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Author: राकेश श्रीवास्तव

राकेश श्रीवास्तव
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आपकी भावनाओं एवं चाहत को मैं अपने शब्दों के स्वपनिल संसार में ले जाने की एक मासूम कोशिश.जैसा देखा वैसा ही सोचा और जस का तस लिख कर आपके सामने प्रस्तुत किया. मेरा ब्लॉग का लिंक है :- http://rakeshkirachanay.blogspot.in/

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

प्रेम-गीत

जी ना सकूँगा तुम बिन मैं यारा, गर तुने मुझको प्यार से [...]

करुणा

करुणा शाखों से पत्ते जब टूटे पतझड़ में, शाखें कब शोक मनाती [...]

आधी-आबादी की व्यथा

आधी-आबादी की व्यथा अश्कों में डूबी कलम, लिख रही मेरी [...]

वाक्यांश- बख्शीश

वाक्यांश- बख्शीश रामाकांत दसवीं पास कर सेठ हजारीलाल के यहाँ [...]