साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: RAMESH SHARMA

RAMESH SHARMA
Posts 75
Total Views 551
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

शंकर का अभिषेक

बच्चे खड़े कतार में ,भूखे जहाँ अनेक ! वहीं दूध से हो रहा,भोले का [...]

अंग्रेजी में फूल

जिनको चुभते थे कभी, हम भी बनकर शूल ! वही दे रहे आजकल, हमको [...]

बढ़ चढ़ कर मतदान

लोकतंत्र की राह जब,..... लगे नहीं आसान ! फर्ज समझकर तब करो, बढ़ चढ़ [...]

जीवन के आयाम

चोरी मक्कारी ठगी,झूठ सुबह से शाम! बदल गये क्या वाकई,जीवन के [...]

प्रेम दिवस (वेलनटाइन दिवस)

प्रेम दिवस पर कामना, रहती यह हरबार ! देगा अच्छा प्यार से, [...]

वो मेरी राह में दीवार बने बैठे है

जो नसीहत मेरे किरदार से लेते थे कभी, वो मेरी राह में दीवार बने [...]

आई है ऋतु प्रेम की.(नव बसंत)

सरस्वती से हो गया ,तब से रिश्ता खास ! बुरे वक्त में जब [...]

हुआ नहाना ओस में

रिश्ता नाजुक प्यार का, ज्यों प्रभात की ओस ! टिके न ज्यादा देर [...]

बेबस था इतिहास

वाहियात बातें करें,....रहें उगलते आग ! सुर साधो उनके लिए, जैसा [...]

नए नए नित छंद

कलम स्वरूपी पुष्प से ,निकलेगा मकरंद ! यही सोच रचवा रही,..नए नए [...]

दागी नेता बैन

होगा नही महान क्यों, दुनिया मे वो देश ! फहराये झंडा जंहा [...]

बढे राष्ट्र का मान

राष्ट्र-भक्ति की भावना ,भारत का सम्मान ! करिये ऐसा काम जो, बढे [...]

पूरी भाजी छोड़ दी

पूरी भाजी छोड़ दी, छोड़ा तवापुलाव बच्चे खावें पास्ता ,ले ले कर [...]

नित्य नये षडयंत्र

मात्र ख़िलौना रह गया अपना अब गणतंत्र ! भ्रष्टाचारी देश का , [...]

सिमटी हैं कलियाँ अगर

छोड़ रही हर क्षेत्र में , आज बेटियां छाप ! कहने वाले क्यूं कहें, [...]

ये अपना गणतंत्र

कहलाता गणतंत्र का, दिवस राष्ट्रीय पर्व ! होता है इस बात का [...]

मेरे जख्मों की तू दवाई हैै

मेरे जख्मों की तू दवाई है चोट सीने पे आज खाई है जिंदगी के [...]

” फिर आ गए चुनाव”

फिर आयी गति में स्वयं,,आरक्षण की नाव! निश्चित भारत वर्ष [...]

शब्दों का तीर मेरे दिल मे उतर गया

अपने दामन से हटाना था तो कह देते . यूँ दुपट्टे को झटकने की [...]

गोकुल मे गोपाल

राधा से थीं पूछतीं , सखियाँ एक सवाल ! तुम्हे बुलाएं किसलिए, [...]

नेता मेरे देश के

सेवा करें समाज की, निजी स्वार्थ हर त्याग ! क्यों ऐसे लेते [...]

राजनीति मे भाग

सेवा करने को चले,..बनकर सेवादार ! राजनीति का कर रहे,वो देखो [...]

खायी दिल पर चोट

भँवर आज गहरा गया,.. ..खायी दिल पर चोट ! गई निकल कर साफ़ जब, इक कागज़ [...]

कितने पंछी मर गये

कनकौओं की डोरियां,तनीं रहीं बन बाण ! पंछी दिनभर सैकड़ों, हुए आज [...]

उड़ती रहे पतंग

सूर्य उत्तरायण चले, मन में जगी उमंग !! भरें रंग आकाश में, .उड़ती [...]

दोहे रमेश के, मकर संक्रांति पर

मकर राशि पर सूर्य जब, आ जाते है आज ! उत्तरायणी पर्व का,......हो [...]

शीत लहर मे हाल

टूटी-फूटी झोपडी, ठण्डी का आघात ! कैसे कटे गरीब की,बिना रजाई [...]

नजरों में गिरना नहीं, कभी किसी के यार !

नजरों में गिरना नहीं, कभी किसी के यार ! दौलत से इज्जत बड़ी, मिले [...]

लालबहादुर सा छुआ,किसने यहाँ मुकाम

लालबहादुर सा छुआ,किसने यहाँ मुकाम ! छोटे शासन काल में,किये [...]

लेता है निर्णय वही,.जैसा कहे विवेक

कोई न्यायाधीश हो, या हो मानव नेक ! लेता है निर्णय वही,.जैसा कहे [...]