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Author: Rita Yadav

Rita Yadav
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विधाएं

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कविता (22 Posts)


ईट का जवाब पत्थर

पाक का नापाक इरादा ,, लॉघता हमेशा मर्यादा े इनके साथ बात [...]

कशमकश में जिंदगी

कशमकश में बढ़ रही है जिंदगी आगे हर पल कभी अनुभूति प्रेम की [...]

नारी का अपमान

कब तक यूं होता रहेगा नारी का अपमान कहता है जिसको लक्ष्मी [...]

उर्मिला

पलकन अश्रुवन, धीमी गति धड़कन, विरह व्यथा सहन कर तड़पन, [...]

तन्हाई

कैसी तन्हाई बसी है इस भरी महफिल में लबों पर मुस्कान हैl [...]

अभिशाप कहे

अभिशाप कहे संताप कहे या इसको कोई पाप कहे जहां दो वक्त की [...]

बेटी की अभिलाषा

पढ़-लिखकर कुछ करना चाहूं भेदभाव का खंडहर ढाहूं खुले आसमां [...]

“हमारा प्रेम”

हमारा प्रेम एक नहीं प्रेम है लाखों हजार रखते प्रेम को दिल [...]

उड़ो मत हवा में

उड़ते हुए कब किसी ने, सारी जिंदगी गुजारी है l उड़ती है पतंग [...]

वास्ता टूट गया

दीया जलाने लगे आजकल हम आंधी में आग बुझती ही नहीं जो लगी है [...]

कैसा लगा रोग

न जाने एक तबके को कैसा लगा रोग, हाथ पैर कटवा कर भीख मांगते [...]

प्रेम

दर्द निकाल दो हृदय तल से , क्या रखा है दर्द पीने में ? अंतर्मन [...]

समय समय की बात

समय समय की बात हैl सावन में हरियाली दिखे, पतझड़ में झड़ता पात [...]

अभिनेता आजकल का

अभिनेता आजकल का हर शख्स हो गयाl l खालिस दिलों का अब इस जहां में [...]

मेरी अंबे माता

मन का मैंने दीप जलाया , श्वास श्वास विश्वास है l आएगी मेरी [...]

दिल की बात

दिल की बात जुबां पर आ कर क्यों रह गई ? कह सकी नहीं जुबांअदाएं [...]

धर्म कोई कहता नहीं

दर्द दे कर तूने क्या पाया ? क्या दर्द देने ही जहां में आया [...]

होठों पर कभी अंगार

मायूसी का मत रखना , होठों पर कभी अंगार , जल जाएगी खुशियां [...]

मौन आंखें

मौन आंखे मौन आंखे बोलती है , भेद हृदय का खोलती है l हृदय है या [...]

बहन बेटियों की लाज बचाइए

मां फिर से अपने हाथों में कटार उठाइए l लूट रही बहन बेटियों की [...]

घोर कलयुग

घोर कलयुग लिया पनाह हैl अच्छाई ही बड़ा गुनाह है l अच्छे बुरे [...]

भारत मां का लाल दुलारा

आज सूर्य एक अस्त हुआ है l दूसरा कल उदित होगा , मन दुखों में है [...]