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Author: RAMESH SHARMA

RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

हरिहर हरिहर जाप

मुख मे तो हरिओम है,मन मे लेकिन पाप ! फिर तो तेरा व्यर्थ है, [...]

चलो मनाएँ ईद हम

चलो मनाएँ ईद हम,सबको लेकर साथ! भुला पुरानी दुश्मनी, ले हाथों [...]

रोजाना फिर ईद है हर महिना रमजान

रोजाना फिर ईद है, हर महिना रमजान ! हमने अंदर का अगर,मार दिया [...]

जीने के आदाब

दौलत बँगले गाड़ियाँ ,सब कुछ उनके पास ! सिर्फ छोड़कर एक [...]

दोहे योग दिवस पर

योग दिवस का कीजिए,मन भावन सत्कार! होता है हर योग से,..रोगों का [...]

गाते मेघ मल्हार

नाच मयूरा झूमकर, गाते मेघ मल्हार ! चढ़ा नाव पर आज फिर, माँझी [...]

आफत मे है जान

बिन पानी सब सून है, सत्य समझ इंसान ! किल्लत से अब नीर की,आफत [...]

जैसे उँचे पेड पर,कच्चे पिंड खजूर

मुझको उसकी बात ये, लगी अनोखी खास! छोड गया जाते समय, खुद को [...]

सेना की हुंकार

बैरी को चढने लगा,सौ से अधिक बुखार! सीमा पर जब भी भरी, सेना ने [...]

हुई शर्म से लाल

किरणो ने जब सूर्य की,छुए भोर के गाल ! खिली रात की चाँदनी, .हुई [...]

पानी मे जब झूठ के पक जाती है दाल

गढ़ता है समभाव से , सारे कलश कुम्हार ! होते हैं तैयार पर,....सही [...]

बढा दायरा सोच का

बढा दायरा सोच का , तेरा मनुज जरूर ! दुनिया से इंसानियत, किन्तु [...]

मिल जाती तारीख

चली नहीं कानून की, उन पर कभी कटार ! होते हैं जो जुर्म के,..... असली [...]

करो सत्य स्वीकार

कितना भी कर लीजिए,यहाँ एक का चार! जाना खाली हाथ है,..करो सत्य [...]

दिया पिटारा खोल

धमकाया मैने बहुत, लिया खूब पुचकार! मुआ पिटारा याद का,खुल [...]

ग़ालिब का दीवान

रहा भूख औ प्यास का,मुझे कहाँ फिर ध्यान ! आया हाथों में जहाँ, [...]

गिरवी पडा मकान

बड़ा घिनौना रोग है, कहते जिसे दहेज़ ! सबको होना चाहिए, अब इससे [...]

समय बड़ा बलवान

ताकत का होता नही,जिसको कभी गुमान ! होता है संसार मे,....वही बडा [...]

राजनीति व्यवसाय

बीच सड़क में काटकर ,माँ को रहे पकाय ! राजनीति दुर्बुद्धि से [...]

इनसे है संसार

धूप हवा जल जान हैं, जीवन के आधार ! इनसे ही है जिंदगी,... इनसे हैं [...]

कैसे बने रईस

उनके चेहरों पर दिखे, एक अजब सी खीस ! टीवी पर चिल्ला रहे ,..ऐसे [...]

पर्यावरण खराब

ढूंढें छायां पेड़ की, खड़ी करें जब कार ! पेड़ लगाने का कभी, करते [...]

उसका करें विरोध

फैलाते दुर्गंन्ध जो,... ऐसे रस्म रिवाज ! उनका करना चाहिए,झटपट [...]

जीवन के दिन चार

करें शरारत वो कभी, करें कभी तकरार ! समझूं इसको दिल्लगी, या [...]

आएगा चितचोर

बदरा बरसे झूमकर ,करे बिजुरिया शोर ! बैठे कंत विदेश में ,मन में [...]

मन मे उठे हिलोर

रात चाँदनी चाँद की ,कालिंदी कर शोर ! देख नजारा ताज का,मन में [...]

कुदरत से खिलवाड

जीवन मे अपने कभी, नही लगाया झाड ! जंगल के जंगल मगर,हमने दिए [...]

रिश्तों की वह डोर

मैने खुद ही तोड दी,.रिश्तों की वह डोर! लगी स्वार्थ वश जो [...]

मातृ दिवस पर दोहे

माँ के दिल को पढ लिया,जिसने भी इंसान ! नही जरूरी बाँचना,...गीता [...]

डाँटे बहुत जमीर

आँखें दोनों मूँदकर, किया अगर विश्वास ! होगा तुमको [...]