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Author: Ramesh chandra Sharma

Ramesh chandra Sharma
Posts 34
Total Views 587
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

घट रीते के रीते हैं…..

ग़ज़लः- ग़म तो बचपन से खाए हैं,आँख का पानी पीते [...]

क्या हसीं मोड़ पे जीवन की कहानी……..

क्या हसीं मोड़ पे जीवन की कहानी आई बात बिगड़ी हुई हमको न बनानी [...]

बेटी

-: बेटी :- मेरे आंगन में आकर जब भी चिड़िया चहचहाती है, मैं रो लेता [...]

हर फसाना आजकल……..

ग़ज़ल अश्क में डूबा हुआ है हर फ़साना आजकल, मुस्कुराए हो गया [...]

हिंदी के उत्थान से…….

हम कबीर की कलम उठाके निकले स्वाभिमान से , छंदों की स्याही भर [...]

क्या तमाशा है दिल लगाना भी………

पास आकर के दूर जाना भी क्या तमाशा है दिल लगाना भी। आँख से आँख [...]

हाथ से हाथ पर नहीं छूटे……..

सांस अपनी अगर कभी टूटे हाथ से हाथ पर नहीं छूटे । रूह तो [...]

फल तो वो देगा जो सबका मीत है..

"कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" ......... फल तो वो देगा जो [...]

सांझ ढलने की हमनें कहानी लिखी ………..

गीत उगते सूरज को करते रहे तुम नमन साँझ ढ़लने की हमने कहानी [...]

पर खुशियों की बात नहीं है…….

गज़ल ग़म का तो अब साथ नहीं है, पर खुशियों की बात नहीं [...]

तौहफा समझ के ………..

तौहफा समझ के झोली में डाली नहीं गयी, आज़ादी इक दुआ थी जो खाली [...]

वतन से इश्क करो …….

राष्ट्रहित मै ये जीवन हवन तो करो जीत जाओगे दिल से जतन तो करो [...]

चूड़ियाँ……

चूड़ियाँ मुझको तब लुभाती हैं, जब अनायास ही बज जाती हैं| एक [...]

साहिलों ने हमें सूखी हुई………

साहिलों ने हमें सूखी हुई नदी समझा; हमको हर दौर ने गुजरी हुई [...]

दिन शायराने आ गए…….

यूं लगा दिन ज़िंदगी में शायराने आ गए अब गज़ल के काफिये हम को [...]

भोर के पल ढूंढा करता हूँ……..

गीतिका काली कजराई रातों में भोर के पल ढूँढा करता [...]

राखी के दोहे……..

रक्षाबंधन ...... भेज रही भैया तुम्हें, राखी के दो तार, बन्द [...]

मीरा ………

मेवाड़ के शुष्क धरातल पर, बन प्रेम का सागर छा गई मीरा। रेत के [...]

खुद सूरदास की आँखों से …….

देखा महादेवी, दिनकर को और पंत, निराला देखा है, हमने मंदी के [...]

अन्तर्तम तक भिगो गए हैं………

जी करता है रोज़ सुनाऊँ, लिख दूं इतने सारे गीत, जीवन लहरों का [...]

रिश्ते भी हर किसी को ………

आंसू भी गम की आग बुझाने नहीं आते , दुःख दर्द में भी दोस्त [...]

हो गयी है अधूरी गज़ल………

कहीं और चल ज़िन्दगी हो गई है अधूरी ग़ज़ल [...]

पानी को तो पानी लिख……..

गीतिका मिथ्या जीवन के कागज़ पर सच्ची कोई कहानी लिख, नीर [...]

लडकियां उदास हो गईं……..

वहशियों का ग्रास हो गईं ,लडकियां उदास हो गईं, भेडियो की [...]

बेटी ……….

-: बेटी :- मेरे आंगन में आकर जब भी चिड़िया चहचहाती है, मैं रो [...]

यूं न ठुकरा माँ……….

गीत यूँ न ठुकरा मुझे, मत तिरस्कार कर, एक मूरत हूँ मैं [...]

बेटियां…….

उदासी छाई हो तो खुशनुमा मंजर बनातीं हैं, हमारी ज़िंदगी को और [...]

राह चुनने का हमें……..

राह चुनने का हमें जब बोध होगा, यात्रा में फिर नहीं अवरोध [...]

माँ………

माँ मां कुछ दिन तू और न जाती, मैं ही नहीं बहू भी कहती, कहते [...]

माँ,,,,,,,

मुक्तक (1) मोहब्बत से भरा एक पल भी वो खोने नहीं देती, मेरे ग़म [...]