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Author: Rita Singh

Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

नहीं सरल राजत्व निभाना

नहीं सरल राजत्व निभाना राजा तुम्हें समझना होगा , राजतिलक [...]

आओ रोपें इक तरुवर हम

आओ रोपें इक तरुवर हम अपनी प्यारी तनुजा के नाम सींचें उसको [...]

राजन हमें बताओ तुम !

राजन हमें बताओ तुम ! कितने सैनिक अभिमन्यु सम बलिदान हमें [...]

गुलमोहर तुम हो शहजादे

गुलमोहर तुम हो शहजादे तुमको मेरी राधे राधे , तप्त हवाओं संग [...]

भगवन तूने माँ को बनाया

भगवन तूने माँ को बनाया कैसा कृपा धन बिखराया , तेरा कैसे करूँ [...]

एक सात्विक रिश्ता : सच्ची मित्रता

निःस्वार्थ , निर्विकार , निष्पक्ष , निष्पाप भावों से युक्त [...]

मैया की ममता

मैया तेरा नटखट लाला -- किशन द्वारिकाधीश बना कल तक जिसने मटकी [...]

सूरज काका

सुबह सवेरे सूरज काका नित मुस्काते तुम आते हो अपनी सोने की [...]

अमलतास तरु एक मनोहर

ग्रीष्म ताप पर प्रतिस्पर्धा में जीत सदा ही वो पाता है पीत [...]

ममता बेटी बिना न पूरी

************* ममता बेटी बिना न पूरी । मॉ की रहती आस अधूरी।।१!! बेटी [...]

बैसाख मास सँग अपने

बैसाख मास सँग अपने कनक उपहार लाया है , हुआ कण कण है [...]

जल बिन सूना है संसार

जल जीवन का है आधार जल जग का करता उद्धार । जल सृष्टि का एक [...]

माला के जंगल:

कुछ तपस्वी से लगते हैं शांत भाव से तप करते हैं हरे भरे [...]

आया बसंत सखी आया बसंत

आया बसंत सखी आया बसंत चहुँदिशि खुशियाँ लाया अनंत महक रहे [...]

सजी धरा है सजा गगन है

सजी धरा है सजा गगन है सज गया सृष्टि का कण कण है रँग बिरंगे [...]

वे बलिदानी मसताने थे

राजगुरु सुखदेव भगत सिंह आजादी के दीवाने थे , हँसते हँसते गए [...]

संकट और खुशहाली

प्रभु ! संकट के समय ' मुझे बचा लो ' तुमसे ऐसी गुहार नहीं करूँगी [...]

फाग माह का हैं उपहार

नव पल्लव सज्जित तरुवर फाग माह का हैं उपहार , कोमल कोपल महक [...]

नमामि गंगे

जय जय गंगे , जय जय गंगे । नमामि गंगे , नमामि गंगे ।। पाप नाशिनी , [...]

पथिक वही जो बढ़ता जाता

पथिक वही जो बढ़ता जाता अवरोधों से कब घबराता , ऊँची-नीची सब [...]

क्षत्राणी की गौरव गाथा

क्षत् से रक्षा करती है जो वह क्षत्राणी कहलाती है क्षत्राणी [...]

ये प्रातः तुम्हें सजानी है

ओ भारत की भावी नारी ! बहुत सो चुकी अब तो जागो , ये प्रातः [...]

आया फागुन मास

रसिया के रंग में जब खेले गोरी फाग । समझो ए संग सहेली आया [...]

जीवन

जीवन सरस सलिल सा बहता जीवन अवरोधों संग बढ़ता जीवन निशा [...]

गोपी दर्शन प्यासी हैं

रम गये कान्हा राज पाट में गोपी दर्शन - प्यासी हैं , मिलना कैसै [...]

नेह की पीड़ा

जब गमन तुम्हारा होना तय था क्यों गोपी में नेह जगाया था [...]

कान्हा की वंशी

वंशी तुम्हारी प्रिय कान्हा किस्मत कैसी लायी है , बनी काठ की [...]

ऋतु बसंत

कोयल डाल- डाल, जब बोली कलियों ने तब आँखें खोली पवन महक [...]

राजपथ पर चमका वैभव

राजपथ पर चमका वैभव उसका मान सजाना है , भारत के बढ़ते कदमों [...]

मतदान जागरूकता के लिए प्रयास

मतदान जागरुकता के लिए कुछ नारे - मतदान अगर शत प्रतिशत [...]