दिग [...]

बदलाव चाहिये

बदलाव चाहिये सुबह की चाय हाथ मे अखवार वही [...]

मिलन

एहसास मिलन की खुमार, चड़े हुए नशे की सुमार नशे की सूरत उतरे, [...]

आया रे सावन

आया रे सावन खिल उठा मन, चहका चित्तवन, झूमे आंगन आंगन , सखीयाँ [...]

मैं बूढ़ा पेढ़,

मैं बूढ़ा पेढ़, मुझ मे झुरियां पढ़ चुकी, कितने अर्सों से [...]

बीता- वक़्त

बीता- वक़्त सचमुच खोया वक़्त, सोये देर तक इधर उधर की बातें, [...]

कल

गुजरे हुवे कल पूछे कुछ ऐसे कल अभी गुजरा कंहा से फिर वापस आने [...]

मुक्तक

बहुत उदास हूं थोड़ा मन बहला दो ना बहुत ज़्यादा नहीं थोड़ा समझा [...]

स्वप्न बुनना

स्वप्न बुनना जब देखता हूँ ; बिछोने पर बैठी, हज़ारों फंदे [...]

ठन्ड में पेश है चाय:-

ठन्ड में पेश है चाय:- प्यारा बंधन हम दोनों यारों [...]

जिन्दगी

जिन्दगी जिन्दगी के दस्तूर बड़े निर्जीव हसंता-रोता खेलता [...]

पिया मिलन की बात

पिया मिलन की बात सुनीसुनी सी रात, मन भीगा याद आई तेरी, मन [...]

अजन्ता के मूर्त-रूप

पाषाण शिला मे सजीव शिल्प अत्यन्त निराला; अजन्ता के मूर्त-रूप [...]

चंचलवाला

महके जो अंग अंग जुबां सरस मधुर रशीली नयनो में मादकता है [...]

चिट्ठी आई बेटे की

चिट्ठी आई बेटे की तुम्हारे जाने के बाद हर दिन खिड़की से [...]

हालात

वक्त आया ऐसा न वफ़ादारी रहेगी एहसान की न कोई क़रजदारी [...]

नारी विमर्श

चटक लाल रंग मांग में सिंदूर मंगलसूत्र, चुड़ियाँ माथे की [...]

मुक्तक

जब शहर की उदास सी चुप-चाप शाम देखता हूं गांव में चिड़ियों का [...]

शाम की कहानी

रात दिन का जिक्र रहा, गुमनाम रह गई शाम आशिकों ने दामन [...]

तुम पराई “हो-ली”

तुम पराई "हो-ली" प्रिये ! तुम तो पराई "हो-ली":- छिपुं विस्मृती [...]

पाती प्रेम की

पाती प्रेम की शब्द शब्द है मुखर नेह अनुवादों की अक्षर [...]

एक पाती बच्ची के नाम :-

फ़ोन जब आया कल शाम सोच में बीता समय सो नहीं पाया सारी रात [...]

तेरी याद मे,

तेरी याद मे, मुस्कुराते लबों से, नज़र के झरोखे से ; उँगलियों [...]

कविता के आयाम

छंदों से कर दूं आँख मिचोली, या लिख दूं कोई सुरीली बोली [...]

कन्या की छबी न्यारी

शीतल वचन,कोमल मन,स्नेह सुख परिभाषी मंगल मूरत,नित सेवत,सत [...]

मिलन का आभास

पंख अगर होते मेरे पास रंगों में भर देता पलाश शब्दों में भर [...]

मिलन के पल

प्रिय ! तुम्हारे साथ के वह पल या तुम्हारे बिना यह पल दोनों पल, [...]