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Author: RAMESH SHARMA

RAMESH SHARMA
Posts 88
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कविता दिवस

कथ्य शिल्प रस के बिना,किये छंद कुछ पेश। खूब मनाया [...]

माँ जाती जब झूम

आती हैं यादें कभी, बचपन की कुछ घूम ! शाला से घर लौटते, ..माँ लेती [...]

उलझे उलझे बाल

मैंने अपने हाथ पर,ज्यों ही रखा गुलाल ! याद किसी के आ गये, .गोरे [...]

चले राह पर धर्म की

चले राह पर धर्म की,करे निरन्तर काम ! सूरज की तकदीर मे,कहाँ [...]

छू लेता हूँ होंठ से

फागुन बीता भी नही,,लगा अखरने घाम! आगे आगे देखिए,....क्या होगा [...]

मापदंड दुहरे हुए, ….राजनीति के आज

हक़ तो वह होगी नहीं , और न होगी भीख ! छोटों से पायी हुई ,.... कोई [...]

प्रजातंत्र की मेज पर , उठने लगे सवाल !

शिक्षा को सौदा समझ, करना मत व्यापार ! हर कन्या को दीजिये, [...]

आईना सा हो गया, उनका भी किरदार

आईना सा हो गया, उनका भी किरदार ! आया जो भी सामने,हुआ उसी का यार [...]

इच्छाओं का काफिला, कब होता है शांत !!

चाहे भारी भीड़ हो, ..या गुमसुम एकांत ! इच्छाओं का काफिला, कब होता [...]

रंगो का त्योंहार

दिखे नहीं वो चाव अब, .रहा नहीं उत्साह ! तकते थे मिलकर सभी,जब [...]

नारी का सम्मान

पेंडिंग हों जहँ रेप के, . केस करोड़ों यार ! तहँ रमेश महिला दिवस, [...]

टपकेगी जब आरजू

टपकेगी जब आरजू, नैनो से बन बूंद ! लेना ही तब ठीक है,आँखे अपनी [...]

भ्रस्टाचार आचार

सरे आम अब बिक रहा भ्रस्टाचार आचार ... जनता खाने लग रही हो कर के [...]

शंकर का अभिषेक

बच्चे खड़े कतार में ,भूखे जहाँ अनेक ! वहीं दूध से हो रहा,भोले का [...]

अंग्रेजी में फूल

जिनको चुभते थे कभी, हम भी बनकर शूल ! वही दे रहे आजकल, हमको [...]

बढ़ चढ़ कर मतदान

लोकतंत्र की राह जब,..... लगे नहीं आसान ! फर्ज समझकर तब करो, बढ़ चढ़ [...]

जीवन के आयाम

चोरी मक्कारी ठगी,झूठ सुबह से शाम! बदल गये क्या वाकई,जीवन के [...]

प्रेम दिवस (वेलनटाइन दिवस)

प्रेम दिवस पर कामना, रहती यह हरबार ! देगा अच्छा प्यार से, [...]

वो मेरी राह में दीवार बने बैठे है

जो नसीहत मेरे किरदार से लेते थे कभी, वो मेरी राह में दीवार बने [...]

आई है ऋतु प्रेम की.(नव बसंत)

सरस्वती से हो गया ,तब से रिश्ता खास ! बुरे वक्त में जब [...]

हुआ नहाना ओस में

रिश्ता नाजुक प्यार का, ज्यों प्रभात की ओस ! टिके न ज्यादा देर [...]

बेबस था इतिहास

वाहियात बातें करें,....रहें उगलते आग ! सुर साधो उनके लिए, जैसा [...]

नए नए नित छंद

कलम स्वरूपी पुष्प से ,निकलेगा मकरंद ! यही सोच रचवा रही,..नए नए [...]

दागी नेता बैन

होगा नही महान क्यों, दुनिया मे वो देश ! फहराये झंडा जंहा [...]

बढे राष्ट्र का मान

राष्ट्र-भक्ति की भावना ,भारत का सम्मान ! करिये ऐसा काम जो, बढे [...]

पूरी भाजी छोड़ दी

पूरी भाजी छोड़ दी, छोड़ा तवापुलाव बच्चे खावें पास्ता ,ले ले कर [...]

नित्य नये षडयंत्र

मात्र ख़िलौना रह गया अपना अब गणतंत्र ! भ्रष्टाचारी देश का , [...]

सिमटी हैं कलियाँ अगर

छोड़ रही हर क्षेत्र में , आज बेटियां छाप ! कहने वाले क्यूं कहें, [...]

ये अपना गणतंत्र

कहलाता गणतंत्र का, दिवस राष्ट्रीय पर्व ! होता है इस बात का [...]

मेरे जख्मों की तू दवाई हैै

मेरे जख्मों की तू दवाई है चोट सीने पे आज खाई है जिंदगी के [...]