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Author: Rishikant Rao Shikhare

Rishikant Rao Shikhare
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चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना; अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं

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ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं, तू सितम कर ले, तेरी [...]

समय का सदुपयोग करो।

एक सेकेण्ड जो मौत से बचा हो। एक मिनट जिनकी ट्रेन छूट गयी [...]

होली के रंग।

उन गुलाबी चाँद के चेहरे पे थोड़ी रंग लगा देते, आइ्ये घनी [...]