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Author: jyoti rani

jyoti rani
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

यह वही नारी है

निडर और स्वावलंबी बनकर अपनी छवि निखारी है असहाय और अबला नहीं [...]

मौसम की व्यथा

रे मौसम क्यों करते हो हम पर इतने सितम अभी चंद महीनों पहले ही [...]

अनमोल जीवन

तोड़ कर गुलाब किसी के बाग़ का अपना गुलशन महकाया तो क्या किया [...]

मन के जीते जीत

मन में उत्साह हो कुछ करने की चाह हो कौन रोक सकता है चाहे [...]

बसेरा

मुझे यहाँ पर नौकरी ज्वाइन किये हुए अभी छ: महीने बीते थे,| मेरे [...]

जीवन दान

रोज की तरह मैं आज भी अपने क्लीनिक में समय पर पहुँच गयी थी | [...]

ट्रैफिक सेंस

मार्ग पर जब दो सवारों का संतुलन खो जाता है तभी एक गंभीर [...]

संघर्षों से लड़कर जीतती आयीं हैं बेटियां

जन्म से पहले, जन्म के बाद, जीवन पर्यंत संघर्षों से लडती ही तो [...]