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Author: Nasir Rao

Nasir Rao
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

इश्क़ इतना ग़ज़ब किया जाए।।

जो भी होता है सब किया जाए,, इश्क़ इतना ग़ज़ब किया जाए।। जिंदगीभर [...]

हम-सफर नहीं जिनके रास्तों से जलते है

हम-सफर नहीं जिनके रास्तों से जलते हैं इनकी अपनी राय है [...]

कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं

कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं छुपाऊँ क्या मैं ज़ाहिर क्या [...]

अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ

अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ मजबूरियों के हाथ [...]

ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं

ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं अलग माहौल है अपना [...]

मियाँ सब कुछ गवारा हो रहा है

मियाँ सब कुछ गवारा हो रहा है बहुत कम मैं गुज़ारा हो रहा [...]

हम जैसों की नींद उडा दी जाती है

पहले दिल से नक़्श मिटाए जाते हैं मेज़ से फिर तस्वीर हटा दी [...]

किसी से कोई खतरा ही नहीं है

किसी से कोई खतरा ही नहीं है हमें जीने का चस्का ही नहीं [...]

ज़िंदगानी बदल चुकी लाला

ज़िंदगानी बदल चुकी लाला अब कहानी बदल चुकी लाला अब यहाँ कोई [...]

संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे

संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे आँखो में रहे फिर भी वो पानी [...]

अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है

जो घाव तुुम्ने दिया था वो घाव ज़िंदा है अभी हँसो न मेरी जान [...]

सर पे सूरज खडा है चल उठजा

सर पे सूरज खडा है चल उठजा "काम बाकी पडा है चल उठजा तुझको [...]

वो दर ओ बाम क्यूँ नहीं आता,,

इक दिया आम क्यूँ नहीं आता, वो दर ओ बाम क्यूँ नहीं आता,, एक ही [...]

पत्थरों की कहानियाँ लिख दो

पत्थरों की कहानियाँ लिख दो ख़ुश्क आँखों रवानियाँ लिख [...]

बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे ‘

हालत ऐ हिज्र है तो क्या कीजे बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे ' आग [...]

खंजर की चुभन से ही मैं पहचान गया था

उस पर तो कभी दिल का कोई ज़ोर नहीं था हमसा भी ज़माने में कोई और [...]

फ़िर तेरी याद आ गयी ‘नासिर’

हद से ज़ियादा वबाल कर डाला फिर खुदा ने ज़वाल कर डाला अपना [...]

चराग़ों की लवें भडकी हुईं हैं

पहाडों से गुज़रना पड रहा है मुझे चढकर उतरना पड रहा [...]

मन्ज़रों के नाम होकर रह गयी

मन्ज़रों के नाम होकर रह गयी खास सुरत आम होकर रह गयी रात दुख [...]

जब उजाला गली से गुज़रने लगा

जब उजाला गली से गुज़रने लगा सब अंधेरों का चेहरा उतरने [...]

कभी कभी वो मिला करेगा..!!

हमारे हक़ में दुआ करेगा वो इक ना एक दिन वफा करेगा..!! बिछड गया [...]

आप अपनी दवा भी रखते हैं

आप अपनी दवा भी रखते हैं हम दीये हैं हवा भी रखते हैं.!! मुख्तसर [...]

ज़िंदा

तुम्हारे जिस्म की खुशबु तुम्हारे लम्स का जादु मेरे अहसास की [...]

हम अपने आपकी किस्मत ख़राब लिखते हैं

कहीं अज़ाब कहीं पर सवाब लिखते हैं फरिशते रोज़ हमारा हिसाब [...]

मैं रोते हुएे जब अकेला रहा हूँ

कहाँ और कब कब अकेला रहा हूँ मैं हर रोज़ हर शब अकेला रहा [...]

हमसफर ! आफताब था उसका

"ज़ह्न तो लाजवाब था उसका दिन ही शायद ख़राब था उसका जबकि मेरा [...]

हर शब किसी चराग़ सा जलकर बडा हुआ

तन्हाईयों की गोद में पलकर बडा हुआ बचपन से अपने आप सम्भलकर [...]